मुक्तक/शेरों-शायरी

मुक्तक/शेरों-शायरी के आलेख 
प्यास वो दिल की बुझाने कभी.....मुक्तक और रुबाइयाँ !
बांह में भरकर धरा को...मुक्तक और रुबाइयाँ
अक्ल पे मरदों की पड़ गया...मुक्तक और रुबाइयाँ
हजारों ख्वाहिशें ऐसी.....मुक्तक और रुबाइयाँ
मैं अकेला ही चला था जानिबे-मंजिल....मुक्तक और रूबाइयां
अपने हाथों की लकीरों मे बसा.....मुक्तक और रूबाइयां
दिल की चोटों ने कभी चैन से..... मुक्तक और रुबाइयाँ
चोट करते हैं फूल भी...........मुक्तक और रुबाइयाँ
यूं ही बेहिसाब न फिरा करो..... मुक्तक और रूबाइयां
कभी बिछुड़े तो कभी साथ.......मुक्तक और रुबाईयाँ
आकर मेरी मजार पर तूने जो मुस्करा.......... मुक्तक और रुबाईयाँ
खुश्बू की तरह आया वो........मुक्तक और रुबाईयाँ
मुसाफिर राह में हो शाम गहरी.....मुक्तक और रुबाइयाँ
मुझे उठाने आया है वाइजे-नादां..मुक्तक और रूबाइयां
याद आएंगे जमाने को मुक्तक और रुबाईयाँ
देखे 'जिन्दगी' के विभिन्न 'रूप', शायरों-कवियों की 'नजरों' से!
मौत के कुएं में अपनी जान पर खेलता सवार, कभी हाथ छोड़कर, कभी हाथ जोड़कर और आपके हाथ में से पैसे भी ले जाता है, दर्शक डर रहें हैं परन्तु ये नहीं डरता! अवश्य देखिये!
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मौत का कुआँ, ये नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा! Wall-Well of Death

https://www.youtube.com/watch?v=6Q5X4zQuRlA

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