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वास्तु शास्त्र में पशु-पक्षियों का महत्व !

https://jyotesh.blogspot.com/2024/07/pashu-pakshi-vastu.html
वास्तु शास्त्र में पशु-पक्षियों का बहुत महत्व बताया गया है। बताया जाता है कि पशु-पक्षियों में बुरी शक्तियों का देखने व उन्हें दूर करने की शक्ति होती है। पालतू पशुओं में बुरी शक्तियों को दूर करने की ताकत होती है। अंडमान निकोबार द्वीप समूह में आयी सुनामी में जहां हजारों लोग मारे गये परन्तु किसी जानवर के मारे जाने की खबर आपने नहीं सुनी होगी। जानवर केवल वहीं मारे गये जो बंधे हुए थे, क्योंकि ये अपने को बचा नहीं पाये। बाकी जानवर पहले ही सुनामी का खतरा भांप कर दूर ऊंचे स्थानों पर चले गये थे। आइये अब जानते हैं वास्तु में पशु-पक्षियों का महत्व क्या है-

-बताया जाता है कि जिस स्थान पर हमें मकान बनाना हो वहां पंद्रह दिन तक गाय व उसके बछड़े को बांध देने से वह स्थान पवित्र हो जाता है।

-बड़े से बड़े अनिष्ट से बचने के लिए गोदान यानि गौ का दान सबसे उत्तम माना जाता है।

-भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए गाय पालना सबसे उत्तम उपाय माना जाता है। हम गाय पाल भी ना सके तो मां लक्ष्मी नारायण को प्रसन्न करने के लिए हमें प्रतिदिन गाय को रोटी अवश्य खिलानी चाहिए।

-शास्त्रों में तो ये भी कहा गया है कि गाय को प्रतिदिन रोटी खिलाने से पितर तृप्त होते हैं और उनका आशीर्वाद हमेशा बना रहता है।

-शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि गाय को नियमित रोटी खिलाने से सभी ज्योतिषीय ग्रह दोष दूर हो जाते हैं, गाय की सेवा से सभी सुख प्राप्त होते हैं।

-यदि घर में क्लेश रहता है और व्यापार में लगातार घाटा चल रहा हो तो प्रतिदिन चिड़ियों-पक्षियों को दाना डालना चाहिए। इससे गृह क्लेश और व्यापार में घाटा होना तुरन्त रूक जाता है। यदि व्यापार में घाटा भी ना हो रहा हो तो भी प्रतिदिन चिड़ियों-पक्षियों को दाना-पानी खिलाने से मन प्रसन्न रहता है और जीवन में खुशियां लौटने लगती हैं।

-यदि जीवन में कोई समस्या ना सुलझ रही हो और वह हमें लगातार परेशान कर रही हो तो हमें गिलहरियों को रोटी खिलानी चाहिए, जीवन की हर कठिनाई से मुक्ति मिलने लगती है।

-मूल्यवान सम्पत्ति के खो जाने पर या पुरानी सम्पत्ति हाथ से निकल जाने पर प्रतिदिन मछली को आटे की गोली खिलानी चाहिए, इससे आपके हाथ से निकली पैतृक सम्पत्ति के वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती हैं।

-यदि आपके अनेक दुश्मन हैं जो आपको तंग करते रहते हैं और आपको उनका भय सताता रहता है तो कुत्ते को नियमित रोटी खिलाये इससे शत्रु का भय व शत्रुता समाप्त हो जाती है। 

-किसी ग्रन्थ में मैंने यह भी पढ़ा था कि रोज व्यायाम-योग करने से शत्रुओं का भय समाप्त हो जाता है।

-यदि कर्ज से परेशान हैं तो उससे निपटने के लिए चीटियों को शक्कर और आटा डालें, कर्ज से मुक्ति पाने का यह एक बेहतरीन उपाय हैं। एक चीज का और ध्यान रखें कि यदि आपको किसी से पैसे उधार लेने हैं तो कभी भी मंगलवार के दिन ना लें। बुधवार-शनिवार को कर्ज लेना सबसे अच्छा माना जाता है यह कर्जा जल्दी दूर हो जाता है।

तो साथियों आपको ये आलेख कैसा लगा कमैंटस करके बताना न भूलें, अगले आलेख तक के लिए मुझे आज्ञा दीजिए नमस्कार जयहिन्द।

प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग वास्तुविद्, ज्योतिष, मो0 6396661036 / 8791820546 (Wh.) 

वास्तु के अनुसार कैसा हो हमारा बैडरूम?

वास्तुऔरबैडरूम
वास्तु और बैडरूम
शयनकक्ष (बैडरूम) हमारे घर का एक अहम् हिस्सा है, जिसमें हम अपनी जिन्दगी का लगभग एक तिहाई समय व्यतीत करते हैं, दूसरा पूरे दिन काम करने के बाद आराम व दूसरे दिन की ऊर्जा भी इसी कमरे से प्राप्त होती है। अतः हमें इस कमरे के वास्तु पर विशेष ध्यान देना चाहिये। प्रस्तुत है बैडरूम के लिये कुछ वास्तु संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी-

1- गृह स्वामी का शयन कक्ष नैरूत (SW) में सर्वश्रेष्ठ होता है, उत्तर-पश्चिम (NW) व उत्तर दिशा के मध्य का भाग भी बैडरूम के लिये रखा जा सकता है।


2-सोते समय सिर हमेशा दक्षिण (S) की ओर होना चाहिये व पांव उत्तर (N) की ओर होने चाहिये, हमें पूर्व (E) की ओर भी सिरहाना रखने से बचना चाहिये।

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3-पूर्व का सिरहाना वृद्धजनों के लिये उपयुक्त है। यह अध्यात्मिक चिंतन व ध्यान साधना की ओर उन्मुख करता है। 

4-उत्तर-पूर्व (NE) दिशा देवी - देवताओं का स्थान है, इसलिए इस दिशा में कोई बैडरूम नहीं होना चाहिए, उत्तर-पूर्व में  बैडरूम होने से धन की हानि व काम में रुकावट हो सकती है। इस दिशा में बच्चों का बैडरूम बनाया जा सकता है।

5-दक्षिण-पूर्व (SE) में शयन कक्ष अनिद्रा, चिंता, और वैवाहिक समस्याओं को जन्म देता है। दक्षिण पूर्व दिशा अग्नि कोण हैं जो मुखरता और आक्रामक रवैये से संबंधित है। शर्मीले और डरपोक बच्चे इस कमरे का उपयोग करें, जिससे वो आत्मविश्वास प्राप्त कर सकते हैं। आक्रामक और क्रोधी स्वभाव के व्यक्ति इस कमरे में ना रहे।


6-उत्तर-पश्चिम (NW)  दिशा वायु द्वारा शासित वायव्य कोण है और आवागमन से  संबंधित है। इसे विवाह योग्य लड़कियों के शयन कक्ष के लिए अच्छा माना गया है। यह मेहमानों के शयन कक्ष के लिए भी एक अच्छा स्थान है।

7-वायव्य कोण (NW) में बैडरूम तभी बनाना चाहिये जब नैरूत (SW) में भी बैडरूम हो।  

8-शयन कक्ष घर के मध्य भाग (Center) में नहीं होना चाहिए, घर के मध्य भाग को वास्तु में ‘ब्रह्मस्थान’ कहा जाता है। यह बहुत सारी ऊर्जा को आकर्षित करता है, जोकि आराम और नींद के लिए बने शयन कक्ष के लिए उपयुक्त नहीं है।


9-यदि घर में एक से अधिक मंजिल हैं तो परिवार के मुखिया का बैडरूम ऊपर की मंजिल के नैरूत (SW) में बनाना चाहिये। यह कमरा विवाहित बड़े लड़के के लिये भी उपयुक्त हैै।

10-विद्यार्थियों को सोने केे लिये पश्चिमी (W) सिरहाना महत्वपूर्ण है।  

11-बायीं करवट करके सोना अनेक दृष्टि से लाभदायक है। 
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[पाठकगण! यदि उपरोक्त विषय पर कुछ पूछना चाहें तो कमेंटस कर सकते हैं, या मुझे मेल कर सकते हैं!]                      लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008 @mail.com
(चित्र गूगल-इमेज से साभार!)