Wall Clock Vastu Tips : वास्तु के अनुसार घड़ी लगाने की सही दिशा जान लें!

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समय (Time) की महत्ता 
का वर्णन करते हुए महर्षि चाणक्य ने ‘चाणक्य नीति’ के चतुर्थ अध्याय में एक श्लोक लिखा है-
कः कालः कानि मित्राणि को देशः कौ व्ययागमौ।
कस्माहं का च मे शक्तिरिति चिंत्यं मुहुर्मुहुः।। 18।।

अर्थात काल (समय) क्या है, कौन मित्र है, देश कौन है, व्यय कितना है, आय कितनी है, और मुझमें कितनी शक्ति है, मनुष्य को इन सब बातों का विचार करते रहना चाहिए।

‘काल क्या है? ‘काल’ समय (Time) को कहते हैं, यानि समय का हमें पता रहना चाहिए, पता कैसे चलेगा? जब हमारे पास घड़ी होगी, इसका तात्पर्य है महर्षि चाणक्य ने भी समय या घड़ी के महत्व हो समझा, इससे पता चलता है कि समय का कितना महत्व प्राचीन काल में भी था और आज के समय में टाइम या समय का महत्व और ज्यादा बढ़ गया है। इसलिए वास्तु में भी समय यानि समय (टाइम) दिखाने वाली घड़ी का अत्यंत महत्व है। 
यदि हमारे घर, आफिस, व्यापार स्थल में वास्तु के अनुसार घड़ी सही स्थान पर लगायी गयी है तो  उसका प्रत्यक्ष प्रभाव हमारी जीवन में दृष्टिगोचर होता है। आज के आलेख में हम घड़ी के बारे में कुछ वास्तु सुझाव दे रहे हैं-

1-बन्द पड़ी घड़ी कभी भी नहीं लगानी चाहिए, यह हमारे समय, प्रगति और भाग्य के रूक जाने का संकेत करती है। अतः बन्द पड़ी घड़ी में तुरंत सेल डालने चाहिए, खराब है तो उसे रिपेयर करानी चाहिए। कुछ खराब पड़ी घड़ियों को हम अपने इमोशनल अटैचमेन्ट की वजय से फैकना नहीं चाहते, परन्तु उन्हें तुरन्त उस स्थान से हटा देना चाहिए।

2-घड़ी लगाने की सही दिशा उत्तर (North) या पूर्व (East) दिशा है, क्योंकि इन दोनों दिशाओं को वृद्धि की दिशा माना गया है, साथ ही ये दिशाएं शुभ दिशाएं भी कहलाती हैं, पूजा इत्यादि में भी इन्हीं दिशाओं की ओर मुंह करके बैठना शुभ माना जाता हैं। अतः हमें अपने आफिस या घर में हमेशा उत्तर या पूर्व दिशाओं में से किसी दिशा में घड़ी लगानी चाहिए।

3-प्रवेश द्वार के ऊपर भी घड़ी नहीं लगानी चाहिए, इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, घर या आफिस में परेशानियां बढ़ने लगती है।

4-दक्षिण दिशा (South) में कभी भी घड़ी नहीं लगानी चाहिए यह प्रेत और पितरों की दिशा होती है, इससे घर में रहने वाले व्यक्तियों का स्वास्थ्य खराब होता है, और उनकी उन्नति में बाधा आती है।

5-वास्तु में घड़ी के समय को आगे या पीछे रखना भी वर्जित किया गया है, घड़ी को सही समय पर रखना चाहिए, क्योंकि सही समय हमें वर्तमान में रहना सिखाता है।

6-उत्तर या पूर्व दिशा में सही समय दिखाने वाली, पेेंडुलम वाली घड़ी को उत्तम बताया गया है, यदि उसमें से मधुर संगीत की ध्वनि हो तो वह और भी उत्तम है।

तो साथियों आपको ये आलेख कैसा लगा कमैंटस करके बताना न भूलें, अगले आलेख तक के लिए मुझे आज्ञा दीजिए नमस्कार जयहिन्द।
प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग वास्तुविद् 6396661036

कहीं आपका बॉयफ्रेंड भी 'साइको किलर' तो नहीं हैं?? एक 'साइको' की पहचान कैसे करें!

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ब्यायफ्रेंड द्वारा अपनी गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप होने पर या किसी अन्य बात से नाराज होकर, उसकी नृशंस हत्या की जाने की सैंकड़ों खबरें आपने सुनी व पढ़ी होंगी। हत्या की अनेेक वायरल वीडियो भी आपने देखी होगी, उन्हें देख कर आपका दिल दहल गया होगा, कि एक चाहने वाला किसी तरह से अपनी प्रेमिका की नृशंस हत्या भी कर सकता है। इन घटनाओं का अध्ययन करने के बाद मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी हत्याओं को अंजाम देने वाले व्यक्ति ‘साइको’ होते हैं, और इन व्यक्तियों में कुछ चीजें समान होती हैं। अब प्रश्न उठता है कि ऐसे 'साइको' की पहचान कैसे की जाये। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यदि हम दिल से काम ना लेके, दिमाग से काम ले तो हम ऐसे ‘साइको व्यक्तियों’ की पहचान कर सकते हैं और उससे दूरी बना कर सुरक्षित रह सकते हैं। 

मेरा ये आलेख विशेष रूप से "युवतियों" को समर्पित है, मैं उनसे ‘साइको’ युवकों के कुछ लक्षण बता रहा हूं, यदि वे किसी लड़के को चाहती हैं तो ये सुनिश्चित कर लें कि आपके ब्याय फ्रेंड में ये लक्षण या सिमटम्स तो नहीं हैं। यदि इन छः लक्षणों में से अंतिम पांच लक्षण (2 से 6 तक) भी आपके ब्याय फ्रेंड में मिलते हैं तो आपको सावधान हो जाना चाहिए, आप किसी ‘साइको’ के सम्पर्क में हो सकती हैं? ऐसे साइको व्यक्तियों से धीरे-धीरे दूरी बना लेनी चाहिए। उसके लिए आप अपनी कोई झूठी समस्या आदि बताकर उससे दूरी बना सकती हैं। परन्तु ये काम आपको बहुत ध्यान से व समझदारी से करना है, क्योंकि वह आसानी से आपका पीछा नहीं छोड़ेगा।

साइको पैथ की पहचान या लक्षण-

साथियों! एक "साइकोपैथ" की पहचान आप उसके चेहरे से नहीं कर सकते, केवल उसके बिहेव को देखकर ही हम एक "साइकोपैथ" का पता लगा सकते हैं। बशर्ते इसके लिए आप अपने दिल का नहीं बल्कि दिमाग का प्रयोग करें। 

साइकोलॉजिस्ट के अनुसार "साइको पैथ" की पहचान के 6 संकेत-

1-यदि आपका पार्टनर बिल्कुल आपकी काॅपी लगता है-‘‘साइकोपैथ और लव’’ की लेखिका का कहना  है कि एक "साइकोपैथ" अपने पार्टनर का दिल जीतने के लिए बिल्कुल उसकी नकल करने लगता है। आपके जैसी पसंद, आपके जैसी हाॅबीज, सब कुछ उसमें आपके जैसा होता है, जो तुमको हो पसंद वहीं बात करेंगे...... आपको लगने लगता है ये तो मेरे लिए एक परफेक्ट पर्सन है, वह आपको शीशे में उतारने की क्षमता रखता है। आपको लगेगा इससे तो 36 से 36 गुण मिलते हैं मेरे साथ। इससे अच्छा साथी तो हो ही नहीं सकता।

2-नो फ्रेंड सर्किल-यदि फेसबुकिया फ्रेंड को छोड़ दिया जाये तो एक "साइकोपैथ" का कोई फ्रेंड सर्किल नहीं होता या फिर उसके इने गिने दोस्त होते हैं, क्योकि उसमें 'फीलिंग्स' व 'इमोशनस' नहीं होते। अतः कोई ऐसे लोगों से दोस्ती करना पसंद नहीं करता। यदि आपके भी ब्याय फ्रेंड का कोई फ्रेंड सर्किल नहीं है तो सावधान हो जाइये। वो एक "साइको" हो सकता है।https://jyotesh.blogspot.com/2024/07/psycho-ki-pahchan-kaise-karen.html

3-नो इमोशनस-यदि आपका ब्याय फ्रेंड किसी के दु;ख को देखकर दु:खी या किसी की खुशी को देखकर खुश नहीं होता, उसका व्यवहार सामान्य रहता है तो उससे सावधान रहिए। फाॅर एग्जामपिल आप अपने फ्रेंड के साथ कहीं राइड  पर जा रहे हैं रास्ते में कोई एक्सीडेंट में घायल इंसान पड़ा है आप तो उसे देखकर घबरा जाते हैं और दु:खी होते हैं परन्तु यदि आपके ब्याय फ्रेंड का बिहेव उस एक्सीडेंट को देखकर सामान्य सा रहता है तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। कहीं आप किसी "साइकोपैथ" से तो डेट नहीं कर रही हैं।

4-सिर्फ अपने फायदे के लिए काम करते हैं-साइको पैथ सिर्फ अपना फायदा देखता है, अपने फायदे के लिए ये किसी से भी झूठ बोल सकते हैं, चोरी कर सकते हैं या फिर किसी को भी चोट पहुंचा सकते हैं। साइकोलोजिस्ट मैयो के अनुसार उपरोक्त तरह का व्यवहार ये अपने पार्टनर के साथ भी करते हैं जो बढ़ते-बढ़ते दुव्यर्वहार, मारपीट और उससे आगे बढ़कर मर्डर तक जा़ सकता है।

5-ऐरोगेन्स-एक "साइकोपैथ" अभिमानी भी होता है वो हमेशा अपनी उपलब्धियों के बारे में डींग मारते है। यदि आप अपनी उपलब्धियों के बारे में कुछ उनसे बताते हैं तो वो आपकी बातों को काटने लगते हैं और अपने आप को आपसे ज्यादा बढ़ा -ऊंचा दिखाने का प्रयास करते हैं।

6-मैनिपुलेटिव बिहेव-यदि आपको पार्टनर अक्सर आपके साथ छेड़छाड़ करता है। फाॅर एग्जामपिल ‘‘यदि वह आपसे कहता है। यदि तुम मुझसे प्यार करती हो तो तुम मेरे लिए ऐसा करोगी’’ तो साथियों ये संकेत है कि आपका पार्टनर आपको नियंत्रित कर रहा है ये 'मैनिपुलटिव बिहेव' एक संकेत है कि आपका साथी एक "साइकोपैथ या मनोरोगी" है।

तो साथियों आपको ये आलेख कैसा लगा, और आपके ब्याय फ्रेंड में इनमें से कितनी बातें मिलती हैं, कमैंटस करके बताना न भूलें, अगले आलेख तक के लिए मुझे आज्ञा दीजिए नमस्कार जयहिन्द।
                -लेखक: संजय कुमार गर्ग

VASTU TIPS : जूते चप्पल भी बिगाड़ते हैं घर का वास्तु !

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जूते चप्पल भी बिगाड़ते हैं घर का वास्तु ! 
अनेकों बार जान-बूझकर या अनजाने में हम अपने जूते-चप्पलों को घर में सही जगह पर रखकर उन्हें इधर-उधर निकाल देते हैं। यह सही नहीं हैं क्योंकि घर के लोग या बाहर से आने वाले लोग अपने जूते-चप्पलों के साथ नेगेटिव एनर्जी भी घर में ले कर आ सकते हैं। इससे वास्तु अनुकूल बने मकान पर भी इसका विपरित प्रभाव पड़ता है। अतः हमें मुख्य दरवाजे के बाहर ही जूते-चप्पलों की व्यवस्था करनी चाहिए। 


जूते-चप्पलों के संबंध में कुछ वास्तु सुझाव- (Jute Chappal Aur Vastu)

1-जूते-चप्पल रखने के लिए एक अलग अलमारी या रैक हो जो कि मुख्य दरवाजे से 2 या 2.5 फुट की दूरी पर हो।

2-जूते की रैक या अलमारी में रखे जूते-चप्पल बाहर से दिखाई नहीं देने चाहिए। इसमें दरवाजा लगा होना चाहिए। क्योंकि घर के मुख्या दरवाजे से ही घर में पाॅजेटिव एनर्जी प्रवेश करती है इसलिए इस ऊर्जा के घर में प्रवेश में कोई व्यवधान नहीं होना चाहिए।

3-जूते-चप्पल की अलमारी कभी घर में बने पूजा घर या रसोई की दीवार से मिलाकर न रखी जाये, इससे वास्तु दोष उत्पन्न होता है।

4-खाना बनाते समय या खाना खाते समय कभी जूते-चप्पल नहीं पहनने चाहिए। शादी आदि जूते-चप्पल पहनकर खाना मजबूरी होती है इसमें कोई विशेष समस्या नहीं है।

5-घर के पूर्व-उत्तर (ईशान)  (N-E) या आग्नेय दिशा (S-E) में जूते-चप्पल की रैक या अलमारी कभी नहीं बनवानी चाहिए।

6-जूते-चप्पल की अलमारी रखने के लिए वायव्य यानी उत्तर-पश्चिम (N-W) व नैरूत  यानी दक्षिणी-पश्चिमी (S-W) दिशा सबसे सही जगह मानी जाती है, इन्हीं दिशाओं में जूते-चप्पल की रैक बनायी जानी श्रेष्ठ होती है।

7-घर में यदि जूते-चप्पल बिखरे रहते हैं तो ये घर के सदस्यों में आपस में मतभेद व संबंध खराब कर सकते हैं, अपने सही स्थान पर जूते-चप्पलों को रखें।

8-यदि आपके पास रहने के लिए केवल एक ही कमरा है तो आप उस कमरे की उत्तर (N) व पूर्व (E) दीवार से सटाकर जूूते-चप्पलों की अलमारी या रैक न बनाये।

9-यदि आपकी किसी अलमारी में लाॅकर है और उसमें आप धन संग्रह करते हैं तो उस अलमारी के नीचे की रैक में जूते-चप्पल की अलमारी बिल्कुल न बनाएं इससे आपको धन की हानि हो सकती है।

10-आप जिस बैठ पर सोते हैं उसके नीचे जूते-चप्पल इकट्ठे नहीं करने चाहिए इससे आपके स्वास्थ्य में कमी आ सकती है और पति-पत्नि में तनाव पैदा हो सकता है।

तो साथियों आपको ये आलेख कैसा लगा कमैंटस करके बताना न भूलें, अगले आलेख तक के लिए मुझे आज्ञा दीजिए नमस्कार जयहिन्द।
                प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग, वास्तुविद् 6396661036

दिन में इन 5 समय में यूरिन जाकर स्टोन की समस्या से कैसे बचें !

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साथियों! हैल्थ एस्पर्टस का कहना है कि यदि आप पूरे दिन में इस-इस समय यूरिन करने जाते हैं यानि पेशाब जाते हैं तो आप शरीर में स्टोन बनने की समस्या से काफी हद तक बच सकते हैं, साथियों! आइये जानते हैं वह समय कौन-कौन से हैं-
1-सुबह उठते ही यूरिन जाना- 
यदि आप सुबह उठते ही यूरिन जाते हैं तो आपको स्टोन की समस्या पैदा होने की संभावनाए कम हो जाती हैं।
2-सुबह का नाश्ता या भोजन के बाद यूरिन जाना- 
साथियों! यदि आपके परिवार में स्टोर की समस्या है तो सुबह का नाश्ता या खाना खाने के बाद यूरिन जाने की आदत बना लें, इससे आपके शरीर में स्टोन बनने की समस्या नहीं होगी।
3-शाम को भोजन करने के बाद- 
यानि डिनर करने के बाद भी यूरिन जरूर जाये, यदि आप नहीं जाते तो जाने की आदत आज ही डाल लिजिए, नही तो ये आदत भी आपके शरीर में स्टोन की समस्या पैदा कर सकती है।
4-रात्रि को सोने से पहले यूरिन जाना-
सोने से पहले काफी लोग यूरिन जाना स्किप कर जाते हैं, यदि आप भी ऐसा करते हैं तो यूरिन जाने की अभी से आदत डाल लें।
5-सहवास (SEX) करने के बाद-
सहवास करने के बाद भी यूरिन जरूर जाना चाहिए, नब्बे प्रतिशत स्त्री-पुरूष सहवास के बाद यूरिन नहीं जाते, अतः आपको यूरिन जरूर जाना चाहिए। यदि महिलायें बच्चे की इच्छा से सहवास कर रही हैं तो महिलाओं को यूरिन नहीं जाना चाहिए परन्तु पुरूषों को जरूर जाना चाहिए।
अतः यदि आप इन पांच समयों पर यूरिन को नहीं रोकते तो आपके शरीर मेें स्टोन बनने की बहुत कम संभावनाएं रह जाती हैं। तो साथियों आपको ये आलेख कैसा लगा कमैंटस करके बताना न भूलें, अगली आलेख तक के लिए मुझे आज्ञा दीजिए नमस्कार जयहिन्द।

अपने आप को बदलने की कला हैं- आत्मसम्मोहन


साथियों!! कहा जाता है कि प्रभावी उपदेश वह है जो वाणी से नहीं बल्कि आचरण से प्रस्तुुत किया जाये, ये बात हिप्नोटिज्म या सम्मोहन सीखने वाले साधकों पर भी लागू होती है, यदि वे दूसरों को सम्मोहित करना सीखना चाहते हैं तो सबसे पहले उन्हें स्वयं को सम्मोहित (
आत्म सम्मोहन) करना सीखना चाहिए, इसीलिए साथियों! दूसरों को सम्मोहित करने की विधि बताने से पहले मैं आपको स्वयं को सम्मोहित करने की कला सीखाना चाहता हूं। ताकि आपको ये पता चल सके कि किस प्रकार सम्मोहित हुआ जाता है, जाग्रत अवस्था से सम्मोहन की अवस्था में जाते समय कैसा लगता है, सम्मोहन के समय एक सम्मोहित व्यक्ति कैसा महसूस करता है और निद्रा तथा सम्मोहन की अवस्था में क्या अन्तर है।
आत्म सम्मोहन कैसे करें-
तो साथियों!! आप तैयार हैं, तो चलिए आगे बढते हैं-सबसे पहले एक शांत व एकांत कमरे का चयन कीजिए, जो कोलाहल से रहित हो, अब आप या तो आराम कुर्सी ले लें या बैड आदि पर लेट कर भी यह अभ्यास कर सकते हैं, हां नये साधकों को मैं आत्म सम्मोहन (आत्म सम्मोहन) का अभ्यास बैठ कर करने की सलाह नहीं दूंगा, क्योंकि यदि आप गहरी नींद या सम्मोहन की अवस्था में चले गये तो बैठे हुए आपको गिरने का खतरा हैं उससे आपकी गर्दन या रीढ़ की हडडी में चोट आ सकती है, अतः इसे लेटकर करना ज्यादा अच्छा है, यदि आप लेटकर कर रहे हैं या आराम कुर्सी पर बैठकर कर रहे हैं तो दीवार पर कही कोई काला बिन्दु इस प्रकार लगायें कि वह आपकी आंखों पर सीधा पड़े उसके लिए आपको अपनी गर्दन इधर-उधर न करनी पड़े, चाहे तो इस अभ्यास के लिए एक जीरो वाट का पीला-येलो बल्ब को देखकर भी यह अभ्यास कर सकते हैं, उस बिन्दु या बल्ब को कुछ देर लगातार देखतेे रहे, उसके बाद आंखे बन्द करके उस बिन्दु या बल्ब का मानसिक ध्यान करें, बार-बार उस बिन्दु या बल्ब को देखें और उसका मानसिक ध्यान करें, आप चाहें तो कोई कोई मधुर ध्वनि, मन्दिर की घंटियां आदि का भी ध्यान करके अपने को आत्म सम्मोहित कर सकते हैं, बिन्दु-बल्ब या फिर किसी भी ध्वनि की आवाज में अपने आप को समाहित करने या डूबो देने का प्रयास करें, डूबो देने का मतलब समझाने के लिए मैं आपको एक उदाहरण देता हूं। जैसे कभी हम किसी अतिसुन्दर चित्र या किसी अति सुन्दर युवक या युवती को देखते हैं तो एकपल के लिए हम उसमें खो से जाते हैं, हम अपनी सुधबुध सी खो देते हैं, आप समझ रहे हैं ना मेरे कहने का तात्पर्य????? कोई युवक किसी सुन्दर युवती को देखकर, या कोई युवती किसी सुन्दर युवक को देखकर जिस प्रकार अपनी सुधबुध खो देती है, बिल्कुल ठीक ऐसी ही सुधबुध हमें आत्मसम्मोहन के समय खो देनी है, जब आप अपनी सुधबुध खोने लगो बस थोड़ा सा सावधान हो जाओं और अपने अवचेतन मन (बुद्धि) को जगाये रखो, अर्थात अपने चेतन मन (बाहरी मन) की गतिविधियों का ध्यान रखो कि वो क्या-क्या कर रहा है, बस चेतन मन को आपको सुलाना है, खुद नहीं सोना है, मैं आपको और स्पष्ट करता हूं, चेतन और अवचेतन दो जुडवां भाइयों की तरह है, इस आत्मसम्मोहन (आत्म सम्मोहन) की प्रक्रिया में बड़ा भाई अवचेतन मन, छोटे भाई चेतन मन को सुलाता है, और उसका ध्यान रखता है, याद रखो यदि बड़ा भाई अवचेतन मन (बुद्धि) भी सो गया तो फिर आप निद्रा में चले जाओेगे आत्मसम्मोहन में नहीं, इसमें ये बाते आपको विशेष ध्यान रखनी है कि अपने आप को सचेत रखना है जगाये रखना है सोना नहीं है, यदि सो गये तो आप स्वयं को सम्मोहित नहीं कर पायेगे। जैसे ही आपको अपना मन शांत लगने लगे, उसकी उछल-कूद बन्द हो जाये, और आपको अपना शरीर रूई की तरह हल्का महसूस होने लगे, तो समझिए आप सही रास्ते की ओर बढ़ रहे हैं, इस स्टेज पर अपने मन को सकारात्मक सुझाव या सजेशन दीजिए! यदि आपमें कोई दुर्गण है, कोई बुरी आदत है तो उसको सुधारने के लिए सजेशन दीजिए। यदि आपको लगता है कि आपके अन्दर कोई दुर्गण नहीं है तो अपने आप को निम्न प्रकार से सजेशन दे सकते हैं-
आत्म सम्मोहन सफलता की कुंजी-
मेरा मन की एकाग्रता बढ़ रही है, मैं अपने दैनिक कार्य बुरी लगन व ईमानदारी से कर रहा हूं।
जिन्दगी में आने वाली समस्याओं का मैं पूरी बहादूरी से सामना कर रहा हूं। मैं उनसे डरकर नहीं भागूंगा। आदि कोई भी सुझाव दिये जा सकते हैं।
याद रखें आपका ध्यान जितना गहरा होगा, आपकी उतनी ही गहरी पकड़ अपने अवचेतन मन पर होगी, और आप उतने ही गहरे और अमिट (न मिटने वाले) परिवर्तन अपने आप में कर सकते हैं।
अब आपके मन में ये प्रश्न भी कहीं कौंध रहा होगा कि हमें ये कैसे पता चलेगा कि हम आत्म सम्मोहित हुए भी हैं या नहीं। बिल्कुल साथियों!! मैं आपकी इस जिज्ञासा का भी समाधान कर देता हूं-इसके लिए आप अपने मन की कोई अच्छी या बुरी आदत को लिजिए, माना आपको प्रातः 8 बजे सो कर उठने की आदत है, तो आप आत्मसम्मोहन के अभ्यास में अपने मन को प्रातः 7 बजे उठने का आदेश या सजेशन दीजिए, और इस सजेशन को लगातार कुछ दिनों तक दीजिए, यदि आप की आंखे आटोमैटिक प्रातः 7 बजे खुलने लगे, भले ही आप 8 बजे ही उठो, परन्तु इससे आप इतना तो समझ ही सकते हैं कि मेरा आत्मसम्मोहन का अभ्यास सही दिशा में चल रहा है, गहरी सम्मोहन की अवस्था में यदि यही सुझाव दिया जायेगा तो आप चाहे  कितनी ही गहरी नींद में क्यों ना सो रहे हो आपको आपका अवचेतन मन प्रातः 7 बजे कान पकड़ कर उठा ही देगा। ऐसे ही छोटे-बड़े अभ्यास आप अपनी और आदतों के संबंध में कर सकते हैं, आप निश्चित ही अपने आप में बड़ा बदलाव महसूस करेंगे। ये एकदम से नहीं होगा इसमें समय लगेगा, समय आपकी विल पावर पर निर्भर करता है।
साथियों!! चेतन अवचेतन मन के बारे में मैं पिछल आलेख ‘‘सम्मोहन-हिप्नोटिज्म के कुछ रोचक रहस्य!!‘‘ में बता चुका हूं, इस को रिपीट करने की आवश्यकता नहीं है जिन्होंने यह आलेख नहीं पढ़ा वह टाइटल पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं तो साथियों!! आपको ये आलेख कैसा लगा कमैंटस करके जरूर बतायें अगले आलेख तक के अलविदा साथियों!! नमस्कार। जयहिन्द।
                          -लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com
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