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बुध देव को कैसे मनाये?


http://jyotesh.blogspot.com/2015/03/how-to-pray-mercury-budh-in-hindi.html
बुध देव
महाभारत की कथा के अनुसार इनकी विद्या-बुद्धि से प्रभावित होकर महाराज मनु ने अपनी गुणवती कन्या इला का इनके साथ विवाह कर दिया था। इला और बुध के संयोग से महाराज पुरूरवा की उत्पत्ति हुई, इस तरह चन्द्र वंश का आगे विस्तार होता चला गया। अथर्ववेद के अनुसार बुध के पिता का नाम चन्द्रमा और माता का नाम तारा है, ब्रह्मा जी ने इनकी बुद्धि व गम्भीरता को देखते हुये इनका नाम बुध रखा।
बुध व्यक्ति में विनोदप्रियता, हंसी-मजाक, अभिनय, बुद्धिमता, प्रसिद्धि, बोलने की कला, तर्क शक्ति, गणित व हिसाब-किताब का ज्ञान आदि का प्रतीक हैं, वही शरीर में त्वचा, दांत, नस, पाचन विकार, एलर्जी, तिल्ली के दोष, जीभ आदि विकारों का प्रतिनिधित्व करते हैं। बुध प्रधान व्यक्ति तीखे चटपटे के शौकीन, आकाश यात्रा, भूत-प्रेत, तन्त्र-मन्त्र में रूचि वाले, पशु-पालन, बाग-बगीचे मेें रूचि वाले, भाषाविद् व रत्नों के जानकार होते हैं। पापी होने पर जातक को नशे का आदी, पेशाब के रोग, दुर्घटना, दिखावा करने वाले, याददाश्त में कमी, बातुनी, दुनिया की समझ कम रखने वाला बना देते हैं। पारिवारिक संबंधों में मामा व गोद ली हुई संतान का प्रतीक हैं।

कब शुभ कब पापी होते हैं-लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)

बुध कर्क मीन में अशुभ होते हैं, मिथुन, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ में मध्यम और मेष, वृष, सिंह, कन्या तुला में शुभ रहते हैं।
-यदि कुण्डली में बुध सूर्य के साथ हों तो इनकी अशुभता कम रहती है, सूर्य के बली होने पर भी अशुभ बुध शांत रहते हैं।
-अकेले अशुभ बुध या राहु-केतु के साथ हों तो ज्यादा हानिकारक होते हैं।
-बुध जैसे ग्रह शुभ-अशुभ के साथ हो वैसा ही शुभ-अशुभ प्रभाव ले लेते है।
-बुध यदि सूर्य के साथ हों तो दुगुना फल देते हैं, चन्द्रमा के साथ हों तो मानसिक विकार, मंगल के साथ हों तो हमलावर, गुरू के साथ हों तो बडबोलापन, शुक्र्र के साथ हों तो चंचलता, शनि के साथ हों तो जातक को स्वार्थी व मौकापरस्त बनाते हैं।

हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार-

कनिष्ठिका उंगली के नीचे बुद्ध पर्वत होता है यदि यह पर्वत सामान्य से ऊपर विकसित हो या पर्वत अविकसित हो या उस पर वर्ग का चिन्ह हो तो जातक में उपरोक्त सुखों का अभाव होता है।

कैसे मनाये बुध देव को-

1-वायदा या सट्टा कारोबार से बचें।

2-मांस-मदिरा का परित्याग करें या फिर कम से कम बुधवार, गुरूवार और शनिवार को मांसाहार
का परित्याग करें।लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)

3-हाथ में सोने की अंगुठी पहने।

4-पौधों को गमलें में पत्थर दाना डाल कर रखें।

5-अपने ससुराल पक्ष के लोगों के साथ मिलकर व्यवसाय न करें, ससुराल से सामान्य संबंध रखें।

6-बच्चों को ज्यादा आजादी न दें, उनकी गतिविधियों पर नजर रखें, क्योंकि जब बु
ध अशुभ होते हैं तो बच्चों की गलतियां मां-बाप को भुगतनी पड़ती हैं।

7-गाय को रोटी चारा खिलायें व किसी भी प्रकार से गाय की सेवा करें।

8-सोने की चेन गले में पहनें या फिर सस्ते विकल्प के रूप में तांबे के छेद वाला सिक्का धागे में डालकर पहनें।
लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)

9-हिजड़ों को यथा शक्ति दान दें।

10-घर में मोर पंख, गंगा जल रखें।

11-पेड़-पौधे लगायें व उनकी देखभाल करें।

12-ढाक के पत्ते के दोने में रखकर खाना या कुछ खायें।

14-बुध के मंत्रों का जाप करें या किसी विद्वान पंडि़त से जप करायें।

विशेष-उपरोक्त उपायों में से एकाधिक उपाय करने से बुध प्रसन्न होते हैं, यदि समस्या गंभीर हो तो किसी विद्धान व अनुभवी ज्योतिषी से संपर्क करना चाहिये।
   -लेखक-संजय कुमार गर्ग (लेखाधिन पुस्तक "नवग्रह रहस्य" से)
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चन्द्र देव को कैसे मनायें!


चन्द्रदेवकोकैसेमनायें
चन्द्र देव
चन्द्रमा मन का प्रतिनिधित्व करते हैं, यह जातक में भावुकता, चंचलता, विवेक, बुद्धि आदि का प्रतीक हैं। मन पर ही व्यक्ति की न केवल मानसिक बल्कि शारीरिक स्थिति भी निर्भर करती है, कहा भी गया है ’’मन एव मनुष्याणां बन्ध कारणं मोक्षः।‘‘ ज्योतिष में चन्द्रमा उपरोक्त के साथ-साथ माता, मौसी, कफ-विकार, नाक-कान-गला, आंख के विकार, पानी के विकार, फेफड़े,  पेट, कन्धे के रोग, रक्तचाप, दुर्घटना, जिगर, तिल्ली के दोष, याददाश्त, आयु आदि का प्रतीक हैं। यदि जातक का जन्म कृष्ण पक्ष की अष्टमी से शुक्ल पक्ष की अष्टमी तक होता है तो जातक में उपरोक्त वर्णिंत परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं, ऐसे जातकों को अष्टमी, पूर्णिमा और अमावस्या के आसपास मानसिक उद्धेग उत्पन्न हो सकता है।
लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)

चन्द्रमा कब कमजोर होते हैं-
1-कुंडली में यदि चन्द्रमा पापग्रस्त हों तो जातक में रोग निरोधक क्षमता का ह्रास होता है।

2-चन्द्रमा राहु के साथ हों तो भी मानसिक कष्ट देेते हैं।

3-कुंडली में चन्द्रमा यदि 4, 8 या 12वें भाव में हो तो निर्बल होते हैं, चतुर्थ चन्द्रमा माता के लिये और आठवें भाव का चन्द्रमा स्वयं के लिये अशुभ है।

4-यदि राशियों की दृष्टि से देखे तो मंगल और शनि की राशियां चन्द्रमा के लिये अशुभ हैं।

5-चन्द्रमा को कुण्डली में सूर्य से कम से कम दो भाव पृथक होना चाहिये, सूर्य और चन्द्रमा के बीच जितनी दूरी होगी उतना ही शुभ होगा, ऐसे जातक मानसिक रूप से सबल होते हैं, सूर्य व चन्द्रमा की पृथकता स्वास्थ्य के साथ आर्थिक सबलता भी प्रदान करती है।
लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)

हस्तरेखा से कैसे जाने-
निम्न चित्र में यदि जातक का चन्द्रपर्वत दबा हुआ हो, उस पर आपस में काटती हुई रेखायें हों, या बिन्दु/जाली हो तो जातक में उपरोक्त वर्णित सुखों का अभाव हो सकता हैै।
यदि किसी की याददाश्त (Memory) कमजोर होती जा रही हो तो भी निम्न में से एकाधिक उपाय किये जा सकते हैं।

चन्द्रमा को कैसे मनायें-
1-चन्द्रदेव को प्रसन्न करने के लिये सोमवार का व्रत रखना चाहिये।

2-मेष, वृष, मिथुन, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक लग्न वालों के लिये मोती रत्न शुभ होता है, वे इसे पहन सकते हैं। लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)

3-सस्ते विकल्प के लिये चांदी का छल्ला धारण किया जा सकता है।

4-हर पूर्णमासी को चन्द्रमा की रोशनी में बैठना चाहिये व चन्द्र-मंत्र  का जाप करना चाहिये।

5-चांदी के बर्तन में दूध, खीर, मीठे चावल या मिठाई का सेवन करना चाहिये।

6-पीपल के फल, सूखा गूलर, गूलर की जड़ घर में संभाल कर रखें।

7-शिव पूजन व दूध का दान करने से चन्द्र अनुकूल होते हैं।

8-घर में पानी के पौधे, बेल या मछली का एक्वेरियम रखें ।

लाल किताब के अनुसार चन्द्रमा के उपाय क्यों, कब और कैसे!
लाल किताब के चन्द्र ग्रह के उपाय हमें क्यों करने चाहिए? ऐसी कौन सी समस्याएं हैं, जिनके लिए हमें लाल किताब के उपाय करने चाहिए? समस्याओं का विवरण तथा कुंडली में कैसे पता करें हमें कौन से घर या ग्रह के उपाय करने चाहिए? आदि के बारे में वर्णन!

9-बाहर जाने से पहले पानी पीकर जाये।
10-चावल, चीनी, देशी घी से भरा नया बर्तन, छोटी इलायची, काजू, दूध, चांदी, सफेद वस्त्र अपनी सामर्थ्यनुसार उपरोक्त में से कोई एक या अनेक चीजें माह में, सप्ताह में दान दें और खायें। दिन-सोमवार, पुर्णमासी में दिन तथा सांयकाल के समय अपनी सुविधानुसार चुन लें।

विशेष-यदि पूर्व वर्णित समस्यायें गंभीर होती जा रही हो तो किसी अनुभवी ज्योतिषी से सम्पर्क करना चाहिए।
ये आलेख भी पढ़ें :-
                              -लेखक-संजय कुमार गर्ग (लेखाधिन पुस्तक "नवग्रह रहस्य" से) 
(चित्र गूगल-इमेज से साभार!)

"सूर्य-ग्रह और ज्योतिष से संबंधित समस्याएं व समाधान!

सूर्य-ग्रहऔरज्योतिष
सूर्य-ग्रह और ज्योतिष
जिन्दगी में परेशानी-बाधायें आती रहती है, उनका सामना करने के अनेक उपाय होते हैं, जैसे चोरी होने पर पुलिस व बीमारी में डाक्टर के पास जाकर अपनी समस्याओं से निपटा जा सकता है, परन्तु जब समस्याऐं अस्भाविक रूप से बार-बार होती रहती है और उनका समाधान उपरोक्त प्रकार से नहीं हो पाता तो हमें ज्योतिषीय उपाय करने चाहिए, क्योंकि जहां दवा काम नहीं करती वहां दुआ काम करती है, प्रार्थना की शक्ति सर्वविदित है। अब प्रश्न उठता है कि कौन सी समस्याओं के लिए कौन से उपाय किये जाये। सबसे पहले हम उन संभावित समस्याओं का अध्ययन करेंगे जो सूर्य ग्रह से संबंधित होती हैं।

सूर्य साक्षात् परमात्मा हैं, जगत का पालन करने के कारण संसार के पिता हैं, शरीर में आत्मा है व ग्रहों के मंत्रिमंडल में राजा हैं। ज्योतिष में सूर्य आत्मबल, मनोबल, मानसम्मान, प्रतिष्ठा, हड्डी, ईमानदारी, राजसी गुण, सिर, बाल, पेट की गर्मी, उत्साह, ज्ञान, बेबाकी, आंख के विकार, आदि का प्रतीक हैं व साथ ही सरकार, राजा, राजदरबार, पिता का सुख, पुरानी परम्परा, रूढि़वादिता आदि का भी प्रतीक हैं। यदि जातक को उपरोक्त मेें कोई बाधा या समस्या उत्पन्न होती हो तो सूर्य के उपाय करने चाहिए।

यदि जन्मकुडंली में सूर्य, शुक्र्र के साथ कही हों तो उपरोक्त बातों में कही न कहीं कमी, नुकसान या कटौती अवश्य करते हैं।लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)
"सूर्य-ग्रह और ज्योतिष  से संबंधित समस्याएं व समाधान!
सूर्य-ग्रह और ज्योतिष
तुला में नीच के सूर्य होने से व्यक्ति को पिता के सुख व जीवन साथी के सुख में कमी, मान-सम्मान मेें कमी, परिवार में विरोध, अशांति आदि फल होते हैं, साथ ही नीच राशि के सूर्य जिस भाव में जाते हैं, उस भाव से संबंधित सुखों में भी कमी कर देते हैं। क्योंकि सूर्य तेजस्वी ग्रह हैं इनके सम्पर्क में आने वाले ग्रह कमजोर व अस्त हो जाते हैं।
 
हस्तरेखा शास्त्र (पामिस्ट्री) के अनुसार देखें तो अनामिका उंगली के नीचे सूर्य पर्वत होता है। यदि वह पर्वत दबा हुआ हो या सूर्य पर्वत पर आपस में काटती हुयी रेखायें, बिन्दु या जाली हो तो जातक में उपरोक्त सुखों का अभाव होगा।

सरल उपाय-

1.    सूर्य को जल दें, सूर्यासन करें या पूर्व की ओर मुख करके 10, 28 या 108 बार गायत्री मंत्र पढ़े।
2.    तांबे के बर्तन में रात भर रखा हुआ जल पीये।
3.    माता-पिता, गुरू, बुर्जुगों का सम्मान करें उनका निरादर न करें।

4.    रात को सोने से पहले बिस्तर पर लेटे-2 सुबह सूर्य के सामने जपे गये मंत्र का जाप उतनी ही बार करे, जितनी बार सुबह किया गया था।
5.    घर में गंगा जल अवश्य रखें।
6.    अन्धों को कुछ दान करें।
7.    हवन-भट्टी आदि की राख घर में न रखें।
8.    साल में 2-3 बार घर के बुजुर्गों को उनके इस्तेमाल की चीज भेंट दें।
9.    रविवार का व्रत रखें।
विशेष -  यदि पूर्व वर्णित समस्यायें गंभीर होती जा रही हो तो किसी अनुभवी ज्योतिषी से सम्पर्क करना चाहिए।-लेखक-संजय कुमार गर्ग (लेखाधिन पुस्तक "नवग्रह रहस्य" से)  (चित्र गूगल-इमेज से साभार!)