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घाघ भड्डरी की यात्रा शकुन पंर कहावतें

https://jyotesh.blogspot.com/2024/11/ghagh-bhaddari-ki-yatra-shagun-par-kahavaten.html

प्रिय पाठकों! घाघ व भड्डरी की प्रसिद्ध कहावतें पुराने लोगों को कठंस्थ हैं, भड्डरी ने ज्योतिष, वर्षा आदि से संबंधित कहावतें कहीं हैं, वहीं घाघ ने नीति, खेती व स्वास्थ्य संबंधी कहावतें कहीं हैं। आज के आलेख में हम भड्डरी की शकुन संबंधी कहावतों पर चर्चा करेंगे। आशा करता हूं "घाघ भड्डरी की यात्रा शकुन पंर कहावतें"  भी आपके ज्ञान में वृद्धि करेगी।

सन्मुख छींक लड़ाई भाखै, पीठ पाछिली सुख अभिलाषै
छींक दाहिनी धन को नाशै, बाई छीक सुख सदा प्रकाशै
ऊंची छींक सदा शुभजानो, नीची छींक अधिक भय मानो
आपनु छीक महादुखदाई, कहें भड्डरी ज्योतिष बनाई।
भड्डरी कहते हैं कि सामने की छींक लड़ाई, पीछे की छींक सुखदाई, दाहिनी छींक से धन का नाश, बाएं छींक से सुख, ऊंची से लाभ, नीची से हानि और अपनी छींक से महादुख मिलता है।

नारि सुहागिन जल भर लावे दधि मछली सन्मुख सों आवे
समुहैं गाय पियावे बाछा यही सगुन है सबसे आछा।
भड्डरी कहते हैं कि यदि यात्रा करते समय सुहागिन स्त्री सामने से घड़ा भर के लाती हुई दिखाई दे, (आज के संदर्भ में कोई भी सामान लाने से लगा सकते हैं) या सामने से दही या मछली आ रही हो, या गाय बछड़े को दूध पिला रही हो तो यात्रा को जाते समय यह अच्छा शगुन है इसका मतलब है आपका काम सिद्ध होगा।

चलत समय नेउरा मिलि जाये बाम भाग चारा चखुं खाय
काग दाहिने खेते सुहाय, सफल मनोरथ समझहु भाय।
भड्डरी कहते हैं कि यदि यात्रा के समय नेवला मिल जाये या बाई ओर नीलकंठ चारा खा रहा हो या दाहिने हाथ की ओर कौवा खेत में दिखाई दे तो कार्य अवश्य सिद्ध हो जायेगा।

रवि ताम्बूल, सोम का दर्पन, भौमवार गुड़ धनिया चर्बन
बुद्ध मिठाई बीफै राई, शुक्र कहै मोहि दही सुहाई।
शनि को बाय विरंगहि खावे इन्द्रहुजीति पुत्र घर आवै।
भड्डरी कहते हैं कि किसी शुभ कार्य के लिए जाते समय रविवार के दिन पान खाकर, सोमवार को दर्पण देखकर, मंगल के दिन गुड़ और धनिया खाकर, बुद्ध के दिन मिठाई खाकर, गुरूवार को राई खाकर, शुक्रवार को दही खाकर तथा शनिवार को घृत खाकर यात्रा करें तो सफलता अवश्य मिलती है।

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भैंस पांच षट स्वान, एक बैल एक बकरी जान
तीन गाय तज सात प्रमान चलत मिलें मत करौ पयान।
भड्डरी कहते हैं कि यदि यात्रा के समय पांच भैंस या छह कुत्ते या एक बैल या एक बकरी या तीन गाय या सात हाथी दिखायी दें तो यात्रा पर नहीं जाना चाहिए।

सोम शनीचर पुरूबन चालू, मंगलबुद्धउत्तर दिशि कालू
जो बीफै को दक्खिन जाय निरपराधहू जूता खाय
बुद्ध कहै मैं बड़ो सयाना मोरे दिन जिनकरो पयाना
कौड़ी से नहिं भेंट कराऊं किन्तु कुशल से घर पहुंचाऊं
इक्का सुक्का पश्चिमवार, यात्रा को करिये न विचार।
भड्डरी कवि कहते हैं कि सोमवार तथा शनिवार को पूर्व दिशा में, मंगल व बुद्ध को उत्तर दिशा में, गुरूवार को दक्षिण दिशा में और रविवार शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए।

इकली हिरनी दुजै स्यार, भैंस चढ़न्ता पावे ग्वार।
तीन को सतक मिलि जाये तेली, तौ फिर मौत शीश पै खेली।
भड्डरी कवि कहते हैं कि यदि यात्रा के समय अकेली हिरनी मिले, दो स्यार मिले, ग्वाला भैंस पर चढ़ कर सामने से आ रहा हो और तेली भी मार्ग में मिल जाये तो यात्रा में निश्चित ही मृत्यु की संभावना होती है। अतः ऐसे में यात्रा को स्थगित कर देना चाहिए।

दिशा शूल ले जाओ बायें राहु योगिनी पूठ।
सम्मुख लेवे चन्द्रमा लावें लक्ष्मी लूट।
भड्डरी कवि कहते हैं कि दिशा शूल बांये राहु यामिनी पीठ पीछे और चंद्रमा को संमुख रखकर जो यात्रा करेगा उसे अधिक धन प्राप्त होगा।

पूरब मंगल कारी, अगिन कोन शुभ भारी
दखिनै छींक निडर हो जारी वायु कोन विरधै कै हारी।
पश्चिम छींक भोजन मिले, नैरित छींक विवादे करे।
उत्तर खूबै झगड़ा होय, ईशान धन प्रापति होय।
भड्डरी कवि छींक सगुन की पहचान पर कहते हैं कि छींक की पहचान यह है कि पूरब, अग्नि कोण और दक्षिण दिशा में होने वाली छींक शुभ है। वायव्य कोण, नैरूत कोण और उत्तर दिशा में होने वाली छींक अशुभ है तथा कलह कराने वाली होती है। पश्चिम दिशा की छींक से स्वादिष्ट भोजन प्राप्त होता है। ईशान दिशा की छींक से धन प्राप्त होता है।

ऊंची छींक महासुखकारी, नीची छींक महाभयकारी।
अपनी छींक महादुखकारी, कह भड्डर जोसी समझाई
अपनी छींक राम बन गउऊं, सीता हरन तुरन्तै भयऊॅं।
भड्डरी कवि कहते हैं कि ऊंची छींक अच्छी होती है, नीची छींक अत्यंत भय को देने वाली है। अपनी छींक यात्रा के समय आ जाये तो महादुख को देने वाली होती है। भडडरी कहते हैं कि अपनी छींक आने के कारण ही राम का वनगमन हुआ था, जहां सीता जी का हरण होने के कारण उन्होंने अत्यंत कष्ट सहने किये।
संकलन-संजय कुमार गर्ग 

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कुत्ते भी देते हैं भविष्य का संकेत ! (शकुन विज्ञान)

https://jyotesh.blogspot.com/2024/10/dogs-predicts-our-future .html
हमारे ग्रंथ कहते  हैं ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि की रचना की तो सबसे पहले कीट-पतंगों और जानवरों को बनाया था, ताकि उनके गुण-अवगुण, व आदतों को परख सकें। उसके बाद अच्छी प्रकार शोध करके उन्होंने इंसान का निर्माण किया ताकि वह ब्रह्माण की एक श्रेष्ठ रचना कर सकें। इस किंदवती को और भी बल तब मिल जाता है जब हम वैज्ञानिकों को देखते हैं, कोई दवा या शोध वह सबसे पहले पशु-पक्षियों पर ही करते हैं उसके परिणाम देखकर ही वह उसका परीक्षण इंसानों पर करते हैं। हमारे प्राचीन शोधकर्ता ऋषियों और महर्षियों ने भी जानवरों की गतिविधियों को अच्छे से देखा और फिर एक जानवरों पर आधारित एक विज्ञान बनाया जिसे शकुन विज्ञान कहा गया। इनमें उल्लू तंत्र, कौवा तंत्र, आदि भी आते हैं जिनमें से अधिकतर तंत्र के ग्रंथ आक्रांताओं ने जला डाले। श्रुत परम्परा से जो कुछ शेष बचा है तो उनमें से काफी कुछ शोध करने लायक है, उसे आंखे मूंदकर स्वीकार नहीं किया जा सकता। कुत्ते से संबंधित शकुन मैं आपको अंधविश्वासी बनाने के लिए नहीं दे रहा, बल्कि आपके ज्ञान में वृद्धि करने के लिए दे रहा हूं, मेरी अपनी व्यक्तिगत राय है कि इन पर आंख मिचकर विश्वास न किया जाये।


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यह निर्विवाद है कि पशु-पक्षी हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं, इनमें खतरों या स्थितियों को पहले ही पहचान करने की अद्भुत शक्ति होती है, ये भी सत्य है। साथ ही ये हमारे मूक (गूगे) समर्थक व हमारे कल्याण की सोचने वाले होते हैं परन्तु हम इनकी बातों और इशारों को नहीं समझ पाते। आइये समझते हैं कुत्ते आपसे क्या कहना चाहते हैं।


कुत्ते से जुड़े कुछ शकुन-अपशकुन/कुत्ते के शगुन/कुत्ते के शुभ संकेत क्या हैं?


-खलियान या अनाज संग्रह के स्थान को यदि कुत्ता अपने पंजे से खोदने लगे तो यह धन प्राप्ति का संकेत माना जाता है।

-यदि आप यात्रा पर जा रहे हैं आपका पालतू कुत्ता आपके पैरों पर लौटने लगे या वह खुश दिखायी दे तो यह आपके कार्य के सफल होने का संदेश है।

-संतान की प्राप्ति के इच्छुक पति-पत्नि को यदि कुत्ता घर के बाहर से मुंह में फल या सब्जी का टुकड़ा लिये हुए मिले तो यह आपको पुत्र प्राप्ति का संकेत है।


कुत्ते के अशुभ संकेत क्या हैं?


-यदि आप कहीं बैठे हुए किसी काम के बारे में सोच रहे हैं और कुत्ता अपना सिर पिछले पंजे से खुजलाये तो आपको सोचा हुआ कार्य पूरा होता है।

-परन्तु यदि कुत्ता अपने बाएं पैर से अपना बायीं ओर के हिस्से को खुजलाये जो माना जाता है आपका सोचा हुआ कार्य पूरा नहीं होगा।

-कहा जाता है यदि स्वस्थ कुत्ता उल्टी करने लगे तो अशुभ की सूचना देता है। 

-कहा जाता है कि परीक्षा या साक्षात्कार के लिए जाते समय यदि आपके बायीं ओर से कुत्ता गुजरे तो विफलता का संकेत मिलता है।

कुत्तों का रोना क्या दर्शाता है? 
-कुत्ते का रोना कभी भी अच्छा नहीं माना जाता है। यदि कुत्ता किसी के घर के पास रोये तो घर के स्वामी को मृत्यु होती या फिर मृत्युतुल्य कष्ट होता है।


-यदि अनेक कुत्ते एक साथ रोये तो गली या मौहल्ले के किसी बड़े व्यक्ति की मृत्यु का संकेत हो सकता है।

-यदि पूंछ कटा या कान कटा कोई कुत्ता किसी ‘रोगी या बीमार’’ को खुजली करता हुआ दिखायी दे तो यह अच्छा शकुन नहीं माना जाता है।

-यदि किसी घर का पालतू कुत्ता घर की दीवार को खोदने का प्रयास करें तो घर में चोरी होने का भय होता है।


-यदि कुत्ता अपने मालिक को देखकर बार-बार भौंके तो मालिक के बीमार होने का संकेत हो सकता है।

-किसी यात्रा पर जाते समय यदि आपका कुत्ता आपके दोनों हाथों को सूघें तो आपको यात्रा में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

-यदि स्वस्थ कुत्ते की एक आंख से पानी गिरें तो घर में कोई दुखद घटना हो सकती है।

-यदि कुत्ता जूते को मुंह में दबाकर भागे तो धन हानि का भय होता है।

तो साथियों आपको ये ये आलेख कैसा लगा कमैंटस करके बताना न भूले, अगले आलेख तक के लिए मुझे आज्ञा दीजिए नमस्कार जयहिन्द।

प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग, वास्तुविद्, एस्ट्रोलोजर   मो0 6396661036 / 8791820546 (Wh.) 
sanjay.garg2008@gmail.com

शकुन-विचार एक विज्ञान है!


https://jyotesh.blogspot.com/2015/12/omen-science-astrology.html
शकुन-विचार एक विज्ञान
बरसात के मौसम में अचानक गर्मी का बढ़ जाना, बरसात का, आने वाली खुशबु, भोजन के पकने का, वातावरण में अचानक शान्ति छा जाना आने वाला तूफान का यदि शकुन या संकेत हो सकती है तो रात में कुत्तों का रोना, बिल्ली का अचानक रास्ता काट जाना, गाय आदि चौपायों का असामान्य व्यवहार करना, अर्थात बैचेनी प्रकट करना, कौये का सुबह-सुबह छत पर बोलना आदि भी एक शुभाशुभ संकेत क्यों नहीं हो सकते, हो सकते हैं? बशर्ते! इन्हें अंधविश्वास न बनाया जाये । अंधविश्वास से मेरा तात्पर्य है कि शकुन अपशकुन के संकेत देने वाले माध्यमों का भी ध्यान से निरीक्षण किया जाना भी आवश्यक है, केवल आख मिचकर ही उसे शकुन-अपशकुन नहीं माना जाना चाहिये। उदाहरण के लिये यदि कुत्ते को किसी ने मारा है और इसलिये वो रो रहा है तो उसके इस रूदन को मृत्यु (पीड़ा) का संकेत नहीं माना जायेगा शर्त ये है कि कुत्ता या कुत्तें बिना वजय ही रात्रि में रो रहे हों। इसी तरह यदि गाय आदि चौपाये अपनी किसी शारीरिक पीड़ा या बिमारी के कारण असामान्य व्यवहार कर रहे हैं तो ये भी किसी आने वाली प्राकृतिक आपदा का संकेत नहीं माना जायेगा। इसी प्रकार यदि किसी क्षेत्र में कौओं को नित्य दाना-पानी डाला जाता है तो उस क्षेत्र में भी कौवे काफी संख्या में होंगे और वे आवाज देकर (कांव-कांव करके) अपने साथियों को बुलाते रहते हैं तो इस प्रकार कौवे का बोलना किसी मेहमान के आगमन का संकेत नहीं माना जाना चाहिये, और इसी प्रकार यदि चीटियों के बिल में किसी प्रकार पानी चला गया है तो भी ये अंडे लेकर भागती हैं तो उसे भी वर्षा का संकेत नहीं माना जायेगा। 

शकुन-विचार एक विज्ञान है!
OMEN SCIENCE
     मेरे कहने का तात्पर्य है कि शकुन -अपशकुन (GOOD AND BAD OMEN) का संकेत देने वाला माध्यम अपना प्राकृतिक व्यवहार प्रकट करें, तभी उपरोक्त शकुन-अपशकुन प्रकट होते हैं। आपकी जानकारी के लिये बता दूं कि प्राकृतिक आपदा जैसे भूकम्प, बाढ़ आदि आने का अहसास सबसे पहले पशु-पक्षियों को ही होेता है, क्योंकि वे प्रकृति के हमसे ज्यादा निकट होते हैं और प्रकृति की असामान्य हलचलों को समझने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि किसी अभ्यारण क्षेत्र में आयी बाढ़ आदि से इन्सान तो मरते हैं, परन्तु आपने किसी जंगली जानवर को मरते नहीं सुना होगा। क्योंकि वे आने वाली आपदा को पहले ही भांप लेते हैं और सुरक्षित स्थानों की ओर कूच कर जाते हैं। यदि गाय आदि चौपायों को बांध कर न रखा गया हो तो वे भी सुरक्षित स्थानों की ओर भागने का प्रयत्न करते हैं, और ब्रह्मांड़ का सर्वशक्तिशाली प्राणी होने का दम्भ भरने वाला इंसान उनके इस असामान्य व्यवहार को नहीं समझ पाता और हानि उठाता है।

  प्रबुद्ध पाठकजनों ! शकुन (OMEN) का शाब्दिक अर्थ किसी संकेत, चिन्ह या लक्षण से है, जो की किसी कार्य या यात्रा को प्रारम्भ करते समय प्रकट होते हैं, इनके द्वारा हमें उस कार्य के बनने या बिगड़ने के संकेत, सूत्र रूप में प्राप्त होते हैं इन्ही सूत्रों को ही शकुन (OMEN) कहते हैं। शकुन भारतीय दर्शन के इस सिद्धांत पर कार्य करते हैं कि कार्य की परिणिती या भविष्य सुदूर अंतरिक्ष में एक अप्रत्यक्ष दिव्य सत्ता द्वारा निश्चित कर दिया गया है, आवश्यकता उसे जानने भर की है, जो कि किसी दिव्यद्रष्टा द्वारा ही दिव्य दृष्टि से जाना या देखा जा सकता है, साधारण मनुष्य को वह दृष्टि मिलनी असंभव नहीं तो कठिन अवश्य है, दिव्यद्रष्टा मनीषियों ने इस भविष्य की हलचल को जानने के लिये जनसाधारण के लिये एक विज्ञान सुलभ कराया है, जिसे हम शकुन विज्ञान (OMEN SCIENCE) कहते हैं। इस प्रकार शकुन विज्ञान (OMEN SCIENCE) जन साधारण को किसी कार्य के भविष्य को जानने की दिव्य दृष्टि जिन संकेतों के माध्यम से देता है, इन संकेतों को ही शकुन विज्ञान (OMEN SCIENCE) कहते हैं।
     
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OMEN SCIENCE
     शकुन ज्योतिष, ज्योतिष शास्त्र  का ही एक अंग है। गणित ज्योतिष के अठारह आचार्य माने गये हैं और शकुन (OMEN) के दस आचार्य हैं। शकुन (OMEN) का विवेचन समस्त आर्य ग्रन्थों में हुआ है। शकुन के आदिम आचार्य भगवान शंकर  ही माने गये हैं । 
     
    आदरणीय पं0 राधाकृष्ण श्रीमाली जी  अपने ग्रन्थ स्वप्न ज्योतिष में लिखते हैं कि शकुन विज्ञान (OMEN SCIENCE) के अध्ययन से ज्ञात होता है कि आचार्यो ने प्रारम्भ में मानव जाति के शुभ-अशुभ विचार के लिये शकुन के द्वारा फल-विचार करना आरम्भ किया और इसे ही शकुन विचार कहा जाने लगा। पक्षियों के दिखाई देने, उठने-बैठने, पंख फैलाने, बोलने आदि के आधार पर विचार प्रारम्भ हुआ और शनै-शनै मानव जाति के अंग स्फुरण आदि के द्वारा शकुन विचार किया जाने लगा। पक्षियों में कौआ, चील, नीलकंठ आदि भी शकुन विचार में आने लगे।
     
     इस प्रकार हम कह सकते हैं कि शकुन विज्ञान (OMEN SCIENCE) ज्योतिष का ही एक अंग है और ज्योतिष विज्ञान के समान ही एक विज्ञान है।
शकुन व उसके फल का अध्ययन किसी अन्य ब्लाॅग में करेंगे।  
-लेखक-संजय कुमार गर्ग  sanjay.garg2008@gmail.com (All rights reserved.)
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    [पाठकगण! यदि उपरोक्त विषय पर कुछ पूछना चाहें तो कमेंटस कर सकते हैं, या मुझे मेल कर सकते हैं!]