मौत से मुलाकात !! (रोमांच-कथा)


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सौरभ भारतीय विद्या भवन नई दिल्ली से ‘‘ज्योतिष अलंकार‘‘ कर रहा था। उसकी कक्षाऐं सप्ताह में शनिवार व रविवार को ही लगती थी। वो अपने शहर से ट्रेन से आता था व सदर बाजार स्टेशन, नई दिल्ली से ही वापसी की ट्रेन पकड़ता था। सौरभ अपनी कक्षा अटेंड करके सायं 6 बजे के आसपास वापस आने के लिए अपनी ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहा था। तभी दो आदमी उसके पास
 आये और उसकी ही बेंच पर बैठ गये। बातचीत प्रारम्भ हुई, पता चला इन्हें भी उसी ट्रेन से गाजियाबाद जाना है, जिससे सौरभ को अपने शहर जाना था। 
    सदर बाजार स्टेशन से यात्रा करनेे वाले पाठकबन्धु परिचित होंगे, कि प्लेटफार्म नं0 2 पर गाजियाबाद की तरफ से आने वाली लाइन पर खतरनाक मोड है, वहां उस तरफ से आती ट्रेन तब स्टेशन से नजर आती है, जब वह मात्र स्टेशन से 50 मी0 की दूरी पर रह जाती है।
      तभी उनमें से एक बोला- ‘‘वह ट्रेन तो सामने वाले प्लेटफार्म पर आ रही है।" यह कहकर उसने सौरभ का हाथ पकड़ लिया, चलो! लाइनपार करके उस स्टेशन पर चलते हैं?
      सौरभ बोला-‘‘मैं कभी स्टेशनों पर लाइनपार नहीं करता, यदि ट्रेन आयेगी भी, तो भी मैं पुल से ही जाऊंगा, भले ही ट्रेन निकल जाये!"
      उस व्यक्ति ने सौरभ का हाथ पकड़े रखा, और बोला- तुम ‘‘सिवेलियन" के साथ ये ही दिक्कत है, कि तुम डरते बहुत हो!
       उसका दूसरा साथी फोन पर बात करने में मग्न था और पीछे ही खड़ा था।
     भाई! मैं तो सामने वाले प्लेटफार्म पर जा रहा हूं, उसने सौरभ के पकड़े हुए हाथ को "मज़बूरी" में छोड़ते हुए कहा, और वह बिना दाएं-बाएं देखे पटरियों पर कूद गया। उसका दूसरा साथी अब भी फोन पर बात करने में व्यस्त था।
      उसके पटरी पर कूदते ही, उसी लाइन पर सौरभ को ट्रेन आती दिखी, वो तो लाइन पार कर ही रहा था, परन्तु सौरभ भी स्टेशन पर होकर भी रेलवे लाइन के इतना नजदीक था, यदि वह वही खड़ा रहता तो ट्रेन की पूरी तरह जद में था, क्योंकि तीव्र गति से आती ट्रेन से उत्पन्न वायुवेग से उसके भी हवा में लहराकर, ट्रेन से टकराने की शत-प्रतिशत संभावना थी, सौरभ तुरन्त पीछे हटा और जमीन पर तेजी से गिरते हुए (क्योंकि जमीन पर लेटने से उसके हवा में उड़ने की सम्भावना बहुत कम थी) पटरी पार कर रहे, व्यक्ति की ओर चीखा-भाई ट्रेऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽन----।
      सौरभ की बात पूरी भी न हो पायी थी कि नाॅन स्टाॅप राजधानी एक्सप्रेस प्लेटफार्म से गुजर रही थी, सौरभ ने भय से अपनी आंखे बन्द कर ली, कदाचित इतनी दर्दनाक मौत वो नहीं देख पाता।
      तभी ट्रेन के इमरजेन्सी ब्रेक लगने की आवाज आयी, सौरभ ने धीरे से आंखे खोलकर देखा कि ट्रेन के पहिये चिंगारी उगल रहे हैं, इसका मतलब था ट्रेन के इमरजेन्सी ब्रेक लग रहे हैं। ट्रेन स्टेशन से दूर जाकर रूक गई। लगता था, ड्राइवर को आभास हो गया था कि कोई ट्रेन के आगे कूदा है।
      उसका साथी भी फोन हाथ में लिए सौरभ के पास भाग कर आ गया और पटरियों की तरफ झांकते हुये बोला-‘‘खुद तो मरा, तुम्हें भी ले मरता, परन्तु मुझे तो जीते-जी ले मरा!!’’
     भाई!!! तुम्हे क्यों ले मरा?? तुम तो ठीक ठाक खड़े हो? सौरभ ने आहिस्ता से जमीन पर बैठते हुए, अपने कपड़ों की धूल झाड़ते हुए पूछा??
      अरे यार! हम दोनों पुलिस में हैं, और ‘‘ऑन डयूटी" हैं, गाजियाबाद अपने पर्सनल काम से जा रहे थे!" इस युवक के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही थीं।
     इतने में रेलवे पुलिस के 4-5 सिपाही भागे हुए प्लेटफार्म पर आ गये, हमसे बोले ट्रेन के आगे कौन कूदा है??? वो कहां हैं??? 
     सौरभ जमीन पर ही बैठा रहा और उसने कोई जवाब नहीं दिया!
    आगे कूदने वाले सिपाही का साथी दूर जाकर फोन मिलाने लगा, उसके चेहरे की चिंता और भावों को देखकर साफ लगता था, कि वह उसे ही फोन मिला रहा है जो अभी ट्रेन के आगे कूदा है। अचानक उसका चेहरा खिल उठा, सौरभ तुरंत उठकर उसके पास पहुंचा-पूछा! क्या वो "सेफ" है?
    वो बोला! थैक्स गाॅड! वो ठीक है! ट्रेन उसे छूकर निकली थी, परन्तु वो चपेट में आने से बच गया है, सामने वाले प्लेटफार्म पर पैसेंजर्स की भीड़ में दुबक गया है, कही पुलिस उसे आत्महत्या के प्रयास के जूर्म में गिरफ्तार न कर ले। इतना कहते ही उसने जेब से सिगरेट निकाल कर सुलगायी और उस स्टेशन पर जाने के लिए पुल की तरफ तेजी से बढ़ गया।
    सौरभ की ट्रेन उसी प्लेटफार्म पर आयी, जिस पर वो लोग खड़े थे, सौरभ उसमें जाकर बैठ गया, अब भी सौरभ बुरी तरह घबरा रहा था, उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, वह अपनी दिल की धड़कनों को नियंत्रित करने के लिए प्राणायाम करने लगा। सौरभ की लाइफ में ऐसे कई हादसें बहुत जल्दी-जल्दी हो चुके थे। 
     ट्रेन चल पड़ी, मन्दिर की घंटियों ने सौरभ की तंद्रा भंग कर दी, सौरभ अपने बैग में अपनी "गोमुखी और माला" देखने लगा। सोचने लगा पता नहीं कौन सी ‘‘शक्ति" या ‘‘दुआ" मेरी हिफाजत कर रही है, तभी उसे एक शायर साहब का 'शेर' याद आ गया-
न जाने कौन 'दुआओं' में याद रखता है,
मैं   डूबता    हूं   समुद्र   उछाल  देता  है।
      और सौरभ अपने मन को, माला के, मनकों के माध्यम से "मन्त्र" की अतल गहराईयों में उतारने का प्रयास करने लगा।
                              लेखक-संजय कुमार गर्ग (sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)
(प्रस्तुत कहानी  
सत्य घटनाक्रम पर आधारित है। पात्रों के नाम,स्थान आदि सभी काल्पनिक हैं।)

सम्मोहन-हिप्नोटिज्म के कुछ रोचक रहस्य!!

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प्राचीन भारत में सम्मोहन (Hypnotism) को सम्मोहन, मोहन, वशीकरण विद्या आदि नामों से पुकारा जाता था, मध्यकाल के आते-आते इस विद्या को जादूगरों, बाजीगरों, और तमाशा दिखाने वालों की विद्या माना जाने लगा, कुछ स्वार्थाी लोगों ने इस विद्या का काफी दुरूपयोग भी किया, अस्सी नब्बे के दशक में माताएं अपनी बेटियों से बाहर जाते समय, ये हिदायत देना नहीं भूलती थी, बेटी! किसी अन्जान पुरूष से नजर मिला कर बात नहीं करना, बेटी को मां की ये हिदायत भी इसी विद्या के दुरूपयोग का असर थी, कि कहीं कोई स्वार्थी जादूगर उनकी पुत्री को वश में न कर ले, इसी कारण इस विद्या के जानकारों से, सभ्य समाज के लोगों दूर रहने लगे थे, और हम सम्मोहन (Hypnotism) को केवल जादूगरों बाजीगरों और तमाशा दिखाने वालों का कोई काला जादू मानकर रह गये। परन्तु, जैसे ही ये सम्मोहन, हिप्नोटिज्म (Hypnotism) बनकर डाॅ0 जेम्स के कन्धों पर चढ़कर भारत आया तो हम भारतवासियों ने इसका तहेदिल से स्वागत किया और इसकी महिमा के बखान करने लगे। हम यह भूल गये अरे! ये वही तोे है, जिसे हमने काला जादू और बाजीगरों की कला मानकर ठुकरा दिया था। साथियों! जिस महान विज्ञान की हमने कद्र नहीं की, आज इसी विज्ञान से बिना इनथीसिया दिये आपरेशन हो रहे हैं, गर्भवती महिलाओं की पीड़ा रहित डिलीवरी हो रही है, लोगों की नशे की आदतों को छुड़ाया जा रहा है, तरह-तरह की मानसिक बीमारियों जैसे फोबिया आदि का इलाज हो रहा हैं, आदि न जाने क्या-क्या कार्य इस सम्मोहन (Hypnotism)या कहिए कथित काले जादू से हो रहे हैं। 

साथियों! सम्मोहन या हिप्नोटिज्म के बारे में और जानने से पहले हम मन (Mind) के बारे में जान लेते हैं, 

मन (Mind) की मुख्यतः दो अवस्थाएं पायी जाती है, 
पहली चेतन मन दूसरी अवचेतन मन
चेतन मन (Conscious Mind) को हम जाग्रत मन भी कह सकते हैं, जितने भी कार्य हम खुली आंखों से करते हैं, वो सभी कार्य हम चेतन मन (Conscious Mind) में रहकर ही संचालित करते हैं, खुली आंखों से कार्य का मतलब, जैसे अपने दैनिक कार्य, नहाना, खाना, पढ़ना, आफिस जाना, आदि आदि सभी कार्य चेतन मन (Conscious Mind) के द्वारा संचालित होते हैं। विज्ञान के अनुसार मस्तिष्क का वह भाग जिसमें होने वाली क्रियाकलापों की जानकारी हमें होती रहती है उसे चेतन मन (Conscious Mind) कहते हैं।

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अवचेतन मन (Subconscious Mind) किसे कहते हैं-इसे अर्धचेतन मन भी कहते हैं, मन के जितने कारोबार हमारी आंखे बन्द होने पर होते हैं वे सभी अवचेतन मन (Subconscious Mind) द्वारा संचालित होते हैं जैसे सपनें दिखाना, भविष्य में होने वाली बिमारी या खतरे का पूर्व में ही अहसास कराना, दूसरों के मन की बात हमारे मन में ले आना, अदृश्य वस्तुओं की झलक दिखा देना आदि ऐसे सभी कार्य जो छठी इन्द्री का हिस्सा होते हैं। वे सभी कार्य अवचेतन मन (Subconscious Mind) द्वारा संचालित होते हैं, अवचेतन मन, चेतन मन से अनंत गुना शक्ति शाली होता है। 

साथियों! यही अवचेतन मन (Subconscious Mind) सम्मोहन (Hypnotism) या हिप्नोटिज्म की विषय वस्तु है, सम्मोहन विज्ञान (Hypnotism) में इसी मन को नियंत्रित करके उसमें सकारात्मक सुझाव (Positive Suggestion) या सजेशन डाले जाते हैं। इसी सजेशन के द्वारा सम्मोहन कर्ता (Hypnotist) व्यक्ति के किसी भी अंग को सुन्न कर सकता है, जिससे डाक्टर उस अंग का आपरेशन कर सकते हैं, या सम्मोहन कर्ता (Hypnotist) चेतन मन (Conscious Mind) को सुला कर, अवचेतन मन (Subconscious Mind) को जाग्रत करके किसी व्यक्ति की मानसिक बिमारी को दूर कर सकता है, जादूगर, सम्मोहित व्यक्ति (Hypnotized Person) से काफी हद तक मनचाहे कार्य भी करा लेते हैं।

अब प्रश्न उठता है कि किसी को सम्मोहित (Hypnotized)  कैसे किया जाता है, किसी स्त्री या पुरूष को कोई चमकदार वस्तु दिखाकर या फिर उसकी आंखों में अपनी अपलक दृष्टि जमाकर उसे निद्रा की अवस्था में ले जाकर उसके अवचेतन मन (Subconscious Mind) को आगे लाया जाता है, और उसके अवचेतन मन में सकारात्मक सुझाव डाले जाते हैं और उसे उन सुझावों पर चलने के लिए तैयार किया जाता है। ये कार्य सम्मोहन या हिप्नोटिज्म के अंतर्गत आते हैं।

अब साथियों! प्रश्न उठता है कि सम्मोहन के कितने प्रकार होता हैं-(Kind of Hypnotism)-

सबसे पहले है आत्मसम्मोहन (Self hypnosis), साथियों आत्मसम्मोहन सभी सम्मोहनों का केन्द्र बिन्दु है, यदि हम खुद को सम्मोहित नहीं कर सकते तो हम दूसरों को कैसे सम्मोहित कर सकते हैं, इसलिए सबसे पहले हमें आत्मसम्मोहन (Self hypnosis) करके अपने आप को सकारात्मक सुझाव देकर अपनी कमियों, दुर्बलताओं को दूर करना चाहिए। अतः सबसे पहले हमें आत्मसम्मोहन का अभ्यास करना चाहिए।

दूसरा है पर सम्मोहन, अर्थात दूसरे को सम्मोहित करना, इसके द्वारा सम्मोहन कर्ता (Hypnotist) किसी दूसरे व्यक्ति को सम्मोहित करके उसके मानसिक विकार को दूर करने के लिए आवश्यक सुझाव देता है, या इसके माध्यम से सम्मोहन कर्ता दूसरों को चमत्कार भी दिखा सकता है।

तीसरा समूह सम्मोहन (Group hypnosis)-किसी भीड़ या समूह को सम्मोहित करना ही समूह सम्मोहन कहलाता है, इसमें सम्मोहन कर्ता पूरी सभा को या उसमें से किसी समूह को सम्मोहित करता है। बहुत से कथावाचक अपने श्रोताओं को इसी विधि से सम्मोहित कर लेते हैं।

चौथा  है प्राणी सम्मोेहन-पशु-पक्षियों को सम्मोहन करना ही प्राणी सम्मोहन कहलाता है। सर्कस में रिंगमास्टर अनेक प्रकार से उनकी आंखों में आंखे डालकर शेर, चीते, हाथियों आदि को सम्मोहित करते हैं।

पांचवा है परामनोविज्ञान सम्मोहन-परामनोविज्ञान का विषय बहुत विस्तृत है, इसमें किसी दूर बैठे व्यक्ति या समूह को सम्मोहित करना, सम्मोहित अवस्था में किसी खोई वस्तु का पता लगाना, आत्माओं से सम्पर्क करना, भूत-भविष्य के बारे में जानना आदि शामिल है। ऐसे सभी कार्य परामनोविज्ञान सम्मोहन के अंतर्गत आते हैं।

साथियों!! सम्मोहन कैसे करें?, हम किस प्रकार के व्यक्ति को सम्मोहित नहीं कर सकते, हम सम्मोहित व्यक्ति से क्या नहीं करा सकते, हिप्नोटिज्म या मैस्मेरज्म में क्या अन्तर है, सम्मोहन से किस प्रकार मानसिक इलाज करते हैं आदि आदि
विषयों पर भी मैं अलग से आलेख लेकर आउंगा। 
इस आलेख के बारे में आपकी क्या राय है मुझे जरूर बताइये, आलेख अच्छा लगा हो तो शेयर करना बिल्कुल न भूलें अगले आलेख तक के लिये अलविदा,  नमस्कार। जयहिन्द।
                             -लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com

बुद्धिमान या जीनियस व्यक्तियों की 11 आदतें!

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बुद्धिमान या जीनियस व्यक्तियों की 11 आदतें!
मित्रों!! इस आलेख में हम आपको बुद्धिमान, इंटेलिजेंट या कहिए जीनियस लोगों की आदतें, विशेषताएं बता रहें हैं, प्रसिद्ध वैज्ञानिकों, लेखकों और विद्वानों आदि पर किये गये रिसर्च से मनौवैज्ञानिकों ने उनमें कुछ आदतें या विशेषताऐं खोजी हैं जो किसी व्यक्ति को सामान्य से असामान्य यानि जीनियस-इंटेलिजेन्ट बनाती हैं-

जीनियस-इंटेलिजेट की 11 विशेषताएं-आदतें-
(11 Habits of Intelligent & Genius People)


1-रात को काम करने की आदत-(Night Owl)
यदि आप को रात में काम करने की आदत है, तो आप एक जीनियस हो सकते हैं, जीनियस को काम करने व सोचने के लिए रात की खामोशी पसंद होती है, रात का शांत वातावरण उन्हे  नये-नये विचार खोजने में मदद करता है।
 
2-गन्दी हैंडराइटिंग- (Dirty handwriting)
यदि आपकी हैंडराइटिंग गन्दी है  तो बधाई आप भी एक GENIUS हो सकते हो, गन्दी राइटिंग का कारण है कि जीनियस (GENIUS) के दिमाग में विचार बहुत तेजी से आते हैं, परन्तु उनका हाथ उतनी तेजी से उनके विचारों को लिख नहीं पाता, अतः माइंड व हाथों का संतुलन बनाने के लिए वे जल्दी-जल्दी लिखते हैं जिससे उनकी राईटिंग खराब आती है।

3-सुस्त रहना-(Laziness)
क्या आप सुस्त रहते हैं तो आप भी एक बुद्धिमान (Intelligent) हो सकते हो, नये रिसर्च से ज्ञात हुआ कि, जीनियस ज्यादा सोचते हैं, इस लिए उनका दिमाग उनकी शारीरिक ऊर्जा को जल्दी समाप्त कर देता है, शारीरिक ऊर्जा के समाप्त होने के कारण वे अपने कार्य बहुत सुस्ती से करते हैं ।

4-सीखने के इच्छुक-(Learning attitude)
यदि आपका बच्चा आपसे बहुत ज्यादा प्रश्न करता है, तो आपको झुंझलाने की जरूरत नहीं है, कोग्रेच्युलेट आप एक जीनियस (GENIUS) बच्चे के पिता हैं, आपको अपने बच्चे पर झुंझलाने की बजाय, उसके प्रश्नों का उत्तर देना चाहिए, चाहे फिर उसके लिए आप टयुटर रखें, या फिर उसको पढ़ाने के लिए खुद पढ़े़े, नये रिसर्च से पता चला है कि एक जिनियस (GENIUS) में हर चीज के बारे क्यों? कैसे? की जिज्ञासा बहुत ज्यादा होती है।

5-अकेला रहने वाला इन्सान-(like be alone)
नये शोधों से पता चला है कि जीनियस (GENIUS) समाज से दूर रहना पसन्द करते हैं, वो बहुत कम सोशल होते हैं, उन्हे रिजर्व रहना पसन्द होता है। उनके फ्रेंड्स भी बहुत कम होते है, फ्रेंड्स से पार्टी करना, चेटिंग करना, उन्हे पसन्द नहीं होता, उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उनके मस्तिष्क में नये विचारों या थोट्स में व्यवधान उत्पन्न होता है, और इन कामों से टाइम बचाकर वे अपने नये रिसर्च पर समय दे सकते हैं।

6-खुद से बात करने वाला- (Talk to Yourself)
यदि आपको भी खुद से बात करने की आदत है और लोग आपको पागल बताते हों, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है, मनौवैज्ञानिकों का मानना है कि बुद्धिमान (Intelligent) लोगों में खुद से बात करने की आदत होती है, क्योंकि ये लोग अपनी लाइफ व प्रोजेक्ट के बारे में विचार बनाते हैं और उन्हें किसी दूसरों को पहले बताने की बजाय खुद से डिस्कस करते हैं, इसलिए ये अपने आप से बात करते हुए प्रतीत होते हैं।

7-भूलक्कड या भूलने की बीमारी- (Forgetting about things)
क्या आप लाॅक लगाना भूल जाते हैं या फिर लाॅक लगाकर चाबी ताले में ही भूल जाते है, आदि-आदि यदि आपमें भूलने की बीमारी है, तो बधाई हो, आप एक जीनियस (GENIUS) हैं, फाॅरगेटिंग नाम के निबन्ध में बताया गया है कि कैसे एक असाधारण बुद्धि (Intelligent) वाले लोगों को छोटी-छोटी बातें याद नहीं रहती, क्योंकि अगर आप हर चीज पर ध्यान देते हैं तो फिर आप किसी एक चीज पर फोकस कर ही नहीं सकते, महान विज्ञानी आइंसटीन तो एक बार गाड़ी में बैठकर अपने घर का ही पता भूल गये थे। 

8-डायरी लिखना-(Diary Writing)
जीनियस (GENIUS) में डेली डायरी लिखने की आदत होती है, वे अपने लाइफ की प्रत्येक घटना को, अपनी आदत को, या फिर अपने किसी प्रोजेक्ट के बारे में डायरी में लिखते हैं, डायरी लिखने से वो अपनी लाइफ व अपने किसी प्रोजेक्ट को अच्छे से ऑब्जर्व  कर पाते हैं, अच्छे से समझ पाते हैं। डायरी कैसे लिखें  इसके बारे में मैंने एक लेखा लिखा है, आप इसी लिन्क पर क्लिक करके उस पर पहुंच सकते हैं।

9-सोने से पहले सोचना-(Thinking before sleeping) 
बुद्धिमान (Intelligent) लोगों में सोने से पहले कुछ न कुछ सोचने की आदत होती है, कितने बजे उठना है, कल क्या करना है, किससे मिलना है, या फिर अपने किसी प्रोजेक्ट या रिसर्च के बारे में सोचना कि उस पर कैसे काम करना है। सोते समय सोचने से उनका अवचेतन मन सोने के बाद उनके प्रोजेक्ट या रिसर्च पर नये-नये विचार लेकर आता है। और यही नये विचार उन्हे बुद्धिमान (Intelligent)  की श्रेणी में लाकर खड़ा करते हैं।

10-किसी न किसी चीज का नशा-(Addiction some things)
जीनियस (GENIUS) लोगों पर हुए अध्ययन में पाया गया है कि उन्हे कुछ न कुछ चीज का अडिक्शन होता है, जैसे वीडियो गेम खेलने की आदत, दांतों से नाखून चबाने की आदत या फिर सिगरेट या सिगार पीने की आदत आदि। वैसे आप जीनियस (GENIUS) बनने के लिए किसी चीज के एडिक्ट मत बन जाइये। क्योंकि बिना एडिक्शन के व्यक्ति भी बुद्धिमान (GENIUS) हुए हैं 

11-भावुक होते हैं-(Be Emotional)
बुद्धिमानों (Intelligent) पर हुए अध्ययन से पता चला है कि वे काफी भावुक भी होते हैं, किसी का दुख-दर्द उनसे देखा नहीं जाता, किसी की भी सहायता करने को वे हमेशा तैयार रहते हैं।

तोसाथियों!! ये हैं जीनियस (GENIUS)  या  बुद्धिमान (Intelligent) लोगों के लक्षण, इनमें से आपमें कितने हैं?? कमैंटस करके जरूर बतायें, परन्तु इन लक्षणों को अपने अन्दर जबरदस्ती पैदा करने या लाने का प्रयास बिल्कुल न करें, क्योंकि ये नैचुरली होते हैं, और इन सभी लक्षणों का आपके अन्दर न होना भी, ये नहीं बताता कि आप जीनियस (GENIUS) नहीं हैं क्योंकि अपवाद हर चीज का मौजूद है।
तो आपको ये आलेख कैसा लगा, कमैंटस करके जरूर बतायें,  और आलेख को शेयर करना बिल्कुल न भूलें और यदि आपने अभी तक मेरे ब्लाॅग को सब्सक्राइब नहीं किया है तो अपनी ई-मेल बराबर वाले बाॅक्स में डाल कर, मेरे ब्लाॅग को फ्री में सब्क्राइब कर सकते हैं अगले आलेख तक मुझे आज्ञा दीजिए, नमस्कार! जयहिन्द।        लेखक-संजय कुमार गर्ग 


शरीर से मस्से-तिल हटाने का सरल उपाय

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शरीर से मस्से-तिल हटाने का सरल उपाय
आजकल काफी लोग त्वचा की बीमारियों से ग्रसित हैं। इसका एक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि आजकल हमारे खानपान में काफी बदलाव आ गया है, नयी पीढ़ी फास्ट फूड की तरफ काफी आकर्षित है, इसके कारण न केवल हमारे स्वास्थ्य संबंधी बल्कि स्किन संबंधी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। स्किन संबधी एक समस्या आजकल तेजी से बढ़ रही है वह है शरीर पर मस्से warts की समस्या। वैसे तो मस्से warts हमारी त्वचा पर एक उपज की तरह होते हैं, और क्यूरेबल माने जाते हैं, यानि कि मस्से कैंसर जैसी भयानक बीमारी से युक्त नहीं होते। क्योंकि ये स्किन की सुन्दरता को कम करते हैं इसलिए हम इन्हें पसंद नहीं करते।
आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मस्से ‘ह्युमन पैपिल्लोमा वाइरस’ के कारण विकसित होते हैं।  शरीर पर जो वेदना रहित, सख्त, उड़द के समान, काली भूरी और उठी हुई फुंसी होती है, उसे संस्कृत में ‘माष’ और आम भाषा में मस्सा कहते है। वैसे तो मस्से अपने आप विकसित होकर अपने आप ही गायब भी हो जाते हैं, पर इनमे से कई मस्से बड़ी तेजी से फैलते हैं, और काफी समय तक बने रहते हैं, इसलिए इनका इलाज कराना जरूरी हो जाता है।

प्रस्तुत है मस्से को समाप्त करने की कुछ घरेलू या देसी टिप्स-

1-बरगद के पत्तों का रस मस्सों के उपचार के लिए बहुत ही प्रभावशाली होता है। इसका प्रयोग मस्सों पर करने से त्वचा सौम्य हो जाती है और मस्से warts अपने आप गिर जाते हैं।

2-दूसरा उपाय है कि आपको किसी पान वाले की दुकान से एक पान का पत्ता और थोड़ा सा चूना लेना होगा। अब आप पान के पत्ते की नोक पर चूना लेकर अपने तिल या मस्से वाली जगह पर लगाएं। और इसे जब तक लगा रहने दें, जब तक चूना सूख न जाए। सूखने के पश्चात उस स्थान को हल्के गुनगुने पानी से धो लें। आप देखेंगे कि आपके चेहरे और त्वचा से तिल या मस्सा पूरी तरह से गायब हो है, और सबसे बढ़िया बात ये है कि चेहरे से मस्सा या तिल हटने के बाद बिल्कुल निशान नहीं छोड़ता है। परन्तु इस बात का विशेष ध्यान रखें कि चूना आपको केवल पान पर लगाने वाला हीे किसी पान की दुकान से ही लेना है कहीं ओर से चूना नहीं लेना है।

3-कच्चे आलू का एक टुकड़ा (स्लाइस) नियमित रूप से दस मिनट तक मस्से warts पर लगाकर रखने से मस्सों से छुटकारा मिल जायेगा। यह एक आसान उपाय है परन्तु थोड़ा सा समय लेता है।

4-केले के छिलके का छोटा सा हिस्सा काटकर उसे अंदर की तरफ से मस्से पर रखकर उसे एक पट्टी से बांध लें। ऐसा दिन में दो बार करें और लगातार करते रहें जब तक कि मस्से warts पूरी तरह समाप्त ना हो जाये। ये भी मस्सों से छुटकारा पाने की एक आसान विधि है।

5-आप अरंडी के तेल से भी अपने मस्सों का इलाज कर सकते हैं, अरंडी के तेल को नियमित रूप से मस्सों पर लगायें। इससे मस्से नरम-मुलायम पड़ जायेंगे, और धीरे धीरे शरीर या चेहरे से गायब हो जायेंगे। यदि आप चाहे तो अरंडी के तेल के बदले कपूर के तेल का भी प्रयोग कर सकते हैं। इससे भी मस्सों warts में लाभ मिलता है।

6-आप लहसून से भी मस्सों का इलाज कर सकते हैं, लहसून के एक टुकड़े को पीस लें, लेकिन ज्यादा महीन नहीं होना चाहिए और इस पीसे हुए लहसून को मस्से पर रखकर पट्टी से बांध लें। इससे भी मस्सों warts के उपचार में मदद मिलती है।

7-मौसमी के रस से भी आप ये प्रयोग कर सकते हैं, एक बूँद ताजे  मौसमी का रस मस्से पर लगा दें, और इसे भी पट्टी से बांध लें। ऐसा दिन में लगभग 3 से 4 बार करें। इस विधि से भी मस्से समाप्त हो जाते हैं।

8-बंगला, मलबारी, कपूरी, या नागरबेल के पत्ते से भी आप मस्सों का इलाज कर सकते हैं, इनमें से किसी भी पत्ते के डंठल का रस मस्से  पर लगाने से मस्से झड़ जाते हैं। 

9-पपीता के क्षीर को मस्सों पर लगाने से भी मस्सों के समाप्त होने में मदद मिलती है।

10-मस्सों पर नियमित रूप से प्याज रगड़ने से भी मस्से समाप्त हो जाते हैं।

11-मस्से हटाने का टोटका-यदि आप टोटकों पर विश्वास करते हों तो यह टोटका आपके काम का हो सकता है, आपके शरीर में जितने भी मस्से हो उतनी ही काली मिर्च लेकर शनिवार के दिन उन्हें अपने एक-एक मस्से से छुआयें यानि टच करें, फिर रविवार को सबेरे ही उन्हें कपडे में बांध कर किसी रास्ते में फेंक आयें, इस टोटके से भी मस्से नष्ट हो जाते है।

12-वैसे यदि आप कोई दवाई मस्सों पर लगाना नहीं चाहते तो आप एक चम्मच कोथमीर के रस में एक चुटकी हल्दी डालकर सेवन करने से भी मस्सों warts में राहत मिलती है। परन्तु इसके लिए किसी वैद्य या देसी दवाओं के जानकार से सलाह ले लेनी चाहिए।

तो साथियों! आपको ये लेख कैसा लगा कमैण्ट करके जरूर बतायें, और मेरे ब्लाॅग को शेयर करना बिल्कुल न भूलें । धन्यवाद।          प्रस्तुति-संजय कुमार गर्ग

शराब-साकी के विभिन्न रूप कवि-शायरों की नजरों से!

शराब-साकी के विभिन्न रूप कवि-शायरों की नजरों से!
शराब-साकी के विभिन्न रूप कवि-शायरों की नजरों से!
शराब-साकी का नाम आते ही कुछ के चेहरे खिल जाते हैं, तो कुछ नाक-भौं सिकोड़ते हैं और किसी को तो उबकाई तक आने लगती है। हमारे समाज में शराब को लेकर भिन्न-भिन्न प्रतिक्रियायें देखने को मिलती हैं। परन्तु इन प्रतिक्रियाओं से अहम् हैं वो प्रतिक्रियायें जो शब्द-शिल्पी, कवि-शायरों द्वारा दी जाती हैं। जो रोचक होने के साथ-साथ मनोरंजक भी होती हैं। आओ जाने कुछ कवि-शायरों के मयपरस्ती को लेकर विचार-

हरभजन शाद जी के लिए मयपरस्ती एक इबादत की तरह है-
मयपरस्ती  मेरी   इबादत है
मैं   कभी  बेवजू  नहीं  पीता
मैं  शराबी  तो हूँ  मगर  भाई
मुफलिसों का लहू नहीं पीता।

साहिर शाहब ने तो कुछ ज्यादा ही फरमा दिया-
बे-पीये   ही   शराब    से    नफरत
यह  जहालत  नही तो फिर क्या है,
जहद*  के   बदले   खिल्द* में  हूरे                    *पुण्य, *जन्नत
यह तिजारत* नही तो और क्या है।                   *व्यापार 

इकबाल साहब ने तो साकी को ही चैंलेज कर दिया-
शराब-साकी के विभिन्न रूप कवि-शायरों की नजरों से!
नशा पिला के गिराना तो सबको आता है,
मजा तो जब है गिरतों को थाम ले साकी।

अकबर इलाहाबादी जी ने दुनिया वालों को डांटते हुये कहा-
हंगामा क्यों बरपा थोड़ी सी जो पी ली है,
डाका तो नहीं डाला चोरी तो नहीं की है।

जनाब शाद अजीमाबादी कहते हैं-
खुदा शाहिद* बुरा कहता नहीं जन्नत को मैं लेकिन              *गवाह
मजा कुछ और ही है, मैकशी का बादाखाने में।

शिबली साहब ने तो कमाल का तर्क दिया है-
तीस दिन के लिये *तर्के-मय-ओ-साकी कर लूं      *मदिरापान का त्याग
*वाइजे-सादा को रोजों में तो राजी कर लूं,            *धर्मोपदेशक
फेंक देने की कोई चीज नहीं *फजलो-कमाल       *भगवान की अनुकंपा
वर्ना *हासिद! तेरी खातिर मैं ये भी कर लूं।           *ईष्यालू

साइल देहलवी साहब ने तो कमाल का लिखा है-
*अहले-महशर देख लू कातिल को तो पहचान लूं    *प्रलय क्षेत्र मे जमा लोग
भोली-भाली शक्ल थी और कुछ भला सा नाम था
*मोहतसिब *तसबीह के दानों पे ये गिनता रहा  *रसाध्यक्ष *माला
किन ने पी, किन ने न पी, किन-किन के आगे जाम था।

अहसन मारहरवी साहब ने साकी-वाइज की कसमकस का सुन्दर वर्णन किया है-
साकी-ओ-वाइज में जिद है *बादाकश चक्कर में है     *शराबी
तौबा लब पर और लब डूबा हुआ सागर में है।       

चकबस्त लखनवी ने साकी को ही उलाहना दे डाला-
एक  सागर  भी  इनायत  ना  हुआ याद रहे
साकिया जाते हैं, महफिल तेरी आबाद रहे।

जिगर मुरादाबादी ने तो वाइज को ही ललकार दिया-
मुझे   उठाने   को   आया   है  *वाइजे-नादां            *नादान धर्मोपदेशक
जो  उठा  सके तो  मेरा *सागरे-शराब   उठा          *शराब का प्याला
किधर  से *बर्क  चमकती है, देखें  ऐ वाइज        *बिजली
मैं अपना जाम उठाता हूं, तो *किताब उठा।       *धर्मग्रन्थ

तपिश साहब तो कहते हैं-
मौत  आती   नहीं   करीने   की
ये  सजा मिल रही  है जीने  की
मय से परहेज? शेख तौबा करो
इक  यही  चीज तो है पीने की।

वामिक जौनपुरी साहब लिखते हैं-
मेरी खमोशी से *बरहम न हो मुझसे ऐ दोस्त          *नाराज
चलने  वाले  ही तो दम लेते हैं चलने के लिये
पी लिया  करते हैं जीने  की तमन्ना में कभी
डगमगाना  भी  जरूरी  है  संभलने  के लिये।

एक शायर साहब ने कमाल का लिखा है-
खुदा  का  जिक्र  करें  या  तुम्हारी  बात  करें
हमें तो इश्क से मतलब है किसी की बात करें
तुम्हारी बज्म में सब *रिन्द भी हैं शेख भी हैं        *शराबी 
पिये  शराब  और  नेकी  बदी  की  बात करें।

बशीर मेरठी तो सारी परेशानियों का हल ही मयकदा में बताते हैं-
कहां आशुओं की ये सौगात होगी 
नये  लोग  होंगे  नयी  बात होगी
परेशां हो तुम भी परेशां  हूं मैं भी
चलो  मैकदे  में  वहीं बात होगी।

यदि साकी-शराब की बात हो और गालिब साहब की कोई रूबाई न हो तो सब बेकार है, गालिब साहब लिखते हैं-
हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकलें मेरे अरमा लेकिन फिर भी कम निकले
कहा मयखाने का दरवाजा गालिब और कहां वाइज
बस इतना याद है कल वो आते थे कि हम निकले।

एक शायर साहब की जिन्दगी ही शराब से शुरू होती है-
मैखाने से शराब से साकी से जाम से
अपनी तो जिन्दगी शुरू होती है शाम से
आ मेरा हाथ थाम बहुत हो गया नशा
यारों ने मय पिला दी बहुत तेरे नाम से।

नक्श लायलपुरी तो इसे लाजवाब चीज मानते हैं-
फिर हाथ में शराब है सच बोलता हूं मैं
ये चीज लाजवाब है, सच बोलता हूं मैं
हाथों में एक जाम है, होठों पे इक गजल
बाकी ख्यालो-ख्वाब है सच बोलता हूं मैं।

अंजुम साहब ने कहा है-
शराब चीज ही ऐसी है ना छोड़ी जाये
ये मेरे यार के जैसी है ना छोड़ी जाये
हरेक शय को जहां में बदलते देखा
मगर ये वैसे की वैसी है ना छोड़ी जाये।

इन शायर साहब को तो केवल मयखाना ही आबाद लगता है वे कहते हैं-
साकिया हम कहां जाये तेरे मयखाने से
शहर के शहर नजर आते हैं वीराने से।

यदि इस संग्रह में बच्चन जी की कालजयी रचना मधुशाला की लाइनें ना आये तो यह संग्रह अधूरा ही रहेगा-
बिना पीये जो मधुशाला को बुरा कहे, वह मतवाला
पी लेने पर तो उसके मुंह पर पड़ जायेगा ताला
दास-द्रोहियों  दोनों में ही जीत सुरा की, प्याले की
विश्व विजयिनी बनकर जग में आई मेरी मधुशाला।

मित्रों! शराब-साकी के बारे में आपकी क्या राय है-  
                  -संकलन-संजय कुमार गर्ग sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)