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वास्तु के अनुसार टाॅयलेट?

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Vastu for toilet in hindi
प्रिय मित्रों व पाठकजनों!! आपमें से बहुत से पाठकों ने मेरे नये ब्लाॅग के हैडिंग को पढ़ते ही मुंह बनाया होगा, कुछ ने ब्लाॅग के शीर्षक को पढ़कर,  ब्लाॅग पर लिंक ही नहीं किया होगा। परन्तु मित्रों! मैं वास्तु की जो श्रृंखला लिख रहा हूं उसमें मैं घर के किसी भी हिस्से या स्थान को छोडना नहीं चाहता। ये स्थान तो घर का ऐसा स्थान है, जहाँ हम सबसे ज्यादा एकाग्रचित्त व शांत हो सकते हैं क्योंकि वहां कोई व्यवधान उत्पन्न नहीं करता। दूसरा, यदि हम प्रातः ठीक प्रकार से फ्रेश हो जाते हैं तो हमारा सारा दिन प्रसन्नचित्त व अच्छा व्यतीत होता है। इसलिए टॉयलेट का भी वास्तु शास्त्र के  अनुरूप होना आवश्यक है, प्रस्तुत है टाॅयलेट के लिये कुछ वास्तु जानकारियां- 

* भवन में शौचालय दक्षिण दिशा (W) तथा नैरूत कोण (SW) के मध्य में या फिर पश्चिम (W) दिशा में बनाना चाहिये।
लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)

* शौचालय में बैठते समय हमारा मुंह उत्तर (N) दिशा या पुर्व (E) दिशा की ओर होना चाहिये।

* वैसे तो शौचालय में दो सीटों का निर्माण होना चाहिये, उनमें से एक सीट उत्तर मुखी (N-Faced) तथा दूसरी सीट पूर्व मुखी (E-Faced) होनी चाहिये। इनमें से एक सीट उत्तर मुखी (N-Faced) का प्रयोग रात्रि में व दूसरी सीट पूर्व मुखी (E-Faced) का प्रयोग दिन में किया जाना चाहिये।

* ईशान (NE) में टाॅयलेट भूल कर भी नहीं बनाना चाहिये, अन्यथा आपको व आपके परिवार को गृह-क्लेश, दुश्चरित्रता और अनेक बीमारियों का शिकार होना पड़ सकता है। छोटे बच्चों में लाइलाज बीमारी, बड़े बच्चों में दुश्चरित्रता इस प्रकार के टाॅयलेट का भी परिणाम  हो सकता है।

* यदि टाॅयलेट स्नानघर में बनाना हो तो उसे पश्चिम (W) या वायव्य (NW) में बनाये, ईशान (NE) में कभी न बनायें। 

* शौचालय का दरवाजा पूर्व (E) या आग्नेय (SW) की ओर खुलने वाला होना चाहिये।

* सैप्टिक टैंक दक्षिण (S) या पश्चिम (W) की ओर नहीं बनाना चाहिये। इसका निर्माण पूर्व (E) या उत्तर (N) की ओर करना उत्तम रहता है।

* यदि पूर्व (E)  दिशा में सैप्टिक टैंक बनाना हो तो पूर्व (E) व आग्नेय (SW) दिशा के मध्य में बनाना चाहिये।

* यदि उत्तर (N) दिशा में सैप्टिक टैंक बनाना हो तो उत्तर (N) और वायव्य (NW) दिशा के मध्य बनाना चाहिये।

* यूरिनल यदि अलग से लगवाना चाहे तो, उसे पश्चिम (W) या वायव्य (NW) में बनवा सकते हैं।

* शौचालय हेतु नाप- 4'x4', 4'x6', 6'x8'

पाठकों को इस संबंध में कोई और जिज्ञासा हो तो वास्तु के मेरे और आलेख पढ़े, मुझे कमैंटस करें या फिर मुझे मेल कर सकते हैं।
प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग, वास्तुविद्, एस्ट्रोलाॅजर 8791820546 Whats-app
sanjay.garg2008@gmail.com           

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