Vijaya Ekadashi 2022-story-date-muhurat विजया एकादशी 2022 की कथा-तिथि-मुहूर्त एवं पारण

विजया एकादशी 2022 की कथा-तिथि-मुहूर्त 
एकादशी
के व्रत को सभी व्रतों में श्रेष्ठतम माना जाता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार यदि एकादशी का व्रत निर्जला किया जाए तो उत्तम माना गया है। भगवान श्री हरि विष्णु के भक्तों के लिए एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। माना जाता है कि 
विजया एकादशी के व्रत से व्रती को हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है, पूर्वजन्म के पापों से छुटकारा मिलता है। पद्म पुराण के अनुसार, ये अत्यंत पुण्यदायी एकादशी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस योग में व्रत करने से पूजा का फल तीन गुना मिलता है। लंका विजय के लिए भगवान श्रीराम ने इसी दिन समुद्र किनारे पूजा की थी। 

विजया एकादशी व्रत कथा (Vijaya  Ekadashi Vrat Katha)
पौराणिक कथा व रामायण के अनुसार, जब रावण ने छल से माता सीता का हरण कर लिया तो भगवान श्रीराम और उनके अनुज लक्ष्मण बहुत ही चिंतित हो गए। फिर उनकी हनुमान जी की सहायता से सुग्रीव से मुलाकात हुई। और श्रीराम-लक्ष्मण वानर सेना की मदद से रावण की लंका पर चढ़ाई करने के लिए विशाल समुद्र के तट पर आए। परन्तु लंका पर चढ़ाई कैसे की जाए? क्योंकि उनके सामने विशाल समुद्र था, जिसको पार करना बहुत कठिन प्रतीत हो रहा था। उनको कोई उपाय नही सूझ नहीं रहा था। अंत में उन्होंने समुद्र से ही लंका पर चढ़ाई करने के लिए मार्ग मांगा, लेकिन समुद्र ने उनके निवेदन को अनसुना कर दिया। वहां से कुछ दूरी पर कुमारी द्वीप में वकदाल्भ्य मुनि का आश्रम था, श्रीराम ने वकदाल्भ्य मुनि से इसका उपाय पूछा। तब मुनि वकदाल्भ्य ने श्रीराम को अपनी वानर सेना के साथ विजया एकादशी का व्रत करने का उपाय बताया। वकदाल्भ्य ने बताया कि किसी भी शुभ कार्य की सिद्धि के लिए विजया एकादशी व्रत करने का विधान है। मुनि की बातें सुनकर भगवान राम ने फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को वानर सेना के साथ विजया एकादशी व्रत किया और विधि विधान से पूजा की। कहा जाता है कि विजया एकादशी व्रत के प्रभाव से ही उनको समुद्र से लंका जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ। विजया एकादशी व्रत के पुण्य से ही श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की। तब से विजया एकादशी व्रत का महत्व और बढ़ गया। जनमानस में विजया एकादशी व्रत प्रसिद्ध हो गया और लोग अपने किसी भी कार्य की सफलता के लिए विजया एकादशी का व्रत करने लगे।

विजया एकादशी का महत्व  Vijaya  Ekadashi Importance
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत (Ekadashi Vrat) का विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर एक महीने में दो एकादशी का व्रत आता है जो एक शुक्ल पक्ष में जबकि दूसरा कृष्ण पक्ष को पड़ता है। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि (Ekadashi 2022) को विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi 2022) मनाई जाएगी। यह तिथि जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है। विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) का विधि-विधान से पूजन और व्रत किया जाता है। इस साल विजया एकादशी व्रत 27 फरवरी दिन रविवार को पड़ रहा है। विजया एकादशी व्रत के बारे में पद्म पुराण और स्कन्द पुराण में अति सुन्दर वर्णन मिलता है।

विजया एकादशी 2022 तिथि एवं मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 26 फरवरी दिन शनिवार को सुबह 10 बजकर 39 मिनट से हो रहा है, जो अगले दिन 27 फरवरी दिन रविवार को प्रातः 08 बजकर 12 मिनट तक है, उदयातिथि के आधार पर 27 फरवरी को विजय एकादशी का व्रत रखना चाहिए।

विजया एकादशी 2022 पारण
जो लोग विजया एकादशी का व्रत करेंगे, उनको व्रत का पारण 28 फरवरी को प्रातः 06 बजकर 48 मिनट से सुबह 09 बजकर 06 मिनट के मध्य कर लेना चाहिए। हालांकि द्वादशी तिथि का समापन सूर्योदय से पूर्व हो जा रहा है।

(इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं स्थानीय पंचांग पर आधारित हैं |  इन पर अमल करने से पहले अपने स्थानीय मंदिर के पुरोहित से भी संपर्क करें)
पाठकगण! यदि उपरोक्त विषय पर कुछ पूछना चाहें तो कमेंटस कर सकते हैं, या मुझे मेल कर सकते हैं!    
लेखक-संजय कुमार गर्ग (एस्ट्रोलॉजर/वास्तुविद)
 sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)

वास्तु-टिप्स-मकान खरीदते समय ध्यान रखें ये बातें, ताकि बाद में ना पछतायेँ  !

कहावत है जिन्दगी में घर house एक बार ही बनाया जाता है, उस बनाने के लिए इन्सान दिन-रात जुटा रहता है। वर्तमान में जमीन की कमी और अधिक लोगों को आवास उपलब्ध कराने के लिए फ्लैट का चलन भी बढ गया है। शहरों में मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बन रही हैं। आवास में सुख-शांति और समृद्धि के लिए वास्तु के नियमों का पालन करना बहुत जरुरी है। अक्सर हम जल्द बाजी में खरीदे गये या बनाये गये घर में वास्तु की अनदेखी कर देते हैं, ना हम किसी वास्तुविद् से सलाह लेना उचित समझते हैं, क्योंकि हमने बहुत सी किताबें वास्तु की पढ़ी हुई होती हैं? यदि कोई किताब पढ़ कर ही वास्तुविद् बनने का प्रयास करता है तो वो एक बड़ी भूल कर देता है, क्योंकि पढने और अनुभव करने में बहुत अंतर होता है। समस्या जब होती है जब घर में रोग, अशांति, चितांयें धीरे-धीरे प्रवेश करती हैं, जब तक हम जागते हैं, तब तक बहुत देर हो गयी होती है, अतः यदि आप भी फ्लैट लेने या मकान बनाने का विचार कर रहे हैं तो वास्तु के इन नियमों का पालन करने के साथ-साथ किसी वास्तुविद् से सलाह जरूर ले लेनी चाहिए, आइये अब जानते हैं फ्लैट खरीदते वक्त किन बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए-

-भूमि-जमीन के बारे में पूरी जानकारी अवश्य लें। जमीन कैसी है, भवन निर्माण से पहले भूमि किस काम के लिए प्रयुक्त होती थी, इसका पता करें। बिल्डिंग बनाने से पहले जमीन पर कोई क्रब या कब्रिस्तान तो नहीं था। वास्तु नियमों के अनुसार बिल्डिंग के नीचे दबी कोई अच्छी या बुरी वस्तुएं सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करती हैं। हालांकि तीन मंजिल से ऊपर फ्लैट पर इस तरह के दोष का असर नहीं होता। यानी तीन मंजिल से ऊपर का फ्लैट है तो फिर बिल्डिंग की जमीन की पूर्व स्थिति ज्यादा मायने नहीं रखती।

-जिस घर को ले रहें हैं उस घर के सामने कोई पेड़, मंदिर या खम्बा आदि न हो जिसकी परछाई घर पर पड़े, इससे आपकी सफलता में बाधा उत्पन्न हो सकती है|

-घर का मुख्य द्वार आपके घर में सुख-समृद्धि, तरक्की, खुशहाली व सकारात्मकता लेकर आता है। जमीन खरीदते समय भी इस बात का प्रयास करें कि वह दक्षिणमुखी न हो। यदि मजबूरीवश लेना पड़े तो वास्तुविद से सलाह लेकर उसका दोष निवारण करा लेना चाहिए| 
 
-अब रसोई (किचन के वास्तु के लिए ये आलेख पढ़ें) को देखते हैं, घर में रसोई सबसे महत्वपूर्ण है। यदि इसे घर का गृहमंत्रालय कहा जाये तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। फ्लैट में रसोई की स्थिति को अवश्य जांच लें। आग्नेय कोण (SE) में बनी रसोई सबसे श्रेष्ठ होती है। इस दिशा में बिजली के उपकरण रखने में भी कोई परेशानी नहीं होती है। यदि फ्लैट वास्तु के अनुसान निर्मित है तो इस दिशा के स्वामी ग्रह प्रसन्न रहते हैं। घर की महिलायें या युवतियां कम बीमार होती हैं और इससे घर में सुख-समृद्धि और प्रसन्नता बनी रहती है। 

-फ्लैट में ध्यान रखें कि बाथरूम और टॉयलेट (टॉयलेट  के वास्तु के लिए ये आलेख पढ़ें) नैऋत्य दिशा (SW) यानी दक्षिण-पश्चिम और ईशान कोण (NE) में नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा है तो घर में कलह और तनाव बना रहेगा। घर के बच्चे बीमार रहेंगे, बड़े बच्चों की चरित्रहीन होने की पूरी संभावना है, उत्तर-पूर्वी यानी ईशान कोण जल का प्रतीक है। यहां पीने के पानी का स्रोत होना चाहिए। घर के इस हिस्से में पानी से भरा मटका रख सकते हैं, और उसे 15-20 दिन में बदल दें। वायव्य कोण (North-west) में सेप्टिक टैंक एवं शौचालय होना अच्छा रहता है।
 
-भवन में बेडरूम (बेडरूम वास्तु के लिए ये आलेख पढ़े) पूर्व-दक्षिण दिशा यानि आग्नेय कोण में नहीं होना चाहिए। इससे पति-पत्नि दोनों में गुस्सा रहेगा, और वैवाहिक संबंध प्रभावित होंगे, ऐसा होने पर जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। खुशियां प्रभावित होने लगती हैं।

-बैठक कक्ष (ड्रांइग रूम) (ड्राइंगरूम  के वास्तु के लिए ये आलेख पढ़ें) के लिये उत्तर दिशा (N) सर्वश्रेष्ठ है। पूर्व (E) दिशा या ईशान (NE) में भी ड्रांइग रूम अच्छा माना जाता है।

[पाठकगण! यदि उपरोक्त विषय पर कुछ पूछना चाहें तो कमेंटस कर सकते हैं, या मुझे मेल कर सकते हैं! वास्तु के लिये प्रोफेसनल सेवायें भी उपलब्ध हैं, इसकी जानकारी आप मुझे मेल करके प्राप्त कर सकते हैं।                                                             -लेखक-संजय कुमार गर्ग, (वास्तुविद, एस्ट्रोलॉजर)    
                                                                 sanjay.garg2008@gmail.com]

अदरक-सोंठ से 30 फायदे !!

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अदरक 
Ginger सभी की रसोई में पायी जाती है, अदरक Ginger में अनेक औषधीय गुण होने के कारण आयुर्वेद में इसे महा औषधि माना गया है। यह गर्म, तीक्ष्ण, भारी, पाक में मधुर, भूख बढ़ाने वाला, पाचक, चरपरा, रुचिकारक, त्रिदोष मुक्त यानी वात, पित्त और कफ नाशक होता है। आयुर्वेद के अनुसार अदरक Ginger की रसायनिक संरचना में 80 प्रतिशत भाग जल होता है, जबकि सोंठ में इसकी मात्रा लगभग 10 प्रतिशत होती है। इसके अलावा स्टार्च 53 प्रतिशत, प्रोटीन 12.4 प्रतिशत, रेशा (फाइबर) 7.2 प्रतिशत, राख 6.6 प्रतिशत, तात्विक तेल (इसेन्शियल ऑइल) 1.8 प्रतिशत तथा औथियोरेजिन मुख्य रूप में पाए जाते हैं। अदरक Ginger को सुखाने पर जो प्राप्त होता है उससे सौंठ कहते है। सोंठ में प्रोटीन, नाइट्रोजन, अमीनो एसिड्स, स्टार्च, ग्लूकोज, सुक्रोस, फ्रूक्टोस, सुगंधित तेल, ओलियोरेसिन, जिंजीवरीन, रैफीनीस, कैल्शियम, विटामिन बी और सी, प्रोटिथीलिट एन्जाइम्स और लोहा भी मिलता हैं। प्रोटिथीलिट एन्जाइम के कारण ही सोंठ कफ हटाने व पाचन संस्थान में विशेष गुणकारी सिद्ध हुई है। क्योंकि सौठ अदरक Ginger का एक अंग है अतः इस आलेख में हम सौंठ के फायदों के बारे में भी बात करेंगे।

अदरक के फायदे- Benifits of Ginger

1-बालों के रोग :- अदरक Ginger और प्याज का रस सेंधानमक के साथ मिलाकर गंजे सिर पर मालिश करें, इससे गंजेपन से राहत मिलती है।
2-हाथ-पैर का सुन्न हो जाना :- सोंठ और लहसुन की एक-एक गांठ में पानी डालकर पीस लें तथा प्रभावित अंग पर इसका लेप करें। सुबह खाली पेट जरा-सी सोंठ और लहसुन की दो कली प्रतिदिन 10 दिनों तक चबाएं।
3-नजला, नया जुकाम :- सौंठ और गुड़ पानी में डालकर उबाल लें। जब चौथाई रह जाए तब सुहाता-सुहाता छानकर पी जाएं। गले में ठंडक और खराश होने पर अदरक चूसें अथवा अदरक के छोट-छोटे टुकड़े, अजवायन, दाना मेथी और हल्दी प्रत्येक आधा-आधा चम्मच भरकर एक गिलास पानी में उबालें। जब आधा पानी शेष रह जाए तब स्वादानुसार जरा-सा गुड़ मिलाकर छानकर रात को सोते समय यह काढ़ा पी कर सो जाएं।
4-कब्ज :- अदरक Ginger का रस Juice 10 मिलीलीटर को थोड़े-से शहद में मिलाकर सुबह पीने से शौच खुलकर आती है और यदि एक कप पानी में एक चम्मच भर अदरक को कूटकर पानी में 5 मिनट तक उबाल लें। छानकर पीने से कब्ज नहीं रहती है।
5-सफेद-दाग :- 30 मिलीलीटर अदरक Ginger Juice का रस और 15 ग्राम बावची को एक साथ मिलाकर और भिगोकर रख दें। जब अदरक का रस और बावची दोनों सूख जायें तो इन दोनों के बराबर लगभग 45 ग्राम चीनी को मिलाकर पीस लें। अब इसकी एक चम्मच की फांकी को ठंडे पानी से रोजाना 1 बार खाना खाने के एक घंटे के बाद लें।
6-सिर का दर्द :- अदरक Ginger के रस Juice और दूध Milk को बराबर मात्रा में मिलाकर सूंघने से सिर का दर्द दूर हो जाता है। या अदरक Ginger का रस, गुड़, सेंधानमक और पीपल को एक साथ घिस लें और पानी के साथ सूंघने से सिर की सभी बीमारियां ठीक हो जाती हैं।
7-मस्सा और तिल :- अदरक Ginger के एक छोटे से टुकड़े Pisces को काटकर छील लें और उसकी नोक बना लें। फिर मस्से पर थोड़ा सा चूना लगाकर अदरक Ginger की नोक से धीरे-धीरे घिसने से मस्सा बिना किसी आप्रेशन के कट जायेगा और त्वचा पर कोई निशान भी नहीं पडे़गा। बस शुरू में थोड़ी सी सूजन आयेगी।
8-गठिया :- 10 ग्राम सोंठ 100 मिलीलीटर पानी में उबालकर ठंडा होने पर शहद या शक्कर मिलाकर सेवन करने से गठिया रोग दूर हो जाता है।
9-जोड़ों का दर्द :- अदरक Ginger के एक किलोग्राम रस Juice में 500 मिलीलीटर तिल का तेल डालकर आग पर पकाना चाहिए, जब रस जलकर तेल मात्र रह जाये, तब उतारकर छान लेना चाहिए। इस तेल की शरीर पर मालिश करने से जोड़ों की पीड़ा मिटती है।
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10-दमा :-
लगभग एक ग्राम अदरक 
Ginger के रस Juice को एक ग्राम पानी से सुबह-शाम लेने से दमा और श्वास रोग ठीक हो जाते हैं। 
11-हृदय-रोग :- अदरक Ginger का रस तथा शहद, दोनों को मिलाकर नित्य उंगली से धीरे-धीरे चाटें। दोनों की मात्रा आधा-आधा चम्मच होनी चाहिए। इससे हृदय रोग में लाभ मिलता है।
12-बवासीर :- अदरक Ginger 500 ग्राम और पीपल 250 ग्राम को मिलाकर पेस्ट बनाकर इसे 500 ग्राम घी में पकायें। कालीमिर्च, चाव-चितावर, नाग केसर, पीपलामूल, इलायची, अजमोद, कालाजीरा और हर्रे। सब थोड़े-थोड़े से बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनायें। अदरक और पीपल से बने पेस्ट को इस चूर्ण के साथ मिलाकर इसमें 1 किलो गुड़ की चासनी बनाकर डालें। गुड़ और बाकी पेस्ट से बने गाढ़े चासनी को 60 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से पाक बवासीर, कामला, अरुचि और मंदाग्नि बवासीर ठीक होता है।
13-एलर्जी :- अदरक Ginger के रस Juice में थोड़ा-सा जीरा तथा पुराना गुड़ मिलाकर सेवन करने से एलर्जी के रोग में लाभ होता है।
14-जुकाम :- 10 ग्राम अदरक को 10 ग्राम गुड़ के साथ मिलाकर थोड़ा सा गर्म करके रोजाना रात को सोते समय खाने से बार-बार जुकाम होने का रोग ठीक हो जाता है। इसको खाने के बाद पानी नहीं पीना चाहिए।
15-पेट :-  के सभी प्रकार के रोगों के लिए :- पिसी हुई सोंठ एक ग्राम, जरा-सा हींग और सेंधानमक को पीसकर चूर्ण बनाकर गर्म पानी के साथ फंकी के रूप में सेवन करने से पेट के दर्द में लाभ होता है।
16-हाजमे की खराबी :- Ginger का रस आधा चम्मच, सेंधानमक 1 चुटकी और नींबू का आधा चम्मच रस को मिलाकर सुबह और शाम खाना खाने के बाद सेवन करने से हाजमे की खराबी में लाभ होता है।
17-बहरापन :- अदरक का रस हल्का गर्म करके बूंद-बूंद कान में डालने से बहरापन नष्ट होता है।
18-कान का दर्द :- कान में मैल जमने के कारण, सर्दी लगने के कारण, फुंसियां निकलने के कारण या चोट लगने के कारण कान में दर्द हो रहा हो तो अदरक के रस को कपड़े में छानकर हल्का सा गर्म करके 3-4 बूंदें कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है। अगर पहली बार डालने से दर्द नहीं जाता तो इसे दुबारा डाल सकते हैं।
19-कान में आवाज होना :- लगभग 6 मिलीलीटर अदरक का रस, 3 ग्राम शहद, लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग सेंधानमक और 3 ग्राम तिल के तेल को एक साथ मिलाकर रोजाना 2-3 बूंदे कान में डालने से कान का दर्द, कानों में अजीब सी आवाजे सुनाई देना और कानों से सुनाई न देना (बहरापन) आदि रोग दूर हो जाते हैं।
20-कमर-दर्द :- 10 मिलीलीटर अदरक के रस में 5 ग्राम घी मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से कमर दर्द में लाभ करता है।
21-मासिक-धर्म की अनियमितता :- अजवायन का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में गर्म दूध के साथ सेवन करने से रुका हुआ मासिक धर्म नियमित रूप से आना शुरू हो जाता है।
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22-गुर्दे के रोग :-
अदरक का रस 10 मिलीलीटर में हींग भूनी (R
oasted asafoetida) लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग पीसकर नमक मिलाकर पीयें।
23-दस्त :- रात को सोने से पहले अदरक को पानी में डाल दें, सुबह इसे निकालकर साफ पानी के साथ पीसकर घोल बनाकर 1 दिन में 3 से 4 बार पीने से अतिसार (दस्त) समाप्त हो जाता है।
24-मसूढ़ों से खून आना :- मसूढ़े में सूजन हो या मसूढ़ों से खून निकल रहा हो तो अदरक का रस निकालकर इसमें नमक मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम मसूढ़ों पर मलें। इससे खून का निकलना बंद हो जाता है।
25-निमोनिया :- एक-एक चम्मच अदरक और तुलसी का रस शहद के साथ देने से निमोनिया का रोग दूर होता है।
26-गैस का बनना :- अदरक 3 ग्राम, 10 ग्राम पिसा हुआ गुड़ के साथ सेवन करने से अफारा या पेट की गैस को समाप्त करता है।
27-सर्दी जुकाम और खांसी :- अदरक की चाय जुखाम, खांसी, और सर्दी के दिनों में बहुत लाभप्रद है। तीन ग्राम अदरक और 10 ग्राम गुड़ दोनों को पाव भर पानी में उबालें, 50 मिलीलीटर शेष रह जाने पर छान लें और थोड़ा गर्म-गर्म ही पीकर कंबल ओढ़कर सो जायें।
28-आधे सर का दर्द, गर्दन का दर्द, मांसपेशियों का दर्द :- यदि उपरोक्त कष्ट अपच, पेट की गड़बड़ी से उत्पन्न हुए हो तो सोंठ को पीसकर उसमें थोड़ा-सा पानी डालकर लुग्दी बनाकर तथा हल्का-सा गर्म करके पीड़ित स्थान पर लेप करें। इस प्रयोग से आरम्भ में हल्की-सी जलन प्रतीत होती है, बाद में शाघ्र ही ठीक हो जाएगा। यदि जुकाम से सिरदर्द हो तो सोंठ को गर्म पानी में पीसकर लेप करें। पिसी हुई सौंठ को सूंघने से छीके आकर भी सिरदर्द दूर हो जाता है।
29-हिचकी :- अदरक के बारीक टुकड़े को चूसने से हिचकी जल्द बंद हो जाती है। घी या पानी में सेंधा नमक पीसकर मिलाकर सूंघने से हिचकी बंद हो जाती है।
30-पेट-दर्द :- अदरक के रस में नींबू का रस मिलाकर उस पर काली मिर्च का पिसा हुआ चूर्ण डालकर चाटने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।
किन्हे अदरक का सेवन करने से परहेज़ करना चाहिए :-
अदरक की प्रकृति गर्म होने के कारण जिन व्यक्तियों को ग्रीष्म ऋतु में गर्म प्रकृति का भोजन न पचता हो, कुष्ठ, पीलिया, रक्तपित्त, घाव, ज्वर, शरीर से रक्तस्राव की स्थिति, मूत्रकृच्छ, जलन जैसी बीमारियों में इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

नोट-बतायें गये नुस्खों का प्रयोग करने से पहले अपनी आयु, प्रकृति आदि के बारे में भी ध्यान रखना चाहिए, साथ ही किसी जानकार या आयुर्वेंदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य कर लेना चाहिए।
       प्रस्तुति-डाँ0 कैलाश शर्मा पाटोदा, सहायक निदेशक, आयुर्वेद विभाग सीकर-राजण्

मौत से मुलाकात !! (रोमांच-कथा)


https://jyotesh.blogspot.com/2021/03/maut-se-mulakat-true-story.html
सौरभ भारतीय विद्या भवन नई दिल्ली से ‘‘ज्योतिष अलंकार‘‘ कर रहा था। उसकी कक्षाऐं सप्ताह में शनिवार व रविवार को ही लगती थी। वो अपने शहर से ट्रेन से आता था व सदर बाजार स्टेशन, नई दिल्ली से ही वापसी की ट्रेन पकड़ता था। सौरभ अपनी कक्षा अटेंड करके सायं 6 बजे के आसपास वापस आने के लिए अपनी ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहा था। तभी दो आदमी उसके पास
 आये और उसकी ही बेंच पर बैठ गये। बातचीत प्रारम्भ हुई, पता चला इन्हें भी उसी ट्रेन से गाजियाबाद जाना है, जिससे सौरभ को अपने शहर जाना था। 
    सदर बाजार स्टेशन से यात्रा करनेे वाले पाठकबन्धु परिचित होंगे, कि प्लेटफार्म नं0 2 पर गाजियाबाद की तरफ से आने वाली लाइन पर खतरनाक मोड है, वहां उस तरफ से आती ट्रेन तब स्टेशन से नजर आती है, जब वह मात्र स्टेशन से 50 मी0 की दूरी पर रह जाती है।
      तभी उनमें से एक बोला- ‘‘वह ट्रेन तो सामने वाले प्लेटफार्म पर आ रही है।" यह कहकर उसने सौरभ का हाथ पकड़ लिया, चलो! लाइनपार करके उस स्टेशन पर चलते हैं?
      सौरभ बोला-‘‘मैं कभी स्टेशनों पर लाइनपार नहीं करता, यदि ट्रेन आयेगी भी, तो भी मैं पुल से ही जाऊंगा, भले ही ट्रेन निकल जाये!"
      उस व्यक्ति ने सौरभ का हाथ पकड़े रखा, और बोला- तुम ‘‘सिवेलियन" के साथ ये ही दिक्कत है, कि तुम डरते बहुत हो!
       उसका दूसरा साथी फोन पर बात करने में मग्न था और पीछे ही खड़ा था।
     भाई! मैं तो सामने वाले प्लेटफार्म पर जा रहा हूं, उसने सौरभ के पकड़े हुए हाथ को "मज़बूरी" में छोड़ते हुए कहा, और वह बिना दाएं-बाएं देखे पटरियों पर कूद गया। उसका दूसरा साथी अब भी फोन पर बात करने में व्यस्त था।
      उसके पटरी पर कूदते ही, उसी लाइन पर सौरभ को ट्रेन आती दिखी, वो तो लाइन पार कर ही रहा था, परन्तु सौरभ भी स्टेशन पर होकर भी रेलवे लाइन के इतना नजदीक था, यदि वह वही खड़ा रहता तो ट्रेन की पूरी तरह जद में था, क्योंकि तीव्र गति से आती ट्रेन से उत्पन्न वायुवेग से उसके भी हवा में लहराकर, ट्रेन से टकराने की शत-प्रतिशत संभावना थी, सौरभ तुरन्त पीछे हटा और जमीन पर तेजी से गिरते हुए (क्योंकि जमीन पर लेटने से उसके हवा में उड़ने की सम्भावना बहुत कम थी) पटरी पार कर रहे, व्यक्ति की ओर चीखा-भाई ट्रेऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽन----।
      सौरभ की बात पूरी भी न हो पायी थी कि नाॅन स्टाॅप राजधानी एक्सप्रेस प्लेटफार्म से गुजर रही थी, सौरभ ने भय से अपनी आंखे बन्द कर ली, कदाचित इतनी दर्दनाक मौत वो नहीं देख पाता।
      तभी ट्रेन के इमरजेन्सी ब्रेक लगने की आवाज आयी, सौरभ ने धीरे से आंखे खोलकर देखा कि ट्रेन के पहिये चिंगारी उगल रहे हैं, इसका मतलब था ट्रेन के इमरजेन्सी ब्रेक लग रहे हैं। ट्रेन स्टेशन से दूर जाकर रूक गई। लगता था, ड्राइवर को आभास हो गया था कि कोई ट्रेन के आगे कूदा है।
      उसका साथी भी फोन हाथ में लिए सौरभ के पास भाग कर आ गया और पटरियों की तरफ झांकते हुये बोला-‘‘खुद तो मरा, तुम्हें भी ले मरता, परन्तु मुझे तो जीते-जी ले मरा!!’’
     भाई!!! तुम्हे क्यों ले मरा?? तुम तो ठीक ठाक खड़े हो? सौरभ ने आहिस्ता से जमीन पर बैठते हुए, अपने कपड़ों की धूल झाड़ते हुए पूछा??
      अरे यार! हम दोनों पुलिस में हैं, और ‘‘ऑन डयूटी" हैं, गाजियाबाद अपने पर्सनल काम से जा रहे थे!" इस युवक के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही थीं।
     इतने में रेलवे पुलिस के 4-5 सिपाही भागे हुए प्लेटफार्म पर आ गये, हमसे बोले ट्रेन के आगे कौन कूदा है??? वो कहां हैं??? 
     सौरभ जमीन पर ही बैठा रहा और उसने कोई जवाब नहीं दिया!
    आगे कूदने वाले सिपाही का साथी दूर जाकर फोन मिलाने लगा, उसके चेहरे की चिंता और भावों को देखकर साफ लगता था, कि वह उसे ही फोन मिला रहा है जो अभी ट्रेन के आगे कूदा है। अचानक उसका चेहरा खिल उठा, सौरभ तुरंत उठकर उसके पास पहुंचा-पूछा! क्या वो "सेफ" है?
    वो बोला! थैक्स गाॅड! वो ठीक है! ट्रेन उसे छूकर निकली थी, परन्तु वो चपेट में आने से बच गया है, सामने वाले प्लेटफार्म पर पैसेंजर्स की भीड़ में दुबक गया है, कही पुलिस उसे आत्महत्या के प्रयास के जूर्म में गिरफ्तार न कर ले। इतना कहते ही उसने जेब से सिगरेट निकाल कर सुलगायी और उस स्टेशन पर जाने के लिए पुल की तरफ तेजी से बढ़ गया।
    सौरभ की ट्रेन उसी प्लेटफार्म पर आयी, जिस पर वो लोग खड़े थे, सौरभ उसमें जाकर बैठ गया, अब भी सौरभ बुरी तरह घबरा रहा था, उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, वह अपनी दिल की धड़कनों को नियंत्रित करने के लिए प्राणायाम करने लगा। सौरभ की लाइफ में ऐसे कई हादसें बहुत जल्दी-जल्दी हो चुके थे। 
     ट्रेन चल पड़ी, मन्दिर की घंटियों ने सौरभ की तंद्रा भंग कर दी, सौरभ अपने बैग में अपनी "गोमुखी और माला" देखने लगा। सोचने लगा पता नहीं कौन सी ‘‘शक्ति" या ‘‘दुआ" मेरी हिफाजत कर रही है, तभी उसे एक शायर साहब का 'शेर' याद आ गया-
न जाने कौन 'दुआओं' में याद रखता है,
मैं   डूबता    हूं   समुद्र   उछाल  देता  है।
      और सौरभ अपने मन को, माला के, मनकों के माध्यम से "मन्त्र" की अतल गहराईयों में उतारने का प्रयास करने लगा।
                              लेखक-संजय कुमार गर्ग (sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)
(प्रस्तुत कहानी  
सत्य घटनाक्रम पर आधारित है। पात्रों के नाम,स्थान आदि सभी काल्पनिक हैं।)

सम्मोहन-हिप्नोटिज्म के कुछ रोचक रहस्य!!

https://jyotesh.blogspot.com/2021/02/sammohan-ke-fayde.html
प्राचीन भारत में सम्मोहन (Hypnotism) को सम्मोहन, मोहन, वशीकरण विद्या आदि नामों से पुकारा जाता था, मध्यकाल के आते-आते इस विद्या को जादूगरों, बाजीगरों, और तमाशा दिखाने वालों की विद्या माना जाने लगा, कुछ स्वार्थाी लोगों ने इस विद्या का काफी दुरूपयोग भी किया, अस्सी नब्बे के दशक में माताएं अपनी बेटियों से बाहर जाते समय, ये हिदायत देना नहीं भूलती थी, बेटी! किसी अन्जान पुरूष से नजर मिला कर बात नहीं करना, बेटी को मां की ये हिदायत भी इसी विद्या के दुरूपयोग का असर थी, कि कहीं कोई स्वार्थी जादूगर उनकी पुत्री को वश में न कर ले, इसी कारण इस विद्या के जानकारों से, सभ्य समाज के लोगों दूर रहने लगे थे, और हम सम्मोहन (Hypnotism) को केवल जादूगरों बाजीगरों और तमाशा दिखाने वालों का कोई काला जादू मानकर रह गये। परन्तु, जैसे ही ये सम्मोहन, हिप्नोटिज्म (Hypnotism) बनकर डाॅ0 जेम्स के कन्धों पर चढ़कर भारत आया तो हम भारतवासियों ने इसका तहेदिल से स्वागत किया और इसकी महिमा के बखान करने लगे। हम यह भूल गये अरे! ये वही तोे है, जिसे हमने काला जादू और बाजीगरों की कला मानकर ठुकरा दिया था। साथियों! जिस महान विज्ञान की हमने कद्र नहीं की, आज इसी विज्ञान से बिना इनथीसिया दिये आपरेशन हो रहे हैं, गर्भवती महिलाओं की पीड़ा रहित डिलीवरी हो रही है, लोगों की नशे की आदतों को छुड़ाया जा रहा है, तरह-तरह की मानसिक बीमारियों जैसे फोबिया आदि का इलाज हो रहा हैं, आदि न जाने क्या-क्या कार्य इस सम्मोहन (Hypnotism)या कहिए कथित काले जादू से हो रहे हैं। 

साथियों! सम्मोहन या हिप्नोटिज्म के बारे में और जानने से पहले हम मन (Mind) के बारे में जान लेते हैं, 

मन (Mind) की मुख्यतः दो अवस्थाएं पायी जाती है, 
पहली चेतन मन दूसरी अवचेतन मन
चेतन मन (Conscious Mind) को हम जाग्रत मन भी कह सकते हैं, जितने भी कार्य हम खुली आंखों से करते हैं, वो सभी कार्य हम चेतन मन (Conscious Mind) में रहकर ही संचालित करते हैं, खुली आंखों से कार्य का मतलब, जैसे अपने दैनिक कार्य, नहाना, खाना, पढ़ना, आफिस जाना, आदि आदि सभी कार्य चेतन मन (Conscious Mind) के द्वारा संचालित होते हैं। विज्ञान के अनुसार मस्तिष्क का वह भाग जिसमें होने वाली क्रियाकलापों की जानकारी हमें होती रहती है उसे चेतन मन (Conscious Mind) कहते हैं।

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अवचेतन मन (Subconscious Mind) किसे कहते हैं-इसे अर्धचेतन मन भी कहते हैं, मन के जितने कारोबार हमारी आंखे बन्द होने पर होते हैं वे सभी अवचेतन मन (Subconscious Mind) द्वारा संचालित होते हैं जैसे सपनें दिखाना, भविष्य में होने वाली बिमारी या खतरे का पूर्व में ही अहसास कराना, दूसरों के मन की बात हमारे मन में ले आना, अदृश्य वस्तुओं की झलक दिखा देना आदि ऐसे सभी कार्य जो छठी इन्द्री का हिस्सा होते हैं। वे सभी कार्य अवचेतन मन (Subconscious Mind) द्वारा संचालित होते हैं, अवचेतन मन, चेतन मन से अनंत गुना शक्ति शाली होता है। 

साथियों! यही अवचेतन मन (Subconscious Mind) सम्मोहन (Hypnotism) या हिप्नोटिज्म की विषय वस्तु है, सम्मोहन विज्ञान (Hypnotism) में इसी मन को नियंत्रित करके उसमें सकारात्मक सुझाव (Positive Suggestion) या सजेशन डाले जाते हैं। इसी सजेशन के द्वारा सम्मोहन कर्ता (Hypnotist) व्यक्ति के किसी भी अंग को सुन्न कर सकता है, जिससे डाक्टर उस अंग का आपरेशन कर सकते हैं, या सम्मोहन कर्ता (Hypnotist) चेतन मन (Conscious Mind) को सुला कर, अवचेतन मन (Subconscious Mind) को जाग्रत करके किसी व्यक्ति की मानसिक बिमारी को दूर कर सकता है, जादूगर, सम्मोहित व्यक्ति (Hypnotized Person) से काफी हद तक मनचाहे कार्य भी करा लेते हैं।

अब प्रश्न उठता है कि किसी को सम्मोहित (Hypnotized)  कैसे किया जाता है, किसी स्त्री या पुरूष को कोई चमकदार वस्तु दिखाकर या फिर उसकी आंखों में अपनी अपलक दृष्टि जमाकर उसे निद्रा की अवस्था में ले जाकर उसके अवचेतन मन (Subconscious Mind) को आगे लाया जाता है, और उसके अवचेतन मन में सकारात्मक सुझाव डाले जाते हैं और उसे उन सुझावों पर चलने के लिए तैयार किया जाता है। ये कार्य सम्मोहन या हिप्नोटिज्म के अंतर्गत आते हैं।

अब साथियों! प्रश्न उठता है कि सम्मोहन के कितने प्रकार होता हैं-(Kind of Hypnotism)-

सबसे पहले है आत्मसम्मोहन (Self hypnosis), साथियों आत्मसम्मोहन सभी सम्मोहनों का केन्द्र बिन्दु है, यदि हम खुद को सम्मोहित नहीं कर सकते तो हम दूसरों को कैसे सम्मोहित कर सकते हैं, इसलिए सबसे पहले हमें आत्मसम्मोहन (Self hypnosis) करके अपने आप को सकारात्मक सुझाव देकर अपनी कमियों, दुर्बलताओं को दूर करना चाहिए। अतः सबसे पहले हमें आत्मसम्मोहन का अभ्यास करना चाहिए।

दूसरा है पर सम्मोहन, अर्थात दूसरे को सम्मोहित करना, इसके द्वारा सम्मोहन कर्ता (Hypnotist) किसी दूसरे व्यक्ति को सम्मोहित करके उसके मानसिक विकार को दूर करने के लिए आवश्यक सुझाव देता है, या इसके माध्यम से सम्मोहन कर्ता दूसरों को चमत्कार भी दिखा सकता है।

तीसरा समूह सम्मोहन (Group hypnosis)-किसी भीड़ या समूह को सम्मोहित करना ही समूह सम्मोहन कहलाता है, इसमें सम्मोहन कर्ता पूरी सभा को या उसमें से किसी समूह को सम्मोहित करता है। बहुत से कथावाचक अपने श्रोताओं को इसी विधि से सम्मोहित कर लेते हैं।

चौथा  है प्राणी सम्मोेहन-पशु-पक्षियों को सम्मोहन करना ही प्राणी सम्मोहन कहलाता है। सर्कस में रिंगमास्टर अनेक प्रकार से उनकी आंखों में आंखे डालकर शेर, चीते, हाथियों आदि को सम्मोहित करते हैं।

पांचवा है परामनोविज्ञान सम्मोहन-परामनोविज्ञान का विषय बहुत विस्तृत है, इसमें किसी दूर बैठे व्यक्ति या समूह को सम्मोहित करना, सम्मोहित अवस्था में किसी खोई वस्तु का पता लगाना, आत्माओं से सम्पर्क करना, भूत-भविष्य के बारे में जानना आदि शामिल है। ऐसे सभी कार्य परामनोविज्ञान सम्मोहन के अंतर्गत आते हैं।

साथियों!! सम्मोहन कैसे करें?, हम किस प्रकार के व्यक्ति को सम्मोहित नहीं कर सकते, हम सम्मोहित व्यक्ति से क्या नहीं करा सकते, हिप्नोटिज्म या मैस्मेरज्म में क्या अन्तर है, सम्मोहन से किस प्रकार मानसिक इलाज करते हैं आदि आदि
विषयों पर भी मैं अलग से आलेख लेकर आउंगा। 
इस आलेख के बारे में आपकी क्या राय है मुझे जरूर बताइये, आलेख अच्छा लगा हो तो शेयर करना बिल्कुल न भूलें अगले आलेख तक के लिये अलविदा,  नमस्कार। जयहिन्द।
                             -लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com