वास्तु-टिप्स-मकान खरीदते समय ध्यान रखें ये बातें, ताकि बाद में ना पछतायेँ  !

कहावत है जिन्दगी में घर house एक बार ही बनाया जाता है, उस बनाने के लिए इन्सान दिन-रात जुटा रहता है। वर्तमान में जमीन की कमी और अधिक लोगों को आवास उपलब्ध कराने के लिए फ्लैट का चलन भी बढ गया है। शहरों में मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बन रही हैं। आवास में सुख-शांति और समृद्धि के लिए वास्तु के नियमों का पालन करना बहुत जरुरी है। अक्सर हम जल्द बाजी में खरीदे गये या बनाये गये घर में वास्तु की अनदेखी कर देते हैं, ना हम किसी वास्तुविद् से सलाह लेना उचित समझते हैं, क्योंकि हमने बहुत सी किताबें वास्तु की पढ़ी हुई होती हैं? यदि कोई किताब पढ़ कर ही वास्तुविद् बनने का प्रयास करता है तो वो एक बड़ी भूल कर देता है, क्योंकि पढने और अनुभव करने में बहुत अंतर होता है। समस्या जब होती है जब घर में रोग, अशांति, चितांयें धीरे-धीरे प्रवेश करती हैं, जब तक हम जागते हैं, तब तक बहुत देर हो गयी होती है, अतः यदि आप भी फ्लैट लेने या मकान बनाने का विचार कर रहे हैं तो वास्तु के इन नियमों का पालन करने के साथ-साथ किसी वास्तुविद् से सलाह जरूर ले लेनी चाहिए, आइये अब जानते हैं फ्लैट खरीदते वक्त किन बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए-

-भूमि-जमीन के बारे में पूरी जानकारी अवश्य लें। जमीन कैसी है, भवन निर्माण से पहले भूमि किस काम के लिए प्रयुक्त होती थी, इसका पता करें। बिल्डिंग बनाने से पहले जमीन पर कोई क्रब या कब्रिस्तान तो नहीं था। वास्तु नियमों के अनुसार बिल्डिंग के नीचे दबी कोई अच्छी या बुरी वस्तुएं सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करती हैं। हालांकि तीन मंजिल से ऊपर फ्लैट पर इस तरह के दोष का असर नहीं होता। यानी तीन मंजिल से ऊपर का फ्लैट है तो फिर बिल्डिंग की जमीन की पूर्व स्थिति ज्यादा मायने नहीं रखती।

-जिस घर को ले रहें हैं उस घर के सामने कोई पेड़, मंदिर या खम्बा आदि न हो जिसकी परछाई घर पर पड़े, इससे आपकी सफलता में बाधा उत्पन्न हो सकती है|

-घर का मुख्य द्वार आपके घर में सुख-समृद्धि, तरक्की, खुशहाली व सकारात्मकता लेकर आता है। जमीन खरीदते समय भी इस बात का प्रयास करें कि वह दक्षिणमुखी न हो। यदि मजबूरीवश लेना पड़े तो वास्तुविद से सलाह लेकर उसका दोष निवारण करा लेना चाहिए| 
 
-अब रसोई (किचन के वास्तु के लिए ये आलेख पढ़ें) को देखते हैं, घर में रसोई सबसे महत्वपूर्ण है। यदि इसे घर का गृहमंत्रालय कहा जाये तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। फ्लैट में रसोई की स्थिति को अवश्य जांच लें। आग्नेय कोण (SE) में बनी रसोई सबसे श्रेष्ठ होती है। इस दिशा में बिजली के उपकरण रखने में भी कोई परेशानी नहीं होती है। यदि फ्लैट वास्तु के अनुसान निर्मित है तो इस दिशा के स्वामी ग्रह प्रसन्न रहते हैं। घर की महिलायें या युवतियां कम बीमार होती हैं और इससे घर में सुख-समृद्धि और प्रसन्नता बनी रहती है। 

-फ्लैट में ध्यान रखें कि बाथरूम और टॉयलेट (टॉयलेट  के वास्तु के लिए ये आलेख पढ़ें) नैऋत्य दिशा (SW) यानी दक्षिण-पश्चिम और ईशान कोण (NE) में नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा है तो घर में कलह और तनाव बना रहेगा। घर के बच्चे बीमार रहेंगे, बड़े बच्चों की चरित्रहीन होने की पूरी संभावना है, उत्तर-पूर्वी यानी ईशान कोण जल का प्रतीक है। यहां पीने के पानी का स्रोत होना चाहिए। घर के इस हिस्से में पानी से भरा मटका रख सकते हैं, और उसे 15-20 दिन में बदल दें। वायव्य कोण (North-west) में सेप्टिक टैंक एवं शौचालय होना अच्छा रहता है।
 
-भवन में बेडरूम (बेडरूम वास्तु के लिए ये आलेख पढ़े) पूर्व-दक्षिण दिशा यानि आग्नेय कोण में नहीं होना चाहिए। इससे पति-पत्नि दोनों में गुस्सा रहेगा, और वैवाहिक संबंध प्रभावित होंगे, ऐसा होने पर जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। खुशियां प्रभावित होने लगती हैं।

-बैठक कक्ष (ड्रांइग रूम) (ड्राइंगरूम  के वास्तु के लिए ये आलेख पढ़ें) के लिये उत्तर दिशा (N) सर्वश्रेष्ठ है। पूर्व (E) दिशा या ईशान (NE) में भी ड्रांइग रूम अच्छा माना जाता है।

[पाठकगण! यदि उपरोक्त विषय पर कुछ पूछना चाहें तो कमेंटस कर सकते हैं, या मुझे मेल कर सकते हैं! वास्तु के लिये प्रोफेसनल सेवायें भी उपलब्ध हैं, इसकी जानकारी आप मुझे मेल करके प्राप्त कर सकते हैं।                                                             -लेखक-संजय कुमार गर्ग, (वास्तुविद, एस्ट्रोलॉजर)    
                                                                 sanjay.garg2008@gmail.com]

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