वास्तुशास्त्र से धन संबंधी समस्याओं को सुलझायें!

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Vastu and Money
धन वो धुरी है जिसके चारों ओर सारा संसार गति करता है, बिना धन के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। अर्थशास्त्र ने जीवन की तीन मूलभूत आवश्यकताऐं रोटी-कपड़ा और मकान बतायी हैं, इनकी प्राप्ति भी बिना धन के संभव नहीं है, हम कह सकते हैं अर्थ किसी भी व्यक्ति या देश का अर्थशास्त्र थोड़े ही समय में बना या बिगाड़ सकता है। प्रबुद्ध पाठकजनों!! इस संसार में दो प्रकार के व्यक्ति बहुधा पाये जाते हैं एक वे जिनके पास धन की कमी नहीं है, वे धन को संभालने के लिये चिंतित रहते हैं, दूसरे प्रकार के वे व्यक्ति होते हैं जिनके पास जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये भी पर्याप्त धन नहीं है, मेरा आलेख उन व्यक्तियों के लिये है जिनके पास पर्याप्त मात्रा में धन नहीं है और वे धन प्राप्ति के लिये प्रयासरत हैं। इस निर्धन वर्ग में भी दो प्रकार के व्यक्ति हैं एक वे जो कर्महीन, भाग्यवादी और मेहनत से जी चुराने वाले हैं, वे चाहते हैं कि मुझे बिना प्रयास के केवल टोने-टोटके द्वारा धन प्राप्त हो जाये और हम धनी हो जाये, दूसरा वर्ग उन व्यक्तियों का है जो मेहनती, लग्नशील और पुरूषार्थी होने के बाद भी धन की कमी से जुंझ रहा हैं और किसी कारण वश मां लक्ष्मी उनसे रूष्ट हैं, मेरा आलेख केवल और केवल इन्हीं पुरूषार्थी और कर्मठ व्यक्तियों के लिये समर्पित है। मैं इस आलेख में यह बताने का प्रयास करूंगा कि आपके धन की कमी से जुंझने के ये कारण तो नहीं हैं? यदि हैं! तो इन कारणों को कैसे दूर किया जाये-

* वास्तु के अनुसार उत्तर दिशा (north) धन (money) की दिशा है इसके स्वामी कुबेर हैं, यह दिशा धन के साथ-साथ उस घर की स्त्रियों  का भी प्रतिनिधित्व करती है, कदाचित् इसलिये धन की देवी नारी, लक्ष्मी हैं कोई पुरूष देव नहीं है।

* धन के आगमन के लिये आवश्यक हैं कि किसी भी घर मेें उत्तर (north) दिशा की ओर पर्याप्त स्थान खाली हो, उस ओर कमरों की खिड़कियां हो साथ ही उत्तर दिशा की दिवारें दक्षिण (south) दिशा की दीवारों से नीची हों, इससे घर में धन का आवागमन होता है और उस घर की स्त्रियां भी स्वस्थ व चरित्रवान होती हैं।

लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)
* घर के पानी की निकासी उत्तर से होकर ईशान (NE) दिशा की ओर जाये तो यह धन के आवागमन के लिये अत्यंत शुभ स्थिती होती है।

* उत्तराभिमुखी (north faced) घर में धन का आवागमन बहुत तीव्र गति से होता है।

* किसी घर के उत्तर दिशा में ऊंचा मकान हो या पड़ोसी ने मकान अपने मकान से ऊंचा बना लिया हो तो ऐसे घर में धन का आवागमन धीरे-धीरे अवरूद्ध हो जाता है। इसके उपाय के लिये किसी वास्तुविद् से मकान के नक्शे के साथ सम्पर्क करना चाहिये।

* यदि ईशान दिशा आगे बढ़ी हुई है तो यह धन के आवागमन आदि के लिये अत्यंत अच्छी स्थिती है।

* ईशान दिशा के समीप जल, तालाब, कुंआ, नहर आदि हो तो यह धन सम्पत्ति दायक है।

* यदि किसी घन के ईशान कोण में रसोई घर है तो यह स्थिती निश्चित ही आर्थिक हानि करेगी।

* यदि दक्षिणी मुखी भूखण्ड में दक्षिण की ओर अत्यधिक खाली जगह हो तो यह स्थिती धन की हानि करायेगी।
लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)
यदि ईशान दिशा अन्य सभी दिशाओं से निम्न है तो अत्यन्त हितकारी है। यह सभी प्रकार की सुख संपदा देती है। यदि इसके विपरित ईशान को अन्य सभी दिशाओं से ऊंचा कर दिया जाये तो सुख संपदा के धीरे-धीरे समाप्त होने की पूरी संभावना है। 

* धन रखने की सेफ या तिजोरी को दक्षिण दिशा में रखें परन्तु उसकी अलमारियां हमेशा उत्तर की ओर खुलनी चाहिये।

* यदि घर में आपकी कोई टंकी लीक कर रही है अर्थात उससे पानी टपकता रहता है तो इसे फोरन ठीक करा दे, ये भी आर्थिक नुकसान दे सकती हैं।


युद्धिष्ठर के एक प्रश्न के उत्तर में श्री कृष्ण ने दरिद्रता रोकने के उपाय बताये हैं-वे बताते हैं कि जिस घर में गाय के घी का दीपक जलाया जाता है व उसके घी का ही भोग प्रसाद चढ़ाया जाता है उस घर में दरिद्रता नहीं रहती, घर में आये मेहमान को सबसे पहले पानी देने से भी अशुभ ग्रहों के प्रभाव नष्ट हो जाते हैं।

 पुराणों  में शहद को बहुत महत्व दिया गया है, यदि शहद को घर में रखा जाये तो उससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। उसी प्रकार चंदन का तिलक लगाने व घर में चन्दन रखने से भी व्यक्ति के पापों का नाश होता है, तथा उसकी सुगन्ध नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर देती है।

* घर में कबाड़ या रददी ज्यादा समय तक इकटठा न करके रखे, इसे जल्दी-जल्दी घर से बाहर करते रहे, वास्तु में कबाड़ व रददी समान आर्थिक विपन्नता का बहुत बड़ा कारण माना जाता है।

* सायं को दिन छिपते ही घर के पूजा घर व तुलसी जी के पेड़ के नीचे दीया अवश्य जलाना चाहिये, यदि घर के पूजा घर में थोड़ी देर पूजा की जा सके तो ओर अच्छा है।

* पक्षियों के लिये अपनी छत पर नियमित रूप से दाना-पानी का प्रबन्ध करें, व्यापार में यदि लगातार घाटा हो रहा है तो उसके निदान का यह प्रसिद्ध उपाय है।

लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)
* झाडू जिससे हम घर की सफाई करते हैं उसे दिन में सफाई करने के बाद छूपा कर रख देना चाहिये, और रात्रि में उसे खुले स्थान या घर के मुख्य चौक में रख देना चाहिये।

* आफिस  से,  दुकान से या अपने काम से घर लौटते समय घर में कुछ ना कुछ लेकर आना चाहिये, चाहे तो उस दिन का अखबार ही क्यों ना हो।

* काम से घर लौटते समय अपनी पत्नि को कुछ रूपये दस, बीस या कम-ज्यादा नियमित रूप से चालीस दिन तक रोज दे, धन के आवागमन का यह भी एक अच्छा उपाय है

[पाठकगण! यदि उपरोक्त विषय पर कुछ पूछना चाहें तो कमेंटस कर सकते हैं, या मुझे मेल कर सकते हैं! वास्तु के लिये प्रोफेसनल सेवायें भी उपलब्ध हैं, इसकी जानकारी आप मुझे मेल करके प्राप्त कर सकते हैं।  -लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com]

8 comments :

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    1. आदरणीय नीरज जी! सादर नमन! आलेख पर टिप्पणी करने के लिए धन्यवाद!

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (14-08-2016) को "कल स्वतंत्रता दिवस है" (चर्चा अंक-2434) पर भी होगी।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आदरणीय शास्त्री जी सादर नमन! मेरे आलेख को अपनी प्रविष्टि में स्थान देने के लिए धन्यवाद!

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  3. कमेंट्स के लिए आभार! संजय भास्कर जी !

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  4. वास्तु के अनुसार उत्तर दिशा (north) धन (money) की दिशा है इसके स्वामी कुबेर हैं, यह दिशा धन के साथ-साथ उस घर की स्त्रियों का भी प्रतिनिधित्व करती है, कदाचित् इसलिये धन की देवी नारी, लक्ष्मी हैं कोई पुरूष देव नहीं है। बढ़िया जानकारी संजय जी

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    1. कमैंट्स के लिए सादर धन्यवाद! आदरणीय योगी जी!

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