घाघ व भड्डरी की ‘‘कृषि व मौसम संबंधी कहावतें’’!!


घाघवभड्डरी
घाघ व भड्डरी
घाघ और भड्डरी में अवश्य ही में कोई दैवीय प्रतिभा थी। क्योंकि उनकी जितनी कहावतें हैं, प्रायः सभी अक्षरशः सत्य उतरती हैं। गांवों में तो इनकी कहावतें किसानों को कंठस्थ हैं। इनकी  कहावतों के अनेक संग्रह मिलते हैं. परन्तु इनमें पाठांतरों की भरमार है। इसी कारण इनकी बहुत-सी कहावतों के फल ठीक नहीं उतरते। इसलिए मैंने इनकी  अत्यधिक प्रचलित, कृषि व मौसम संबंधी कहावतों को ही अपने इस ब्लॉग में सम्मिलित किया है। साथ ही कुछ कहावतों को मैंने वर्तमान परिपेक्ष्य में उदाहरण सहित प्रस्तुत किया है, ताकि पाठक कहावतों के सही अर्थ को ह्रदयंगम कर सकें।
संकलन-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)
चैते वर्षा आई और सावन सूखा जाई।
एक बूंद जो चैत में परे सहसबूंद सावन की हरै।

घाघ! कहते हैं यदि चैत के महीने में वर्षा होगी तो सावन के महीने में कम वर्षा होगी। यदि एक बूंद भी वर्षा की पड़ती है, तो वह सावन की हजार बूंदों को समाप्त कर देती है। पाठकजनों! आपको याद होगा इस बार चैत्र (मार्च-अप्रैल) के माह में प0 उत्तर प्रदेश में वर्षा हुई थी, किसानों को उस माह अपनी गेहूं की फसल में पानी नहीं देना पड़ा, जबकि उस माह में अधिकतर वर्षा नहीं होती, परिणाम हमारे सामने है, पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश में सावन का महीना लगभग सूखा गया है।

माघ के ऊमष जेठ के जाड़, पहिला वर्षा भरिगे ताल।
कहैंघाघ हम होई बियोगी, कुआ खोदि के धोईहैं धोबी।।

घाघ! कहते हैं-यदि माघ के महिने में जाड़े के बजाय गर्मी पड़े और जेठ में गर्मी के जगह जाड़ा पड़े व पहली वर्षा से तालाब भर जाये तो समझ लेना चाहिए कि इस वर्ष इतना सूखा पड़ेगा कि धोबियों को भी कपड़े धोने के लिए जल कुएं से खींचना पड़ेगा। पाठकजनों! इस बार जेठ (मई-जून) के माह में गर्मी औसत से कम थी, परिणाम हमारे सामने है पूरा पश्चिम उत्तर प्रदेश काफी हद तक सूखे की चपेट में है।
संकलन-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)
मंगल रथ आगे चलै, पीछे चले जो सूर।
मन्द वृष्टि तब जानिये, पडती सगले धूर।।

इस कहावत में घाघ! ज्योतिष के अनुसार ग्रह-गोचर देखकर, वर्षा की भविष्यवाणी कैसे करे बताते हैं, यदि ग्रह-गौचर में मंगल आगे और सूर्य पीछे हो निश्चित ही सूखा पड़ता है। पाठकजनों!! इस वर्ष में जनवरी से अप्रैल तक मंगल गौचर में सूर्य से आगे रहे हैं, परन्तु 15 अप्रैल से सूर्य, मंगल से आगे चल रहे हैं।

आगे रवि पीछे चले, मंगल जो आषाड़।
तौ बरसे अनमोल हो, पृथ्वी आनन्द बाढ़।

जिस वर्ष गौचर में सूर्य के पीछे मंगल रहते हैं उस साल वर्षा खूब होती है और पृथ्वी पर आनन्द होता है।

माघ में जो बादर लाल घिरै, सांची मानो पाथर परै।
भड्डरी! कहते हैं कि यदि माघ के महीने में लाल रंग के बादल दिखाई दे तो निश्चय ही ओले पडते हैं।

जेठ चले पुरवाई, सावन सूखा जाई।
भड्डरी! कहते हैं, यदि जेठ के महिने में पुरवा हवा चले तो सावन के महिने में सूखा पड़ेगा, ऐसा मानना चाहिए।


रात दिन घम छाहीं, घाघ कहै अब बरखा नाही।
पूनों पड़वा गाजै, दिना बहत्तर बाजै।।

कवि घाघ! कहते हैं कि रात दिन धूल छाई रहे तो वर्षा नहीं होगी, यदि जेठ के महिने में पूनो और परवा का बादल गर्जे तो समझ लो कि दो माह तक वर्षा नहीं होगी।
संकलन-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)
सवन शुक्ला सप्तमी, उगत न दीखै भान।
तब तक वर्षा होइगी, जो लगि देवउठान।।

घाघ! कहते हैं कि यदि सावन सुदी की सप्तमी को सूर्य बादल से ढका रहे तो देवउठान तक वर्षा होती है।

माघ पूस जो दखिना चले, तो सावन में लक्षन भले।
घाघ! कहते हैं कि यदि माघ तथा पूस के महिने में दक्षिण दिशा की हवा चले तो सावन में अच्छी वर्षा होती है।

दिन में गर्मी रात को ओस, कहै घाघ वर्षा सौ कोष।
घाघ! कहते है यदि दिन में गर्मी और रात को ओस पड़े तो वर्षा की कोई आशा नहीं है।

करिया बादल डरवावे, भुवरा बादल पानी लावे।
घाघ! कहते हैं काला बादल केवल वर्षा का भय दिखाता है, जबकि भूरा बादल अच्छी वर्षा करता है।

पूरब के बादल पछियां जाय, पतली छांडि के मोटी पकाव।
पछुवा बादर पूरब को जावे, मोटी छांडि के पतली खावे।।

घाघ! कहते हैं कि यदि बादल पूरब से पश्चिम की ओर जाये जो वर्षा अच्छी होती है, अन्न खूब पैदा होता है, यदि पश्चिम से पूरब की ओर हवा चले तो वर्षा कम होती है।

शुक्रवार की बादरी रही शनीचर छाय।
ऐसा बोले भड्डरी बिन बरसे ना जाय।।

भड्डरी! कहते हैं कि यदि शुक्रवार के दिन होने वाले बादल शनिवार तक छाये रहें तो वर्षा अवश्य होती है।

सावन केरे प्रथम दिन उगत न दिखे भान।
चार महिना पानी बरसें जानों इसे प्रमान।
घाघ! कहते हैं कि सावन प्रतिपदा को यदि सूरज उगता न दिखायी पड़े तो चार मास तक खूब वर्षा होती है।

माघ मास की बादरी, और क्वार का घाम।
ये दोनों जो कोई सहै, करै पराया काम।।

घाघ! कहते हैं कि वही व्यक्ति नौकरी कर सकता है जो माघ के महिने की बदली तथा क्वार के महिने का घाम सहन कर सकता हो।

भोर समें डर डम्बरा रात उजेरी होय।
दुपहरिया सूरज तपै दुरभिक्ष तेऊ जोय।।

घाघ! कहते हैं यदि प्रातःकाल बादल घिरे, दोपहर को सूरज तपे और रात में आकाश स्वच्छ रहे तो निश्चय दुर्भिक्ष जानो।

मटका में पानी गर्म चिडि़या न्हावे धूर।
चिउंटी अन्डा लै चलै तौ बरषा भरपूर।

भड्डरी! वर्षा आने का एक संकेत और बताते हैं जो देहात में खूब प्रचलित हैं, यदि घड़े का पानी गर्म रहे, चिडि़या धूल में स्नान करें और चींटी अण्डा लेकर निकले तो खूब वर्षा होती है।

उतरे जेठ जो बोले दादुर, कहैं भडडरी बरसै बादर।
भडड्री्! कहते हैं, यदि जेठ मास के समाप्त होते ही मेढ़क बोले, तो वर्षा होती है।

सब चिन्ता को छांडि कै, करि प्रभु में विश्वास।
वाकै थापै, सब थपै, बिन थापे हो नाश।।

अन्त में घाघ! कहते हैं सब चिन्ताओं को छोड़कर भगवान में विश्वास करना चाहिए। उसमें निष्ठा करने से सब कार्य सिद्ध हो जाते हैं, बिना उसके सर्वनाश होता है।
संकलन-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)
(चित्र गूगल-इमेज से साभार!)
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22 टिप्‍पणियां :

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (21-08-2014) को "लेखक बनाने की मशीन" (चर्चा मंच 1712) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आदरणीय शास्त्री जी, सादर नमन! चर्चा मे ब्लॉग को प्रतिभागित करने के लिए सादर धन्यवाद!

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  2. 'खना ' का ज्योतिष वचन कुछ ऐसा ही है | लेकिन आज के मौसम विभाग के समान सभी भविष्यवाणी सच नहीं निकलता है | प्रकृति का मुद जानना बहुत कठिन !
    मैं
    ईश्वर कौन हैं ? मोक्ष क्या है ? क्या पुनर्जन्म होता है ? (भाग २ )

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    1. आदरणीय कालीप्रसाद जी, सादर नमन! ब्लॉग पर कॉमेंट्स करने के लिए सादर धन्यवाद! आशा है संवाद बनाए रखेंगें!

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  3. लोककवि घाघ व भड्डरी के बहुत सुन्दर ‘‘कृषि व मौसम संबंधी कहावतें’’की सार्थक प्रस्तुति ...
    बहुत अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर ...

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  4. आदरणिया कविता जी, सादर नमन! आपको ब्लॉग पसंद आए, उसके लिए धन्यवाद! संवाद बनाए रखें! ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद!

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  5. बहुत ही सुंदर , संजय भाई धन्यवाद !
    Information and solutions in Hindi ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )
    आपकी इस रचना का लिंक दिनांकः 29 . 8 . 2014 दिन शुक्रवार को I.A.S.I.H पोस्ट्स न्यूज़ पर दिया गया है , कृपया पधारें धन्यवाद !

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  6. आदरणीय आशीष जी, सादर नमन! कॉमेंट्स करने व अपने ब्लॉग में स्थान देने के लिए सादर धन्यवाद!
    धरती की गोद

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  7. आपके ब्लॉग पर आकर मुझे स्वयं की अनुभूति होती है :)

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    1. आदरणीय विनय जी, सादर नमन! मुझे भी लगता है, कि आपका हमारा सदियों पुराना साथ है, कॉमेंट्स के लिए सादर आभार आदरणीय विनय जी!

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  8. उत्तर
    1. आदरणिया सुनीता जी, सादर नमन! ब्लॉग पर आने व कॉमेंट्स करने के लिए सादर आभार!

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  9. बहुत सुंदर प्रस्तुति,संजय जी.

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    1. आदरणीय राजीव जी! सादर नमन! ब्लॉग पर आने व् कमेंट्स करने के लिए सादर आभार!

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  10. कल 19/सितंबर/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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    उत्तर
    1. आदरणीय यशवत जी, सादर नमन! ब्लॉग को परिचर्चा मे शामिल करने के लिए धन्यवाद!

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  11. शुभ प्रभात

    सत्य और सटीक

    सादर

    कुछ और तलाशिये
    कुंआर करेला
    कातिक मही
    मरही नहीं तो
    परही सही

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    उत्तर
    1. आदरणिया यशोदा जी, सादर नमन! घाघ की कुछ कहावतों जेसी कविताएँ किसानों ने अपने आप भी घड़ी हैं, और वे घाघ के कहावतों में शामिल हो गयी हैं, मैने अपने घाघ के इन दो ब्लॉग्स में घाघ की अत्यधिक प्रचलित कविताओं को ही शामिल किया है, दूसरे ब्लॉग का लिंक भी आपको प्रेषित कर रहा हूँ, कॉमेंट्स करने के लिए सादर आभार यशोदा जी!
      http://jyotesh.blogspot.in/2014/04/blog-post.html

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  12. उत्तर
    1. कॉमेंट्स के लिए सादर आभार! आदरणिया सु..मन जी!

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  13. घाघ और भड्डरी के रोजमर्रा की जिन्दगी के ठोस अनुभव थे
    जो इनकी रचनाओं के मध्यम से हमारे सामने आये...ये किसी विज्ञान से कमतर नहीं थे।

    आपने इनको हम तक पहुँचाया उसका बहुत बहुत आभार।
     पासबां-ए-जिन्दगी: हिन्दी

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    उत्तर
    1. आदरणीय रोहताश जी, सादर नमन! ब्लॉग पर आने व कॉमेंट्स करने के लिए सादर धन्यवाद!

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