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Clove Benefits: छोटी लौंग के बड़े फायदे!

Clove Benefits: छोटी लौंग के बड़े फायदे!
Cloves
भारतीय मसालों में
पायी जाने वाली छोटी सी लौंग [Clove] का इस्तेमाल भोजन में स्वाद और खुशबू को बढ़ाने के लिए प्राचीन काल से किया जाता रहा है। अपनी महक से किसी भी डिश में चार-चांद लगाने वाली लौंग अनेक बीमारियों को जड़ से खत्म करने में भी कारगर है क्योंकि इसमें प्रोटीन, आयरन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम और सोडियम आदि भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। कई बीमारियों में लौंग केे प्रयोग से चमत्कारिक लाभ होते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है-लौंग एक गर्म मसाला है, जो शरीर के ‘वात’ और ‘कफ’ को संतुलित रखने में मदद करता है। इस आलेख में हम लौंग के अनेक लाभों के बारे में बात करेंगे, इसके ऐसे लाभों के बारे में हम आपको बतायेगे जिन्हें कदाचित आपने पहले नहीं सुना होगा आइये अब देखते हैं-

Clove Benefits: छोटी लौंग के बड़े फायदे!


1-यदि आपको गैस की समस्या है तो आप सुबह खाली पेट एक गिलास पानी में लौंग के तेल की कुछ बूंदे डालकर पी लिया करें, आपकोे गैस की समस्या से छुटकारा मिल जायेगा।

2-यदि आपको सर्दी लग गयी है और जुकाम हो गया है तो आप लौंग को दांतों के नीचे दबा कर रख लें और उसका रस पीते रहें आपको जल्दी ही आराम मिल जायेगा।

3-यदि आपकी सांसों में दुर्गंध आती है तो आपको लौंग चबाकर खानी चाहिए इससे आपके मुंह की दुर्धंग समाप्त हो जाती है। लौंग चबा कर खाने से जीभ पर थोड़ी जलन सी भी महसूस होती है। 

Clove Benefits: छोटी लौंग के बड़े फायदे!
Clove Flowers
4-यदि आपकी किसी दाढ़ में दर्द हो रहा है तो आप एक लौंग उसी दाढ़ के नीचे दबा लें, जिस दाढ़ में आपको दर्द हो रहा है, आपको कुछ समय बाद ही दाढ़ के दर्द में आराम मिल जायेगा। लौंग को दांतों में दबाने के स्थान पर आप दर्द करने वाली दाढ़ में लौंग का तेल भी लगा सकते हैं।

5-यदि आपके चेहरे पर दाग-धब्बे हो गये हों या फिर आंखों के नीचे गहरे घेरे हो गये हों तो लौंग को पीसकर बेसन के साथ चेहरे में लगाने से काफी फायदा होता है।

6-यदि चेहरे पर मुंहासे हो गये हों तो मुंहासे पर एक लौंग को सिल या बट्टे पर घीसकर उसका लेप करने से मुंहासे ठीक हो जाते हैं, लेप को दिन में चार-पांच बार लगाना चाहिए। परन्तु ध्यान रखे मुंहासे में लौंग का लेप कुछ जलन जैसा हल्का दर्द भी करता है। परन्तु मुहांसे को एक-दो दिन में ठीक कर देता है।

7-लौंग का सेवन करने से गैस, ऐसिडिटी आदि समस्याओं से भी आराम मिलता है, साथ ही  लौंग का सेवन पेट के दर्द में भी आराम दिलाता है।

8-आपको कदाचित जानकारी नहीं होगी, कि लौंग का सेवन हमारे मानसिक स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचाता है, लौंग के तेल या लौंग को जलाकर उसका धुंआ लेने से या फिर साबुत लौंग को ही मुंह में रखकर चबाने से मानसिक तनाव और अवसाद दूर होता है। लौंग हमारे मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाकर उसे मजबूती प्रदान करता है जिससे तनाव हमारे मन पर हावी नहीं हो पाता। यदि आप मानसिक तनाव होने पर सिगरेट, गुटका या किसी अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं तो एक बार लौंग का प्रयोग नशीली चीजों के विकल्प के रूप में प्रयोग करके अवश्य देखिए।

9-लौंग में एंटी आक्सीडेंटस व एंटीबैक्टीरियल का गुण भी पाया जाता है, जिससे हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनती है। अतः लौंग का किसी भी रूप में सेवन करने से हम बीमारियों से बचे रहते हैं।

Clove Benefits: छोटी लौंग के बड़े फायदे!
Clove Plants
10-सर्दियों में लौंग का सेवन करने से हमारा शरीर गर्म रहता है, इसका सेवन करने से रक्त संचार में सुधार होने लगता है। इसी कारण लौंग हमारे शरीर की सर्दी जनित रोगों से रक्षा करती है। 

11-लौंग का तेल हमारी त्वचा के लिए लाभदायक होता है। यह त्वचा की कीटाणुओं और बैक्टीरिया से रक्षा करता है। लौंग के तेल में झुर्रियां दूर करने के एंटी एजिंग गुुण होते हैं, जिससे हमारी त्वचा पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है।

12-कदाचित आप नहीं जानते होंगे कि, आकृति विज्ञान का मानना है कि लौंग का आकार मनुष्य के "शुक्राणु" जैसा होता है, अतः लौंग का शुक्राणुओं को बनाने, उन्हें सबल बनाने और उन्हें स्वस्थ बनाने में विशेष महत्व होता है। यदि आप इस प्रकार की समस्या से ग्रसित हैं तो लौंग को पानी में उबालकर उसके पानी का सेवन करना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए किसी वैद्य या प्राकृतिक चिकित्सक की सलाह ले लेनी चाहिए।

लौंग का उपयोग कैसे करें?


तेल के रूप में-

लौंग का तेल किसी भी पंसारी की दुकान पर मिल जायेगा, इसका उपयोग दांत-दाढ़ के दर्द के लिए तथा उसे पानी में मिलाकर शरीर में गर्माहट लाने के लिए तथा सर्दी जनित रोगों के लिए किया जा सकता है।

काढ़े के रूप में-

लौंग को पानी में उबालकर उसका काढ़ा बनाया जा सकता है, जो सर्दी, खांसी, जुकाम-नजला और गले की खराब आदि को ठीक करता है।

लौंग का पाउडर के रूप में-

लौंग का पाउडर आपको आयुर्वेदिक औषधि की दुकान पर मिल जायेगा, इसका उपयोग आप अपनी पेट की समस्याओं के लिए कर सकते हैं, इसका सेवन दूध, पानी या शहद में वैद्य के परामर्श पर किया जा सकता है।

लौंग को चाय में डालकर-

चाय बनाते समय, उसमें लौंग डाल कर चाय का सेवन करने से, पेट की समस्याओं के साथ-साथ सर्दी, खांसी, नजला-जुकाम में आराम मिलता है।

इस प्रकार हमने देखा एक लौंग से दांतो की समस्या दूर करने में सहायता मिलती है, स्किन के लिए लाभकारी हेै, साथ ही सर्दी से उत्पन्न होने वाले रोगों आदि में ये अत्यंत गुणकारी है। साथ ही हमने आकृति विज्ञान के अनुसार बताया कि शुक्राणुओं में वृद्धि करने व उन्हें मजबूत बनाने में भी लौंग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, अतः लौंग का हमें उपरोक्त समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए नियमित सेवन करना चाहिए। इसलिए हम कह सकते हैं कि छोटी लौंग के बड़े फायदे हैं।

प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग, योगाचार्य, वास्तुविद्, एस्ट्रोलोजर  
sanjay.garg2008@gmail.com Whats-app 8791820546  (All rights reserved.)
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Giloy Benefits: गिलोय कौन-कौन सी बीमारी ठीक करता है?

गिलोय एक ही ऐसी बेल है, जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा कह सकते हैं। इसलिए इसे संस्कृत में अमृता नाम दिया गया है। कहते हैं कि देवताओं और दानवों के बीच समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत निकला और इस अमृत की बूंदे जहां-जहां छलकी, वहां-वहां गिलोय की उत्पत्ति हुई। आइये जानते हैं-


गिलोय कौन-कौन सी बीमारी ठीक करता है?


गिलोय बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता-

गिलोय एक ऐसी बेल है, जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर उसे बीमारियों से दूर रखती है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीआक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं।

ठीक करती है बुखार-

अगर किसी को बार-बार बुखार आता है तो उसे गिलोय का सेवन करना चाहिए। गिलोय हर तरह के बुखार से लड़ने में मदद करती है, इसलिए डेंगू के मरीजों को भी गिलोय के सेवन की सलाह दी जाती है। डेंगू के अलावा मलेरिया, स्वाइन फ्लू से आने वाले बुखार से भी गिलोय छुटकारा दिलाती है।

मधुमेह के रोगियों के लिए- 

गिलोय एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट है यानि यह खून में शर्करा की मात्रा को कम करती है। इसलिए इसके सेवन से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है।

कम करती है स्ट्रेस-

गिलोय एंडप्टोजन की तरह काम करती है और मानसिक तनाव और चिंता (एंजायटी) के स्तर को कम करती है, इसकी मदद से याददाश्त बेहतर होती है।

बढ़ाती है आंखों की रोशनी-

गिलोय को पलकों के ऊपर लगाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके लिए आपको गिलोय पाउडर को पानी में गर्म करना होगा। जब पानी अच्छी तरह से ठंडा हो जाए तो इसे पलकों के ऊपर लगाएं।

अस्थमा में भी फायेदमंद-

मौसम के परिवर्तन पर खासकर सर्दियों में अस्थमा के मरीजों को काफी परेशानी होती है। ऐसे में अस्थमा के मरीजोें को नियमित रूप से गिलोय की मोटी डंडी चबानी चाहिए या उसका जूस पीना चाहिए, इससे काफी आराम मिलेगा।

गठिया में मिलेगा आराम- 

गठिया यानी अर्थराइटिस में न केवल जोड़ों में दर्द होता है, बल्कि चलने-फिरने में भी परेशानी होती है। गिलोय में एंटी आर्थराइटिक गुण होते हैं, जिसकी वजय से यह जोड़ों के दर्द सहित इसके कई लक्षणों में फायदा पहुंचाती है।

एनीमिया में गिलोय लाभकारी-

भारतीय महिलाएं अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी से पीड़ित रहती है। इससे उन्हें हर वक्त थकान और कमजोरी महसूस होती है। गिलोय के सेवन से शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है और एनीमिया से छुटकारा मिलता है।

बाहर निकलेगा कान का मैल-

कान का जिद्दी मैल बाहर नहीं आ रहा है तो थोड़ी सी गिलोय को पानी में पीस कर उबाल लें। ठंडा करके छान के कुछ बूंदे कान में डालें। एक दो दिन में सारा मैल अपने आप बाहर आ जाएगा।

कम होगी पेट की चर्बी-

गिलोय शरीर के उपापचय को ठीक करती है, सूजन कम करती है और पाचन शक्ति बढ़ाती है। ऐसा होने से पेट के आसपास चर्बी जमा नहीं हो पाती और आपका वजन कम होता है।


यौनेच्छा बढ़ाती है गिलोय- 

आप बगैर किसी दवा के यौनेच्छा बढ़ाना चाहते हैं तो गिलोय का सेवन कर सकते हैं। गिलोय में यौनेच्छा बढ़ाने का गुण पाए जाते हैं, जिससे यौन संबंध बेहतर होते हैं।

खूबसूरती बढ़ाती है गिलोय- 

गिलोय न केवल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है, बल्कि यह त्वचा और बालों पर भी चमत्कारी रूप से असर करती है।

जवान रखती है गिलोय-

गिलोय में एंटी एजिंग गुण होते हैं, जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे, मुंहासे, बारीक लकीरें, और झुर्रियां दूर की जा सकती हैं। इसके सेवन से आप ऐसी निखरी और दमकती त्वचा पा सकते हैं, जिसकी कामना हर किसी को होती है। अगर आप इसे त्वचा पर लगाते हैं घाव बहुत जल्दी भरते हैं। त्वचा पर लगाने के लिए गिलोय की पत्तियों को पीस कर पेस्ट बनाएं। अब एक बरतन में थोड़ा नीम या अरंडी का तेल उबालें। गर्म तेल में पत्तियों का पेस्ट मिलाएं। ठंडा करके घाव पर लगाएं। इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट आती है।

गिलोय का प्रयोग ऐसे करें-


गिलोय जूस-

गिलोय की डंडियों को छील लें और इसमें पानी मिलाकर मिक्सी में अच्छी तरह पीस लें। छान कर सुबह-सुबह खाली पेट पीएं। अलग-अलग ब्रांड का गिलोय जूस भी बाजार में उपलब्ध है।
काढ़ा-चार इंच लंबी गिलोय की डंडी को छोटा-छोटा काट लें, इन्हें कूट कर एक कप पानी में उबाल लें। पानी आधा होने पर इसे छान कर पीएं, अधिक फायदे के लिए आप इसमें लौंग, अदरक, तुलसी भी डाल सकते हैं।

पाउडर-

यूं तो गिलोय पाउडर बाजार में उपलब्ध है। आप इसे घर पर भी बना सकते हैं। इसके लिए गिलोय की डंडियों को धूप में अच्छी तरह से सूखा लें। सूख जाने पर मिक्सी में पीस कर पाउडर बनाकर रख लें।
गिलोय वटी-बाजार में गिलोय की गोलियां यानी टेबलेट्स भी आती हैं। अगर आपके घर पर या आसपास ताजा गिलोय उपलब्ध नहीं है तो आप इसका सेवन करें।

इसे अरंडी यानी कैस्टर के तेल के साथ गिलोय मिलाकर लगाने से गाउट की समस्या में आराम मिलता है। इसे अदरक के साथ मिलाकर लेने से रूमेटाइड आर्थराइटिस की समस्या से लड़ा जा सकता है। चीनी के साथ लेने से त्वचा और लिवर संबंधी बीमारियां दूर होती हैं। कब्ज होने पर गिलोय में गुड़ मिलाकर खायें। 

साइड इफेक्टस का ध्यान रखें-

वैसे तो गिलोय को नियमित लेने से कोई गंभीर समस्या नहीं है लेकिन चूंकि यह खून में शर्करा की मात्रा कम करती है। इसलिए इस बात पर नजर रखें कि शुगर जरूरत से ज्यादा कम न हो जाएं। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय के सेवन से बचना चाहिए। पांच साल के बच्चों को गिलोय का प्रयोग ना करने दें।

-अतिथि लेखक: डा0 उमेश कुमार अग्रवाल

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Methi Dana Benefits: मेथी दाना खाने के 20 फायदे!

Methi Dana Benefits: मेथी दाना खाने के 20 फायदे!
हमारी रसोई में प्रयोग होने वाले अनेक मसाले हमें स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हमारी रसोई हमारे घर में स्थित एक छोटा मैडिकल स्टोर है, जिसमें हमें अनेक बीमारियों में काम आने वाली दवाईयां मुफ्त में उपलब्ध रहती हैं, ये बिना साइड इफेक्ट की आयुर्वेदिक दवाईयां हैं। आइये ऐसे ही अनेक दवाईयों में से हम आज बात करते हैं मेथी के दाने की, घर की रसोई में आसानी से मिल जाने वाली मेथी में इतने सारे गुण हैं कि आप सोच भी नहीं सकते है। यह सिर्फ एक मसाला नहीं है बल्कि एक ऐसी दवा है जिसमें अनगिनत बीमारियों को खत्म करने का दम है। मेथी दाने में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, विटामिन्स व एण्टीक्सीडेंटस अच्छी मात्रा में मिलते हैं। आइए, आज हम आपको मेथी के कुछ प्रभावकारी व असरकारी प्रयोगों के बारे में बताते हैं।

Methi Dana Benefits: मेथी दाना खाने के 20 फायदे!


1-यदि आप वजन कम करने का सोच रहे हैं तो भिगोई हुई मेथी के साथ उसका पानी भी पियें तो आपको जबरदस्ती की भूख नहीं लगेगी। रोज एक महीने तक मेथी का पानी पीने से वजन कम करने में मदद मिलती है।

2-मेथी का पानी अपने एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण के कारण गठिया से होने वाले दर्द में राहत देता है।

3-बहुत सारी स्टडीज से पता चला है कि मेथी खाने से या उसका पानी पीने से शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होकर अच्छे कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ता है।

4-शादियों में मिलने वाली मेथी की चटनी आप को याद होगी क्योंकि मेथी दाने में फाइबर की उच्च मात्रा होती है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है। यह पेट को गैस, कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। 

5-मेथी में galactomannan नामक फाइबर होता है जो कि एक बहुत जरुरी फाइबर कम्पाउंड है। इससे रक्त में शक्कर बड़ी ही धीमी गति से घुलती है। इस कारण से मेथी का उपयोग करने से मधुमेह नहीं होता।

6-मेथी कैंसर की बीमारी को भी दूर रखती है, क्योंकि मेथी में ढेर सारा फाइबर होता है जो कि शरीर से विषैले तत्वों को निकाल फेंकता है और पेट के कैंसर से बचाता है साथ ही लिवर की सेहत को भी दुरूस्त रखता है।

7-मेथी दाना हृदय के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है, मेथी दाना ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है और दिल को चुस्त-दुरूस्त रखने के लिए आवश्यक तत्व प्रदान करता है।
  
8-मेथी का पानी किडनी के स्टोन को भी निकाल देता है, यदि आप भिगोई हुई मेथी का पानी एक माह तक सुबह खाली पेट लेगें तो यह आपकी किडनी से स्टोन को बाहर कर देता है।

9-मेथी दाना बालों की जड़ों को भी मजबूत करता है, यह डैंड्रफ को कम करके बालों को घना और चमकदार बनाता है, इसे बालों में लगाने से बालों का गिरना भी कम होता है।
  
10-मेथी में कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन आदि खनिज पाए जाते हैं, जो हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करते हैं। अतः मेथी के दाने खाने से हड्डियां और मांसपेशियां सबल होती हैं।

11-मेथी दाने में एंटी क्सीडेंटस गुण होने के कारण यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि करता है। इसी कारण मेथी का सेवन करने से जल्दी से कोई बिमारी हमला नहीं करती।

12-मेथी दाने का प्रयोग करने से अनिद्रा की समस्या से भी छुटकारा मिल सकता है, यह मन को शांत रखता है और अच्छी नींद लाने में हमारी मदद करता है।

13-मेथी दाना फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को कम कर देता है, जिससे उम्र बढ़ने की गति धीमी हो जाती है, जिससे बुढ़ापा हमारे चेहरे पर देर से नजर आता है।

14-रात में भिगोकर रखे गये मेथी के दाने का पानी मूत्र संक्रमण और पेशाब में जलन जैसी समस्याओं में फायदा करता है। 

15-मेथी दाने का प्रयोग जुकाम, खांसी अस्थमा आदि समस्याओं में भी हमारी सहायता करता है।

16-मेथी में उपलब्ध पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे दिन भर में हम अपने आप को ऊर्जान्वित महसूस करते हैं। 

17-गर्भावस्था के दौरान यह आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करके, गर्भवती महिला व उसके शिशु को स्वस्थ रखने में सहायता करता है।

18-यदि शरीर पर कहीं जल जाये या कोई चोट लग जाये तो मेथी दाने को पीस कर, उसका पेस्ट लगाने से जल्दी आराम मिलता है।

19-मेथी दाने का सेवन पाइल्स की समस्या में भी आराम देता है, जिससे मल त्याग करने में आसानी होती है और पाइल्स की समस्या समाप्त होने लगती है।

20-मेथी दाने के सेवन करने से थायरॉयड ग्रंथि अच्छे से कार्य करती है, जिससे थायराॅयड की समस्या में राहत मिलती है।

मेथी दाने के उपयोग की विधि-

एक पानी से भरा गिलास ले कर उसमें दो चम्मच मेथी दाना डाल कर रातभर के लिये भिगो दें। सुबह इस पानी को छानें और खाली पेट पी जाएं। रातभर मेथी भिगोने से पानी में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी ऑक्सीडेंट गुण बढ जाते हैं। इससे ऊपर बतायी गयी शरीर की अनेक बीमारियां चुटकियों में समाप्त हो जाती हैं। तेल में मिलाकर मेथी दाने का उपयोग बालों के लिए किया जा सकता है। इसी प्रकार मेथी दाने को पीसकर पाउडर बनाएं और दूध या गर्म पानी से भी सेवन कर सकते हैं।

मेथीदाना एक प्राकृतिक औषधि है, इससे हम स्वास्थ्य संबंधी अनगिनत लाभ प्राप्त कर सकते हैं, परन्तु इसका प्रयोग सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों व बच्चों को इसका सेवन कराने से पहले एक बार किसी अनुभवी वैद्य या डाक्टर की सलाह ले लेनी चाहिए।

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अपना मोटापा कम करने के लिए हम क्या-क्या नहीं करते, बड़े-बड़े डाक्टरों के पास जाते हैं, तरह-तरह की दवाईयां खाते हैं, अनेक प्रकार से खाने में परहेज भी करते हैं परन्तु जब भी यह कम होने का नाम ही नहीं लेता। इस आलेख में, मैं मोटापा घटाने की छोटी-छोटी टिप्स लेकर आया हूं, जिन्हें यदि आप अपने दैनिक जीवन में सम्मिलित कर लेते हैं तो बहुत जल्द आपको इनका प्रभाव दिखायी देने लगेगा, ये सभी टिप्स हेल्थ एक्सपर्टस द्वारा समय-समय पर बतायी जाती रही हैं।

Weight loss tips:मोटापा घटाने की छोटी-छोटी टिप्स-


1-सुबह उठने के साथ ही एक गिलास दूध टोन्ड या गाय का पीने की आदत बनायें। सुबह का यह दूध आपको हेवी नाश्ता लेने से बचा सकता है, जिससे आप अतिरिक्त कैलोरी लेने से बच जाते हैं।

2-खाने की प्लेट आने पर पहले अच्छे से उसकी महक लें, इससे आप जल्दी-जल्दी खाने से व अधिक खाने से बच जाते हैं, और अपने बढ़ते फैट को नियंत्रित कर सकते हैं।

3-नृत्य करने की हाॅबी रखें, इससे आप अनेक धार्मिक, सामाजिक, व वैवाहिक समारोह आदि में सबके चहेते तो बनते ही हैं, साथ ही अपनी अतिरिक्त कैलोरीज को भी नृत्य करके बर्न कर सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ का कहना है कि पांच मिनट के डांस से हमारी 30 कैलोरी बर्न हो जाती है।

4-जब भी आप को भूख लगे तो खाना खाने से पहले ब्रश करने की आदत बनाये, क्योंकि पेस्ट के स्वाद से आपकी मीठा खाने की इच्छा कम या समाप्त हो जाती है।

5-परिवार के साथ बैठकर इकट्ठा खाना खाना प्रेम भाव तो बढ़ा सकता है, परन्तु साथ ही आपके ज्यादा खाने से पेट भी बढ़ा देता है, इसलिए यदि आप अपने वेट का लेकर परेशान हैं तो अकेला खाना खाने की आदत डाल लें, इससे आपकी ज्यादा खाने की इच्छा नहीं होगी, आप अपनी वास्तविक भूख के अनुसार ही खाना खायेंगे।

6-यदि आपको रात में अक्सर भूख लगने लगती है और कुछ खाने की इच्छा होती है, साथ ही आप अपने बढ़ते वेट से भी परेशान हैं, तो रात में अपने सिरहाने पानी की बोतल व फल रख कर सोया करें ताकि भूख लगने पर आप उन्हें ही खायें।

7-जूस का पतला करके पीने की आदत डाल लें क्योंकि जूस में भी काफी कैलोरीज होती है, एक गिलास जूस में एक गिलास पानी मिलाकर ही उसे पीये।

8-अपने ऑफिस जाते समय अपने बैग में एक लीटर पानी की बोतल रखकर चलें, इससे आपको दो लाभ मिलेंगे पहला ये कि आप ज्यादा पानी पियेंगे, जो आपके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होगा, दूसरा हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि आप यदि एक लीटर पानी लेकर 20 मिनट पैदल चलते हैं तो आप अपनी 6 कैलोरी बर्न कर लेते हैं।

9-हेल्थ एक्सपर्टस का मानना है कि यदि गर्मी का समय है तो पानी में बर्फ डालकर पीये, ऐसा करने से शरीर को उस पानी को सामान्य बनाने में 30 कैलोरी बर्न करनी पड़ती है।

10-यदि आप ऑफिस आदि में काॅफी पीते हैं तो ब्लैक काॅफी पीये, क्योंकि इसके एक कप में केवल 10 कैलोरी होते हैं, और फैट बिल्कुल नहीं होता, जबकि एक आम काॅफी में हम एक कप में ही 11 ग्राम वसा का भी सेवन कर लेते हैं।

11-खाना खाते समय हल्का सुगम संगीत सुनने की आदत डालें, इससे आप धीरे-धीरे चबा कर खाना खाएंगे और अधिक खाने से बचे रहेंगे। जबकि तेज व लाउड म्यूजिक सुनते हुए हम ज्यादा खाना खाते हैं और हमारे पेट बढ़ता जाता है।

12-हमें अपना खाने का तरीका बदलना चाहिए, खाने से पहले फल, सलाद, सब्जी खाने की आदत डाले, पूरी, कचौरी, रोटी, बाद में खाने की आदत डाले।

13-घर में खाने का सामान ऐसी जगह पर रखें जहां पर आपकी नजर ना पड़े, इससे आप चलते-फिरते खाने की आदत से बचेंगे और अपने मोटापे पर काबू पा सकेंगे।

14-पैदल चलने की आदत डाले, एक-आधा किलोमीटर यदि आपको कुछ लेने या काम से जाना है तो प्रयास करें कि पैदल ही जा कर वह काम करें।

15-यदि आपके घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं तो उन्हें अपने कन्धें व कमर की सवारी कराये, इससे बच्चे तो आपसे खुश रहेंगे ही साथ ही आप अपनी अतिरिक्त कैलोरी अनायास ही बर्न कर देगें।

16-यदि आप सुबह उठने के बाद दूध नहीं पीना चाहते, तो एक-दो गिलास गर्म पानी पीने की आदत बनायें, गर्म पानी में नींबू मिलाकर सेवन करना और ज्यादा लाभकारी हो सकता है।

17-योगासन, व्यायाम को अपने दैनिक जीवन का अंग बना लें, ज्यादा कुछ नहीं कर सकते तो प्राणायाम या हल्की एक्सरसाइज तो कर ही सकते हैं। इससे आपके बढ़ते वेट पर लगाम कसती है।

18-हर घंटे कुछ मिनट खड़े होकर काम करें, पैदल चलें इससे आपका शरीर गतिमान रहता है, जो मेटाबोलिज्म को बढ़ावा देता है।

19-रात्रि का खाना यानि डिनर को स्किप करने का प्रयास करें, भूख लगे तो फल खाये। बिस्कुट चिप्स खाने की बजाय नट्स, दही जैसे हेल्दी स्नैक्स खा सकते हैं।

20-सात से आठ घंटे की नींद अवश्य लें, अच्छी नींद भी वेट घटाने में सहायक होती है, क्योंकि यह शरीर के हार्मोंस को बैलेंस करती हैं।

21-मानसिक तनाव भी वेट बढ़ा सकता है। अतः यदि आप वेट की कारण मानसिक तनाव में रहते हैं तो ध्यान, योग या प्राणायाम के द्वारा इसे कम करने का प्रयास करें।

22-प्रोसेस्ड और पैकिंग वाले फूड से बचे, क्योंकि इनमें शक्कर, वसा ज्यादा होती है, जो कि हमारे वेट का बढ़ाती है।

23-उपरोक्त बतायी गयी टिप्स को लेकर छोटे-छोटे टारगेटस बनाये, जब वे पूरा होने लगे तो बड़े टारगेटस बनाये इससे आप धीरे-धीरे अपने फेटी शरीर को अलविदा कह देंगे।

तो साथियों ये थी ‘‘मोटापा घटाने की छोटी-छोटी टिप्स’’ इन टिप्स पर आप दो महीने चल कर देखें, फिर मुझे बतायें, कि इनसे आपको फायदा हुआ या नहीं।

प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग, योगाचार्य, वास्तुविद्, एस्ट्रोलोजर  
sanjay.garg2008@gmail.com  मो0 6396661036 / 8791820546 (Wh.)  (All rights reserved.)
स्वास्थ्य/फिटनेस पर और आलेख-

Migraine Treatment : माइग्रेन का इलाज प्राणायाम से करें!

Migraine Treatment : माइग्रेन का इलाज प्राणायाम से करें!

वास्तव में सिर दर्द की समस्या आजकल एक बड़ा सर दर्द बन गयी है, क्योंकि जहां देखों सिर दर्द के मरीज सिर पकड़े दिखायी देते हैं। कम नींद के कारण सिरदर्द, ज्यादा फोन देखने से सिर दर्द, देर रात जागने से सिर दर्द, दिन में भूखे रह गये तो सिर दर्द आदि से सिर दर्द। यदि आप भी सिर दर्द या माइग्रेन की समस्या से परेशान हैं और आप इससे बचने के लिए एलोपैथिक दवाओं का सेवन करते हैं, तो आज मैं आपके लिए इस सिर दर्द को नियंत्रित करने के लिए सरल योग के प्राणायाम बता रहा हूं, जिनका नियमित अभ्यास करने से आप इस समस्या से बच सकते हैं। 

कौन सा सिर दर्द माइग्रेन होता है-

सबसे पहले हमें यह पता होना चाहिए कि क्या हमारे सिर में सामान्य दर्द हो रहा है या फिर माइग्रेन का दर्द हो रहा है। माइग्रेन के दर्द के लक्षण निम्न प्रकार हैं-

1-यदि आपके सिर में दर्द लंबे समय तक रहता है।

2-यदि आपके सिर के आसपास के हिस्से में दर्द, दिल की धड़कनों के साथ-साथ एक लय या रिदम में होता है, जैसे आपके दिल की धड़कन जैसे-जैसे होती है, वैसे-वैसे ही आपके सिर या कनपटी में भी लुपलुपाहट सी होती है, तो यह माइग्रेन का दर्द हो सकता है।

3-अनेक लोगों को यह दर्द इतना भयंकर होता है, कि उन्हे लगता है हमारा सिर ही दर्द से फट जायेगा।

4-ज्यादा खतरनाक स्थिति में, बेहोशी का छा जाना या फिर आंखों के सामने अंधेरा छा जाना भी हो सकता है।

माइग्रेन दर्द के कारण-

1-यदि आप ज्यादा मात्रा में शराब, काॅफी, साॅफ्ट ड्रिक्स और चाय का सेवन करते हैं, तो इससे माइग्रेन का दर्द हो सकता है।

2-यदि आपके पेट में कब्ज और गैस की शिकायत लगातार रहती है।

3-सामान्य सर्दी-जुकाम और खांसी जिसके कारण नाक का रास्ता पूरी तरह से बन्द हो जाता है।

4-यदि आपका ब्लड प्रेशर हाई रहता है या फिर आप तनाव में रहते हैं तो आपको माइग्रेन की समस्या हो सकती है।

Migraine Treatment : माइग्रेन का इलाज प्राणायाम से करें!


साथियों! यदि आप पहली बार प्राणायाम कर रहे हैं तो सबसे पहले नाड़ी शोधन प्राणायाम का अभ्यास प्रारम्भ करें। पन्द्रह दिनों तक इस प्राणायाम के अभ्यास के बाद भ्रामरी प्राणायाम करें, और इसके बाद कपाल भाति प्राणायाम प्रारम्भ करें। एक-दो माह तक उपरोक्त तीनों प्राणायाम करने के बाद भस्त्रिका प्राणायाम प्रारम्भ करें। इस क्रम का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए, अन्यथा नुकसान भी हो सकता है।

नाड़ी शोधन प्राणायाम-

नाड़ी शोधन प्राणायाम के बारे में मैं विस्तार से पहले आलेख ‘‘प्राणायाम करने की सही व वैज्ञानिक विधि’’ में बता चुका हूं, आप इसी लिंक को क्लिक करके उस आलेख पर चले जायेगे और उसे वहां पर पढ़ सकते हैं।

ब्राह्मरी प्राणायाम-

सुखासन या पद्मासन आदि किसी आसन में बैठ जायें, गर्दन और कमर को सीधा रखें और सामान्य सांस लें, अपने दोनों कानों को अंगूठों से बंद कर लें, दोनों हाथों की अपनी पहली उंगली माथे पर बीचों बीच रखें, बाकी तीन अंगुलियां अपनी आंखों पर रखें, आंखें बन्द करके पूरी तरह से सांस बाहर निकाल दें, अब धीरे-धीरे श्वास को अंदर भरें, अपने फेफड़ों में पूरी तरह से सांस को भर लें। अब सांस बाहर निकालते समय भ्रमर जैसी ध्वनि करें और इस ध्वनि पर ध्यान केंद्रित करें। 

इस प्राणायाम को करने से मानसिक तनाव कम होता है, सिर के दर्द में आराम मिलता है, नींद न आना, नर्वस सिस्टम की कमजोरी आदि में भी आराम मिलता है।

कपालभाती प्राणायाम-

किसी दरी या कम्बल आदि पर बैठ जाये, कमर को बिल्कुल सीधा रखें, सुखासन या व्रजासन आदि किसी भी आसन में बैठ सकते हैं, दोनों हाथों से अपने घुटनों को मजबूती से पकड़ लें। कुछ देर मन को शांत करें, चार-पांच बार गहरी-गहरी सांस लें। आंखों को बन्द कर लें, अपने पेट को अंदर की ओर खींचते हुए जोर से नाक से सांस बाहर निकालें, सांस लेने का प्रयास न करें, सांस अपने आप पेट ले लेगा। ऐसा 25 से 30 बार तक करने का प्रयास करें। जब आप थकान महसूस करने लगे, अपने शरीर का स्थिर रखते हुए अपनी सांस का पूरी तरह से बाहर निकाल दें और आराम की मुद्रा में आ जाये। इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 80-से-100 बार तक ले जा सकते हैं। परन्तु अभ्यस बढ़ाने में जल्दी न करें, धीरे-धीरे अभ्यास को बढ़ायें।

यह क्रिया सिर, नाक, और फेफड़ों को डिटाॅक्स करने के लिए एक सुन्दर व असरकारी प्रक्रिया है। इससे नाक के रोग तो दूर होते हैं साथ ही सिर का दर्द ठीक होने लगता है, इसे आप अपने दैनिक योग में सम्मिलित करके काफी हद तक स्वस्थ रह सकते हैं।

भस्त्रिका प्राणायाम-

उपरोक्त प्रकार से ही बैठना है, सारे कार्य उपरोक्त प्रकार से ही करने हैं केवल इस प्राणायाम में सांस को लेना भी तेजी से है और छोड़ना भी तेजी से है। बाकी सभी उपरोक्त प्रकार से ही संपन्न होगा। प्रारम्भ में इस प्राणायाम को भी 25-30 बार करने का प्रयास करें या फिर अपनी क्षमतानुसार करें, आवश्यक नहीं है कि 25-30 बार, पहली बार में ही संपन्न किया जाये।

भस्त्रिका प्राणायाम से शरीर को अधिकतम प्राणवायु प्राप्त होती है, नाक के विकार व सिर के दर्द में आराम मिलता है, साइनस की समस्या में राहत मिलती है। रक्त की शुद्धि होती है, वात, पित्त, और कफ संतुलित होते हैं, कब्ज दूर होती है, रक्त की शुद्धि होने से चेहरे पर एक चमक दिखायी देने लगती है। बहुत से योग गुरूओं का यहां तक मानना है कि यदि शरीर में किसी भी स्थान पर कोई गांठ इत्यादि हो, तो वह इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है। इस प्रकार आप उपरोक्त प्राणायामों के द्वारा अपना माइग्रेन का इलाज कर सकते हैं।

कोई जिज्ञासा हो तो कमैंटस करें, अगले आलेख तक के लिए मुझे आज्ञा दीजिए! नमस्कार जयहिन्द।

प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग, योगाचार्य, वास्तुविद्, एस्ट्रोलोजर  
sanjay.garg2008@gmail.com  मो0 6396661036 / 8791820546 (Wh.)   (All rights reserved.)

स्वास्थ्य/फिटनेस पर और आलेख-

हाई ब्लड प्रेशर योगासन से कंट्रोल करें!

हाई ब्लड प्रेशर योगासन से कंट्रोल करें!

पश्चिमोत्तान आसन

प्रिय साथियों! इस भाग-दौड़ भरी जिन्दगी में हम किस बात को लेकर तनाव में आ जाते हैं इसका पता ही नहीं चलता, और यह तनाव अचानक ही हमें ब्लड प्रेशर का मरीज बना जाता है, शायद इसी कारण इसे ‘‘सायलेंट किलर’’ भी कहा जाता है। डाक्टर को दिखाने पर मिली दवाईयां हमें फोरन राहत तो दे देती हैं, परन्तु हम धीरे-धीरे इन दवाईयों के आदि हो जाता हैं और इन दवाओं का साइड इफैक्ट अलग से शुरू हो जाता है। अतः हमें ब्लड प्रेशर से बचने के लिए योग का आश्रय लेना चाहिए, जो बिना साइड इफेक्ट के इस रोग को काबू में रखता है।

हाई ब्लड प्रेशर योगासन से कंट्रोल करें!


साथियों! हम प्राणायाम या योगासन से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल कर सकते हैं, परन्तु हमें योगासन के साथ प्राणायाम का अभ्यास भी करना चाहिए, क्योंकि प्राणायाम ही हमारे शरीर की सारी नसों में ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करता है तथा ब्लाॅक नसों को खोलता है और हमें हार्ट अटैक के संभावित खतरों से बचाता है। आइये पहले योगासनों को देखते हैं-

पश्चिमोत्तान आसन-

हाई बलड प्रेशर से हमारी धमनियां सिकुड़ने लगती हैं, जिससे हमें हार्ट अटैक या स्टोक का खतरा बढ़ जाता है, यह आसन हमारी धवनियों की सिकुड़न का दूर करके इन्हें लचीला बनाता है, जिससे ब्लड प्रेशर का खतरा कम होता है।

विधि-

जमीन पर चादर आदि बिछा कर बैठ जाइये, दोनों पैर सामने की ओर फैलाइये, दोनों पैरों को आपस में मिलाइयें, इसके बाद दोनों हाथ और एक सीध में ऊपर की ओर उठाये, हथेलियां सामने की ओर रहे, अब धीरे-धीरे दोनों पैरों के अंगूठों को पकड़ने का प्रयास कीजिए, उसके बाद सिर को घुटनों पर ले जाइये।

प्रारम्भ में आप अंगूठे व सिर को आपस में नहीं मिला पायेंगे, जितना कर सकें उतना करें, यदि आपके हाथ पैंरों को ही छू पाते हैं तो केवल उन्हें हीं छूयें, धीरे-धीरे यह आसन होना प्रारम्भ हो जायेगा। इस आसन को करने में जल्दबाजी न करें। 

हाई ब्लड प्रेशर योगासन से कंट्रोल करें!

अधोमुख श्वान आसन

अधोमुख श्वान आसन-

यह आसन हमारी पीठ, कमर, कंधों की थकान व तनाव को दूर करता है। क्योंकि जितने हम तनाव व थकान से दूर होते हैं, ब्लड प्रेशर का खतरा उतना ही कम होता है। अतः इस आसन को भी हमें अपने दैनिक योग में सम्मिलित करना चाहिए।

विधि-

पैंरों के बीच में थोड़ा सा फासला रखकर खड़े हो जायें, धीरे-धीरे सांस को अंदर लेते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर उठायें, अब धीरे-धीरे सांस को छोड़ते हुए हाथों को झुकाकर, अंगेजी अक्षर ‘वी’ के समान आकार बनाये और फर्श पर अपने दोनों हाथों को छुएं। (चित्रानुसार) अब सांस सामान्य रूप से लेते रहे। प्रारम्भ मे इसे कुछ सैकेण्ड ही करें।

हाई ब्लड प्रेशर योगासन से कंट्रोल करें!

सेतुबन्ध आसन

सेतुबन्ध आसन-

ये आसन हमारे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करता है, ब्लड सर्कुलेशन ठीक होने से हम खुद को तरोताजा महसूस करते हैं, जिससे तनाव हमारे पास नहीं भटकता और जब तनाव नहीं होगा तो ब्लड प्रेशर भी नहीं होगा।

विधि-

अपनी पीठ के बल लेट जाइयें और अपने दोनों हाथों को बगल में रखें, अब धीरे-धीरे अपने पैरों को घुटनों से मोड़कर अपने हिप्स के नजदीक ले जायें, अपने हिप्स को फर्श से ऊपर जितना हो सके ले जायें, कुछ देर इस स्थिति में सांस को रोके रखे, और फिर धीरे-धीरे सांसों को छोड़ते हुए पहली वाली स्थिति में आ जायें। (चित्रानुसार) इस आसन को दो से पांच बार दोहराऐ।

हाई ब्लड प्रेशर योगासन से कंट्रोल करें!

बाला आसन

बाला आसन-

साथियों! हाई ब्लड प्रेशर में इंसान खुद को चिड़चिड़ा और थका हुआ महसूस करता है, ऐसी स्थिति में बाला आसन हमारे दिमाग में बेवजह की थकानों व चिन्ताओं को दूर करता है, जिससे हम खुद को तरोताजा व तनावरहित महसूस करते हैं।

विधि-

सबसे पहले घुटनों के बल बैठ जाये, घुटने के बीच में थोड़ा सा अंतर कर लें, अब कूल्हों को खोलते हुए कमर को आगे की ओर मोड़े, अपनी सांसों को छोड़ते हुए अपने माथे को जमीन पर लगाये, अपने दोनों हाथों को भी जमीन पर आगे की ओर रखें, धड़ को जांघों पर दबाने का प्रयास करें।

उपरोक्त प्रत्येक आसन को करने के बाद तीन से चार मिनट तक शवासन करें। इसे आपका शरीर रिलेक्स हो जायेगा, शवासन के पश्चात ही दूसरा आसन करें।

हाई ब्लड प्रेशर योगासन से कंट्रोल करें!

शवासन

शवासन-

इस आसन का रोज पन्द्रह मिनट अभ्यास करने से दिमाग शान्त होता है और आपकी सारी चिन्ताएं समाप्त हो जाती हैं ये आसन शरीर-मन और आत्मा को नई ताजगी प्रदान करता है जिससे ब्लड प्रेशर की समस्याएं नहीं होती। यदि आप उपरोक्त आसनों को नहीं कर पा रहे हैं तो केवल शवासन ही आपकी ब्लड प्रेशर की समस्या को काफी हद तक ठीक करने में आपकी सहायता करता है।

प्राणायाम-

दिल का सांस और रक्त संचार से गहरा संबंध है। प्राणायाम सांस की गति और रक्त संचार को सामान्य रखता है। अतः हाई ब्लड प्रेशर वालों को नाड़़ी शोधन व उज्ज्यनी प्राणायाम जरूर करना चाहिए। ये दोनों प्राणायाम आपके हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को कंट्रोल रखते हैं। यदि आप के शरीर में आसन करने की सामथ्र्य नहीं है, तो आप नियमित उपरोक्त दोनों प्राणायाम का अभ्यास करके भी अपने ब्लड प्रेशर को सामान्य कर सकते हैं।

साथियों यदि आप इन आसनों व प्राणायाम का नियमित अभ्यास करेंगे तो आपकी ब्लड प्रेशर की सारी दवाईयां धीरे-धीरे छूट जायेगी और आप सामान्य व स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

धन्यवाद, जय हिन्द! आपके बहुमूल्य कमैंटस की प्रतीक्षा में!!!
 
प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग, योगाचार्य, वास्तुविद्, एस्ट्रोलोजर  
sanjay.garg2008@gmail.com  मो0 6396661036 / 8791820546 (Wh.) 
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