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Feng Shui: "फेंगशुई" के ये "सूत्र" आपको जानने चाहिए!

Feng Shui: "फेंगशुई" के ये "सूत्र" आपको जानने चाहिए!
फेंगशुई एक प्राचीन चीनी वास्तुशास्त्र है, जिसका तात्पर्य होता है, हवा और पानी। यह पद्धति इन दोनों तत्वों में संतुलन स्थापित करने पर जोर देती है, परन्तु भारतीय पांच तत्वों को भी स्वीकार करती है, जिनमें लकड़ी, पानी, अग्नि, धातु और पृथ्वी सम्मिलित होते हैं।

किसी घर या फ्लैट का फेंगशुई कैसे जांचे-

किसी नये घर या फ्लैट की फेंगशुई जानने का सबसे अच्छा तरीका है, किसी नवजात शिशु को अपने नये घर में ले जायें, अगर वो शिशु वहां घुसते ही रोता है, तो इसका तात्पर्य है कि उस घर की फेंगशुई अच्छी नहीं है, अगर वो शिशु घर में घुसते ही हंसता है या मुस्कुराता है तो उसे घर की फेंगशुई अच्छी है शुभ है, ऐसा माना जाना चाहिए।
आज हम फेंगशुई के और स्वर्णिम सूत्रों के बारे में चर्चा करते हैं।

Feng Shui: "फेंगशुई" के ये "सूत्र" आपको जानने चाहिए!


1-घर में आये मेहमानों को चाय देते समय कभी भी केतली या जग का मुंह मेहमानों की ओर नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये एक बाण या बन्दूक की तरह से नेगेटिव एनर्जी छोड़ते हैं। इससे मेहमानों और आपके बीच गलतफहमियां उत्पन्न हो सकती हैं।

साथ ही यह भी ध्यान रखें कि कभी भी किसी की तरफ पहली ऊंगली यानि तर्जनी उंगली (इंडेक्स फिंगर) से इशारा न करें, क्योंकि ये आपकी ही तरफ नकारात्मक ऊर्जा छोड़ती है।

2-यदि आपके प्लाॅट का आकर गोल, त्रिभुजाकार या तिरछा आदि है तो आपको अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, अतः केवल चैकोर या आयताकार प्लाॅट लेना ही शुभ होता है। यदि आपने ऐसा प्लाॅट खरीद लिया है और आपको बनाना आपकी मजबूरी बन गया है तो उसे किसी वास्तुविद् से सलाह लेकर ही उसे बनवाना चाहिए।

Feng Shui: "फेंगशुई" के ये "सूत्र" आपको जानने चाहिए!
3-डाइनिंग हाॅल में खाने की टेबिल वृत्ताकार, अण्डाकार, या अष्टकोणीय भोजन की टेबिल ही शुभ मानी जाती है। यदि वह वर्गाकार या आयताकार हो तो उसके कोने गोल या घुमावदार ही होने चाहिए।

4-घर या व्यावसायिक भवनों में पशुओं के सुन्दर चित्र लगाने चाहिए, इन्हें लगाना अच्छा माना जाता है। हाथी को चातुर्य का, घोड़े को शक्ति का, कछुए को दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है।

5-घर के पिछले हिस्से में बड़ी चट्टान या ऊंची बिल्डिंग शुभ मानी जाती है। घर के सामने बड़ी चट्टान या ऊंची बिल्डिंग शुभ नहीं मानी जाती, यदि आपके घर के सामने कोई बड़ी चट्टान या ऊंची बिल्डिंग है या फिर किसी दूसरे भवन की सीढ़ियां हैं, तो इनका होना अच्छा नहीं माना जाता है। यदि ऐसा कोई दोष है तो पौधे, फव्वारे, शीशे, विण्ड चाइम आदि लगाकर उसका निवारण करना हितकर होता है।

6-यदि आपने बीम के नीचे गैस आदि का चूल्हा लगा रखा है तो इसे बीम के नीचे से तुरंत हटा दें, ये आपकी धन-सम्पत्ति की हानि करायेगा।

7-इसी प्रकार यदि आपने बीम के नीचे अपना पलंग या डबल बैड डाला हुआ है तो उसे भी वहां से तुरंत हटा दें, पहले तो ये आपकी नींद को प्रभावित करेगा, यदि आप थक कर सो भी जाते हैं तो यह आपके स्वास्थ्य को खराब करेगा। 
Feng Shui: "फेंगशुई" के ये "सूत्र" आपको जानने चाहिए!
यदि बीम के नीचे बैठने के अलावा कोई विकल्प ना हो तो, बीम को सिलिंग टाइल्स से ढक दें या फिर बीम के दोनों ओर हरे रंग की गणपति जी की तस्वीर लगा देनी चाहिए।

बांस के तने या बांसुरी छत पर बीम को छुपाने के लिए बहुत उपयोगी वस्तु है। बांसुरी शान्ति और समृद्धि का प्रतीक है। इससे आपके अच्छे मित्र बनते हैं और अवांछित व्यक्ति आपके घर से दूर रहते हैं।

8-यदि आप खूब धन कमाते हैं परन्तु आपके पास धन नहीं रूकता तो आप तीन पैरों वाला मेंढक अपने घर में छुपाकर रखना चाहिए, इस मेंढक को इस प्रकार रखना है कि इसकी पीठ मुख्य द्वार की ओर हो और मुंह घर के अंदर की ओर। परन्तु ध्यान रहे इसको छुपा कर ही रखना चाहिए।

9-यदि आप एक्पोर्ट का व्यवसाय करते हैं और आप अपने निर्यात के व्यापार को बढ़ाना चाहते हैं तो आप अपने आफिस के उत्तर-पश्चिम दिशा में एक ग्लोब रखिए और उसे दिन में कम से कम पांच बार घड़ी की दिशा में घुमायें। आपके निर्यात का व्यवसाय चमकने लगेगा, परन्तु व्यवसाय बढ़ाने के प्रयास बंद न करें।

10-यदि आप नित्य दवाईयां लेते हैं और उन्हें किचिन में रखे रखते हैं तो सावधान हो जाइये, आप कभी भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पायेंगे, यदि आप स्वस्थ होना चाहते हैं तो अपनी दवाईयों को तुरन्त किचिन से हटाकर अपने ड्रांइग रूम में किसी अलमारी में रखने की आदत डालें।

11-यदि आपको अपने घर में स्विमिंग पूल बनवाना है, तो उसे अपने घर के पिछले भाग में बनवाना चाहिए।

12-घर के सामने बड़ा नाला नहीं होना चाहिए, यदि आपके घर के सामने नाला हो तो उसे ढकवा देना चाहिए।

Feng Shui: "फेंगशुई" के ये "सूत्र" आपको जानने चाहिए!
13-घर के सामने मंदिर, चर्च या मस्जिद होना अच्छा नहीं माना जाता। अगर ऐसा है तो उसके प्रभाव को दूर करने के लिए घर के आगे वृक्षों की कतार के रूप में बाढ़ लगवानी चाहिए, इससे उनका प्रभाव कम हो जाता है।

14-आपका परिवार संयुक्त हो या एकल परिवार हो, उसके मुख्य द्वार का निर्माण परिवार के मुखिया के तत्वों के आधार पर करना चाहिए।

15-घर के अगले द्वार के समीप कभी शौचालय का निर्माण नहीं करना चाहिए तथा घर के मध्य भाग में भी कभी शौचालय नहीं बनवाना चाहिए।

16-लम्बे गलियारे के अन्त में भी शौचालय नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा हो तो उसके द्वार की दिशा बदले या फिर उसके द्वार पर एक बड़ा सा दर्पण लगा देे जो नकारात्मक ची (ऊर्जा) को वापस भेज देगा।

17-रंगों से ‘ची’ मिलती है अतः अपनी बैठक या मिटिंग हाॅल में लाल, नीला, व बैंगनी रंगों से पेन्ट कराये, आपकी मिटिंग अच्छी रहेगी। 

18-‘ची’ को पड़ोसी भी प्रभावित करते हैं। यदि पड़ोसी समृद्धिशाली, व प्रतिष्ठित हैं तो यह आपके लिए अच्छी ‘ची’ उत्पन्न करते हैं। यदि पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति दिवालिया, बीमार, व्यसनी या अन्य प्रकार की समस्याओं से घिरे हुए हैं तो यह आपके लिए बुरी ‘ची’ उत्पन्न करती है, ऐसे लोगों के पड़ोस में मकान खरीदने से बचना चाहिए।

19-यदि आपके घर का मुख्य द्वार छोटा या संकुचित है तो वहां बड़ा सा दर्पण लगाकर उसे बड़ेपन का अहसास दिलायें। विण्ड चाइम, आकर्षक पेड़-पौधे आदि लगाकर धन में ‘ची’ का प्रवेश बढ़ा सकते हैं।
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20-मुख्य द्वार के दोनों ओर आने वाले रास्ते में दोनों ओर क्यारी में फूल वाले पौधे लगाने से अच्छी ‘ची’ का घर में प्रवेश होता है।

21-घर में सकारात्मक ‘ची’ का प्रवेश दिलाने के लिए घर के दर्पण साफ रखें, अनावश्यक वस्तुओं का संग्रह न करें तथा फ्यूज बल्ब व बंद घड़ी तुरन्त ठीक करायें।

22-भवन के मुख्य प्रवेश द्वार के अतिरिक्त अन्य द्वारों की संख्या सम संख्या होनी चाहिए, विषम में नहीं होनी चाहिए।

23-यदि आपके घर या आफिस में कोई टूटा-फूटा या चटकी हुई टाइल है तो ये आपके परिवार या पार्टनर से आपके टूटते हुए संबंधों को दर्शाता है। अच्छा तो ये आप उस टाइल को बदल दें, नहीं तो उसके ऊपर कोई पेन्टिंग आदि लगा दें, जिससे टूटा टाइल छुप सके।

पाठकों को इस संबंध में कोई और जिज्ञासा हो तो वास्तु के मेरे और आलेख पढ़े, मुझे कमैंटस करें या फिर मुझे मेल कर सकते हैं।

प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग, वास्तुविद्, एस्ट्रोलाॅजर मो0 6396661036 / 8791820546 (Wh.) 
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भारतीय वास्तुशास्त्र
के समान, चीन में ‘फेंगशुई’ वास्तु शास्त्र के रूप में विख्यात है। वास्तु शास्त्र की तरह, फेंगशुई को भी बिना देश सीमा के विश्व के हर स्थान पर लागू किया जा सकता है। फेंगशुई  के संबंध में चीन में एक कहावत प्रचलित है कि ‘‘सर्वप्रथम स्थान मनुष्य के प्रारब्ध का, द्वितीय स्थान उसके भाग्य का तथा तृतीय स्थान फेंगशुई का है।’’ यदि चीनी भाषा में इसके अर्थ की बात करें तो फेंगशुई का अर्थ है वायु और जल। अतः फेंगशुई के अनुसार वायु और जल का सही उपयोग करके ही मनुष्य जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। इसके अनुसार घर में रखा गया प्रत्येक सामान व वस्तुएं हमारी विचारधारा, हमारे व्यक्तित्व पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव अवश्य डालते हैं। आइये अब देखते हैं-

फेंगशुई के कुछ स्वर्णिम सूत्र-


1-फेंगशुई के अनुसार यदि अपने घर में घुसते समय आपके मन में शान्ति, सुकून की भावना मन में आती है तो आपके घर की फेंगशुई शुभ है। यदि आपको अपने घर जाने का मन नहीं करता, एक अनाकर्षण की सी स्थिति हो, तो इसका तात्पर्य है कि आपके घर की फेंगशुई अच्छी नहीं है।

2-फेंगशुई के अनुसार घर के सारे दरवाजे बाहर की ओर खुलने वाले होने चाहिए, अन्दर की ओर खुलने वाले दरवाजे अशुभ होते हैं। वैसे वास्तु इससे एकमत  नहीं है।

3-नोकदार खम्बे नहीं बनवाने चाहिए, हमेशा गोल खम्भे ही बनवानें चाहिए।

4-यदि भगवान की प्रतिमा या अपने घर में मुख्य द्वार के समाने कोई खम्बा हो तो उसको तुड़वाने की बजाय उस पर दर्पण लगा देना चाहिए। इससे उसका प्रभाव कम या समाप्त हो जाता है।

5-अपने घर के बीचो-बीच कभी भी सीढ़ियों को निर्माण नहीं कराना चाहिए, ऐसा करने से ग्रह स्वामी को हृदय रोग का भय होता है। हार्ट अटैक आने की पूरी संभावना बन जाती हैं, इसीलिए सीढ़ियां हमेशा किनारे से ही बनवायें।

6-अगले व पिछले दरवाजे को ठीक आमने-सामने नहीं बनवाना चाहिए, इससे शार की रचना होगी तथा सारी ची (ऊर्जा) प्रवेश के साथ ही बाहर निकल जायेगी। यदि ऐसा दरवाजा बनवाना मजबूरी बन रहा हो तो फिर फर्नीचर या दर्पण लगवाकर ची को घर के अन्दर एक घुमाव दिया जा सकता है। या फिर आगे वाले और पीछे वाले दरवाजे के बीच में क्रिसटल बाल लटकाकर ची को ठहरने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

7-घर से बाहर देखने पर अगले दरवाजे की स्थिति बाईं ओर होनी चाहिए, बताया जाता है इससे ड्रैगन दरवाजे की सुरक्षा करता है।

8-डायनिंग रूम को बैठक की तुलना में निचाई पर स्थित होना चाहिए।

9-फेंगशुई खाने के कमरे को घर के अन्य कमरों से पृथक रखने पर जोर देता है, यदि उसे एक ही कमरे में बनाया जाये तो उसे उस कमरे से स्पष्ट रूप से अलग दिखना चाहिए।

10-बैडरूम में ऊर्जा या ची को उत्तेजित करने के लिए एक हरा-पौधा रखना चाहिए, किन्तु अधिक पौधे भी ना रखें, क्योंकि अधिक मात्रा में रखे गये पौधे उपलब्ध ची को समाप्त कर देगेें।

11-अपने बैड के नीचे भी इतना स्थान रखना चाहिए कि वहां से ची प्रवाहित हो सके, क्योंकि ची को ऊपर-नीचे तथा कम से कम पलंग के ओर प्रवाहित होना लाभदायक है। यदि आप अपने पलंग के नीचे कुछ सूटकेश या सामान आदि रखते हैं तो वे ची के मार्ग को रूकते हैं, और आपको ची का पूरा लाभ नहीं मिल पायेगा।

12-यदि आप अपने जीवन साथी की तलाश में हैं तो आप को अपना बैड इस प्रकार बिछाना चाहिए कि उस पर दोनों ओर से लेटा जा सके।

13-पलंग के पैरों की ओर दर्पण नहीं लगाना चाहिए, या इस तरह नहीं लगाना चाहिए, जिससे पलंग पर लेटने पर आपका चेहरा दर्पण में दिखाया जाये। ये आपकी एनर्जी को खिंचता है।

14-अपने कमरे में या बैडरूम में अस्त-व्यस्त सामान न रखें साथ ही अनुपयोगी चीजों को ढेर भी न लगायें।

Feng Shui : "फेंगशुई" के कुछ महत्वपूर्ण सूत्र!

15-कमरें की छत व कमरे की दीवारों पर एक ही रंग का कलर न करायें। इसका परिणाम दुखःदायी हो सकता है।

16-‘ची’ यानि एनर्जी भी चमकीले रंगों की ओर आकर्षित होती है, लाल रंग सौभाग्य व धन समृद्धि का होता है।

17-धीरे-धीरे बहता जल धन को आकर्षित करता है, इसलिए अपने धन-सम्पत्ति वाले स्थान पर एक्वेरियम या सजावटी फव्वारा लगायें।

18-टेलिफोन के पास कोई जल का जग, आइस बाॅक्स या एक्वेरियम न रखें, क्योंकि टेलिफोन अग्नि तत्व है जो जल तत्व के साथ मिलकर विपरीत प्रभाव दे सकती है।

19-मुकदमें, झगड़े, विवाद आदि से संबंधित कागजात की फाइलें तिजोरी लाॅकर में न रखें, साथ ही इन्हें बेनामें, पासबुक आदि के महत्वपूर्ण कागजातों के साथ मिलाकर न रखें, ऐसा करना मानसिक तनाव उत्पन्न कर सकता है, और सफलता की संभावनाएं भी कम हो जाती हैं। अतः ध्यान रखें मुकदमें, झगड़े, विवाद आदि के कागजात उत्तर-पूर्व दिशा में रखें, कभी भी उन्हें दक्षिण-पूर्व या पश्चिम दिशा में ये कागजात न रखें, वरना ये दिशा आपके मुकदमें, विवाद आदि को लम्बे समय तक खींच सकती है।

20-अन्डर ग्राउड भवन कभी भी सम्पूर्ण भवन के नीचे न बनवायें, इसे अपने भवन के कुल क्षेत्रफल के एक तिहाई भाग में उत्तर-पूर्व, या उत्तर दिशा में बनवाना चाहिए। दक्षिण एवं पश्चिम दिशा में कभी भी बेसमेंट ने बनवायें। यदि इन दिशाओं में बेसमेंट बन ही गया है तो उसे गैराज या भारी सामान रखने के लिए प्रयोग में लायें।

21-भवन में अन्य कमरों की तुलना में रसोईघर, स्नानघर, शौचालय, प्रसाधन कक्ष आदि के दरवाजे छोटे होने चाहिए। यदि ये दरवाजे बड़े होगे तो ग्रह स्वामी अपव्यय और अत्यधिक व्यय से परेशान रहेगा।

22-यदि किसी से पैसा ले रहे हैं तो कभी भी दो अंगुलियों से रूपया-पैसा न लें, ये दो अंगुलियां कैंची की नुकीली धार के समान कार्य करती हैं। जिससे धन हाथ में नहीं रूकता और खर्च हो जाता है, अतः हमेशा पांचों अंगुलियों से रूपये-पैसे लें।

23-अपने घर या ऑफिस  में अपनी नेम-प्लेट जरूर लगवायें, इसका प्रभाव यह होता है कि संभावनाएं स्वयं ही आपके घर या ऑफिस  का रास्ता ढ़ूंढ लेती हैं।

24-किसी मन्दिर के पास आवासीय मकान नहीं बनाना चाहिए। यदि मन्दिर है तो मन्दिर की गुमटी की छाया मकान के ऊपर नहीं पड़नी चाहिए। मन्दिर के ऊपर एक पताका लगी होती है, इस पताका की छाया जितनी दूर तक पड़ती हो वहां तक आवासीय भवन नहीं बनाना चाहिए।

पाठकों को इस संबंध में कोई और जिज्ञासा हो तो वास्तु के मेरे और आलेख पढ़े, मुझे कमैंटस करें या फिर मुझे मेल कर सकते हैं।

प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग, वास्तुविद्, एस्ट्रोलाॅजर  मो0 6396661036 / 8791820546 (Wh.) 

Vastu Tips : बच्चों के कमरे के लिए विशेष वास्तु टिप्स !

Vastu Tips : बच्चों के कमरे के लिए विशेष वास्तु टिप्स !

बच्चे माता-पिता की सबसे बड़ी पूंजी हैं, वे उनमें अपना भविष्य देखते हैं। इसी लिए वे अपने बच्चों के पालन-पोषण आदि में कोई भी कोताई नहीं बरतना चाहते। इसी प्रकार बच्चों के भविष्य को देखते हुए हमें बच्चों के रूम में एक विशेष प्रकार की एनर्जी या कहिए सकारात्मक वातावरण का निर्माण करना चाहिए, यह एनर्जी बच्चे के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके लिए हम वास्तु के छोटे-छोटे सरल नियमों को अपनाकर अपने बच्चों के भविष्य को बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Vastu Tips : बच्चों के कमरे के लिए विशेष वास्तु टिप्स


1-बच्चों का कमरा घर के उत्तर, North पूर्व-उत्तर NE दिशा में बनवाना अच्छा माना जाता है।

2-बच्चों के कमरे में सफेद, पीला, नीले कलर के हल्के पेन्ट करा सकते हैं।

3-बच्चों के कमरे मे पर्दो का कलर दीवारों के कलर से गहरा होना चाहिए।

4-बच्चों के कमरे में श्री गणेश जी, मां सरस्वती जी की चित्र, पूर्व दिशा में लगाने चाहिए, बच्चों के कमरे कोई भी डरावनी, भयानक, या हिंसक पशुओं की तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए, ध्यान रखें, चित्र से चरित्र बनता है, जैसे चित्र हम बार-बार देखते हैं उसी के अनुकूल हमारे चरित्र का निर्माण होने लगता है। अतः बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए हमेशा अच्छे चित्रों को ही बच्चों के कमरे में लगाना चाहिए।

5-बच्चों के बचपन की तस्वीरे जो अपने पैरेन्टस के साथ हो उन्हें उनके कमरे में अवश्य लगाये इससे उनका अपने पैरेन्टस के साथ लगाव बढ़ता है तथा संबंध और मधुर होते हैं।

6-यदि बच्चे छोटे हैं तो उनके कमरे में कार्टून आदि के चित्रों से सजावट की जा सकती है, यदि बच्चे बड़े हैं तो देश-विदेश के महान वैज्ञानिकों, दार्शनिकों, स्वतंत्रता सेनानियों, लेखकों आदि में से एक या दो चित्रों को लगाया जा सकता है। ऐसे क्षेत्र के महान व्यक्तियों का चित्र लगाना सही होगा, जिस क्षेत्र में आप अपने बच्चों को भेजना चाहते हैं। इससे आपके बच्चे उन चित्रों से अनायास ही प्रेरणा लेते हैं।

7-बच्चों के कमरों में पूर्वजों-पितरों की फोटो नहीं लगानी चाहिए, यदि उन्हें लगाना ही है तो अपने ड्रांइग रूम में दक्षिण दिशा South की ओर लगाये।

8-बच्चों के कमरें में पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए, संभव हो तो सूर्य का प्रकाश भी उनके कमरे में आना चाहिए, ताकि दिन के समय वे अपनी पढ़ाई प्राकृतिक प्रकाश में कर सकें।

9-बच्चों की स्टडी टेबिल पूर्व-उत्तर NE दिशा की ओर होनी चाहिए, जिससे पढ़ते समय उनका फेस पूर्व East या पूर्व-उत्तर दिशा की ओर रहे तथा उनकी पीठ पश्चिम दिशा West की ओर रहे।

10-पश्चिम-दक्षिण या नैरूत दिशा SW में बच्चों की किताबें या अन्य सामान रखने की रैक रखी जानी चाहिए।

11-बच्चों का बैड अधिक ऊंचा नहीं होना चाहिए, साथ ही वो धातु का बना हुआ ना हो, उसे लकड़ी का ही बनवाना चाहिए।

12-बच्चों को बैड का सिरहाना पूर्व East की ओर होना चाहिए और उसके पैर पश्चिम West की ओर होने चाहिए।

13-यदि बच्चों के कमरे में शौचालय Toilet भी है तो बच्चों के बैड का सिर Head शौचालय की ओर नहीं होना चाहिए।

14-बच्चों के कमरें में टूटे हुए खिलौने, खाली डिब्बे या बेकार का सामान रखकर उसे स्टोर रूम नहीं बनाना चाहिए, इससे बच्चे के मन में नकारात्मक विचार आते हैं।

15-यदि बच्चे के रूम में टीवी लगाना है तो उसे उत्तर दिशा North की दीवार पर लगाना चाहिए, उनकी आयु के अनुसार उनके टीवी पर चैनल का सब्सक्रिप्शन रखना चाहिए यानि बच्चे छोटे हैं तो केवल कार्टून नेटवर्क तक ही उनकी पहुंच होनी चाहिए।

16-उनके कमरे में वाॅल क्लाॅक भी उत्तर दिशा North की ओर लगानी चाहिए, नहीं तो स्टडी टेबल पर ही वाॅच रखी जा सकती है।

17-बच्चों के स्टडी रूम की उत्तर दिशा North खाली रखनी चाहिए, उस पर कोई सामान, सूटकेश आदि जबरन नहीं रखना चाहिए।

18-बच्चे अधिकतर अपने लेपटाॅप, टीवी, फोन आदि बिना बन्द किये सो जाते हैं, अतः ध्यान रखें कि बच्चों के सोेने के बाद उनके सभी इलेक्ट्रानिक गैजेटस आप स्वयं उनके रूम में जाकर स्विच आफ कर दें।

19-बच्चों के बैडरूम के सिरहाने Head पर चार्जिंग पाइंट बिल्कुल ना दें, उसे बच्चों की स्टडी टेबल के ऊपर दें, क्योंकि बच्चे लापरवाही वश फोन आदि को चार्जिग पाइंट पर लगाकर ही फोन या कोई इलैक्ट्रिक गैजेट्स देखते-देखते सो जाते हैं। जो उनके लिए बहुत खतरनाक हो सकता है।

20-समय-समय पर बच्चों की अनुपस्थिती में उनके बैडरूम का निरीक्षण करते रहना चाहिए, कहीं गलत संगति में आपके बच्चे कुछ गलत खा पी तो नहीं रहे हैं। साथ ही उनके फोन व लैपटाॅप की हिस्ट्री भी समय-समय पर चैक करते रहना चाहिए।

पाठकों को इस संबंध में कोई और जिज्ञासा हो तो वास्तु के मेरे और आलेख पढ़े, मुझे कमैंटस करें या फिर मुझे मेल कर सकते हैं।

प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग, वास्तुविद्, एस्ट्रोलाॅजर  मो0 6396661036 / 8791820546 (Wh.) 

वास्तु के अनुसार दुकान का नक्शा !

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व्यापारिक स्थल या दुकान धन कमाने तथा जीविकोर्पाजन का प्रमुख साधन होते हैं। यदि इनका निर्माण वास्तु शास्त्र के अनुसार होगा तो निश्चित ही आय में वृद्धि होगी और दुकान अच्छी चलेगी। मैं कुछ वास्तु के नियमों के बारे में बता रहा हूं, जिनका उपयोग अवश्य किया जाना चाहिए। आइये अब देखते हैं, वास्तु के अनुसार दुकान का नक्शा-

वास्तु के अनुसार पूर्वाभिमुखी दुकान का नक्शा ¼Vastu for East Facing shop)

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-पूर्व मुखी दुकान का काउंटर किधर होना चाहिए?
यदि आपकी दुकान पूर्व मुखी है तो आपको यानि मालिक को उत्तर की ओर मुंह करके आग्नेय दिशा 
South East में बैठना चाहिए। ईशान North East  या वायव्य North West में न बैठें।

-पैसों का बाॅक्स अपनी बांई ओर रखें।

-पूर्व मुखी दुकान में मंदिर कहाँ होना चाहिए? 

इस दिशा में मंदिर ईशान या पूर्व दिशा की ओर बनाना चाहिए।

-यदि ऊपर की ओर मंजिल भी प्रयोग में लायी जाती हैं तो ईशान से पूर्व तक सीढ़िया बनवानी चाहिए।

-फर्श का ढलान दक्षिण से उत्तर की ओर तथा पश्चिम से पूर्व की ओर रखना चाहिए। नालियां भी इसी तरह से बनायी जानी चाहिए।

दक्षिण मुखी दुकान का वास्तु नक्शा ¼Vastu for South Facing shop)

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-दक्षिण मुखी दुकान में काउंटर किधर होना चाहिए? यदि आपकी दुकान दक्षिण मुखी है तो आपको यानि मालिक को पूर्व की ओर मुंह करके नैरूत दिशा South West में बैठना चाहिए। ईशान North East या वायव्य North West तथा आग्नेय दिशा South East में न बैठें।

-पैसों का बाॅक्स अपनी दायी ओर रखें, यदि उत्तर की ओर मुंह करके बैठना है तो पैसों का बाॅक्स बांयी ओर रखना चाहिए।

-फर्श का ढलान दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर तथा पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए।

-दक्षिण मुखी दुकान में मंदिर कहाँ होना चाहिए?

इस दिशा में मंदिर ईशान या पूर्व दिशा की ओर बनाना चाहिए।

-यदि सीढ़ियां बनवाने की आवश्यकता पड़े तो दक्षिण से आग्नेय दिशा तक सीढ़िया बनवानी चाहिए।

पश्चिमाभिमुखी दुकान का वास्तु नक्शा  ¼Vastu for West Facing shop)

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-पश्चिम मुखी दुकान में काउंटर किधर होना चाहिए? यदि आपकी दुकान पश्चिम मुखी है तो आपको उत्तर दिशा की ओर मुंह करके नैरूत दिशा South West में बैठना चाहिए। ईशान North East या वायव्य North West तथा आग्नेय दिशा South East में न बैठें।

-पैसों का बाक्स अपनी बायें ओर रखना चाहिए।

पश्चिम मुखी दुकान में मंदिर कहाँ होना चाहिए?

इस दिशा में मंदिर ईशान या पूर्व दिशा की ओर बनाना चाहिए।

-इस तरह की दुकान में फर्श का ढलान दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर तथा पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए।

-यदि पश्चिमी मुखी दुकान में सीढ़िया बनवानी हों तो वायव्य में सीढ़ियां बनवा सकते हैं।

उत्तराभिमुखी दुकान का वास्तु नक्शा ¼Vastu for North Facing shop)

vastu-ke-anusar-dukan-ka-naksha

-उत्तर मुखी दुकान में काउंटर किधर होना चाहिए? यदि आपकी दुकान उत्तर मुखी है तो मालिक को पूर्व दिशा की ओर मुंह करके वायव्य दिशा North West में बैठना चाहिए। ईशान North East या आग्नेय दिशा South East में नहीं बैठना चाहिए।

-पैसों का बाक्स अपनी दायीं ओर रखें। परन्तु यदि मालिक उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठता है तो पैसों का बाक्स अपनी बांयी साइड में रखें।

उत्तर मुखी दुकान में मंदिर कहाँ होना चाहिए?

इस दिशा में मंदिर ईशान या पूर्व दिशा की ओर बनाना चाहिए।

-इस दिशा की दुकान का ढलान दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर तथा पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए।

-इस दिशा की दुकान में सीढ़ियां ईशान से आग्नेय दिशा में बनानी चाहिए।

दुकान के लिए कुछ वास्तु टिप्स  ¼Some Vastu Tips for shop)

-दुकान में ईशान कोण को खाली रखना चाहिए, यहां धूप-बत्ती जलाने व पूजा करने का स्थान बनाना चाहिए।

-पानी का जग ईशान या उत्तर दिशा में रख सकते हैं।

-दुकान के मालिक का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर ही होना चाहिए।

-साॅप में टेबिल फैन, कूलर, हीटर, फ्रीज आदि को आग्नेय दिशा में रखने की व्यवस्था करनी चाहिए।

-दुकान में सामान तोलने के लिए तराजू दक्षिण या पश्चिमी दीवार की ओर रखनी चाहिए।

- अब हम देखते हैं कि दुकान के मंदिर का मुंह किधर होना चाहिए? दुकान में मंदिर हमेशा ईशान या पूर्व दिशा की ओर बनायें। इस प्रकार मंदिर बनाने से मंदिर का मुंह आग्नेय दिशा या फिर पश्चिम दिशा ओर होगा।

-कभी-कभी ऐसा भी होता है कि दुकान में दो शटर या दरवाजे होते हैं, और ऐसी स्थिति आ जाती है कि एक ही शटर खोला जा सकता है। इस स्थिति में कौन सा शटर खोलना चाहिए और कौन सा नहीं खोलना चाहिए। यह भी एक विचारणीय प्रश्न हो जाता है, इस संबंध में यह ध्यान रखें-

-यदि दुकान पूर्व मुखी है तो ईशान का शटर या दरवाजा खोलें, आग्नेय का ना खोलें।

-यदि दुकान का मुख दक्षिण दिशा की ओर है तो आग्नेय दिशा का शटर खोलना  चाहिए, नैरूत का ना खोले।

-यदि दुकान की दिशा पश्चिम मुखी है तो वायव्य का शटर खोलना चाहिए, नैरूत दिशा की नहीं।

-और यदि दुकान उत्तर मुखी है तो ईशान दिशा का शटर खोलना चाहिए, वायव्य दिशा का नहीं।

-यदि दुकान में मालिक या मैनेजर का अलग चैम्बर है तो उसे नैरूत दिशा में बनवाना चाहिए। उनका चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।

-ऐसे चैम्बर का दरवाजा ईशान, उत्तर या पूर्व दिशा में अच्छा रहता है। इस दरवाजे को वायव्य या आग्नेय दिशा में कभी न रखें।

पाठकों को इस संबंध में कोई और जिज्ञासा हो तो वास्तु के मेरे और आलेख पढ़े, मुझे कमैंटस करें या फिर मुझे मेल कर सकते हैं।
प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग, वास्तुविद्, एस्ट्रोलाॅजर मो0 6396661036 / 8791820546 (Wh.) 

वास्तु वेध: समस्याएं देती हैं घर के सामने ये चीजें

घर के सामने आनी वाली बाधाओं या रूकावटों को वेध Obstacles कहा जाता है। जिससे जीवन में बाधाएं व परेशानियां उत्पन्न होती हैं। यदि आपके घर का वास्तु ठीक है परन्तु आपके घर के सामने यदि निम्न चीजें हैं तो ये आपके जीवन में समस्याऐं तो देती ही हैं साथ ही आपकी प्रगति, उन्नति को भी रोक देती हैं। अब हम देखते हैं कि घर के सामने कौन सी चीजें हमारी उन्नति में बाधायें उत्पन्न करती हैं।

वास्तु वेध: समस्याएं देती हैं घर के सामने ये चीजें

द्वार वेध- Obstacles in front of Gate

1-घर के मुख्य द्वार के सामने चौराहा, कुआं, तालाब, गटर, दूसरे मकान का कोना, दूसरे मकान की सीढ़ियां, बड़ा वृक्ष या खंभा आदि नहीं होना चाहिए। 


-वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के सामने वृक्ष होने से घर के बच्चों में दोष, ऐश्वर्य का नाश होता है। 

-घर के सामने कीचड़ होने से शोक होता है। मन उदास, टेशन में रहता है।


-घर के सामने जलप्रवाह होने से व्यर्थ के खर्चों का बढ़ावा मिलता हैं।

-घर के समाने खम्भा होने से स्त्रियों में दोष उत्पन्न होते हैं व दुर्भाग्य की प्राप्ति होती है।

-कील वेध होने से आग लगने का भय होता है।

-घर के समाने दूसरे का दरवाजा होने से धन-धान्य का नाश होता है।

-मकान के सामने गड्डा होने से कलह, विरोध, तथा धन का अपव्यय होता है।

-घर के समाने श्मशान होने से भूत-प्रेतों का आतंक व भय होता है।


-घर के सामने शिला या पत्थर होने से शत्रुता व पथरी-रोग होने का भय होता हैै।

-किसी मकान का कोना होने से दुर्गति तथा मृत्यु का भय होता है।



2-मकान के मेन गेट के सामने गाय, बकरी या कोई अन्य जानवर बांधने की खूंटी नहीं होनी चाहिए। इस कील वेध कहते हैं।

3-घर के दरवाजे खोलते या बंद करते समय आवाज नहीं करने चाहिए। इसे स्वर वेध कहते हैं।


4-घर के द्वार के सामने मेनहोल, कुआं, पानी की हौदी या पानी की टंकी भी नहीं होनी चाहिए। यदि आपके मकान की छाया टंकी पर पड़ती है तो यह अशुभ माना जाता है इसे कूप वेध कहते हैं।


5-वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के सामने ब्रह्मा के मन्दिर का द्वार हो तो कुल का नाश होता है। महादेव या सूर्य का मन्दिर हो तो गृहस्वामी के लिए यह अशुभ होता है।

6-घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने कोई टूटा-फूटा खंडहरनुमा मकान हो तो यह भी शुभ नहीं होता। इससे घर में अशान्ति होती है।

निम्न अवस्थाओं में द्वार वेध का दोष नहीं होता- 

1-घर की ऊंचाई से दुगुनी भूमि का छोड़कर यदि कोई वेध है तो उसे वेध का दोष नहीं मानते हैं। माना आपकी घर की ऊंचाई 20 फुट है और आपके घर से 20 फुट की दूरी से दूर निम्न से बताया गया वेध स्थित है तो उसे वेध नहीं माना जाता।

2-यदि घर और वेध वस्तु के बीच मे राजमार्ग हो तो भी वेध का दोष नहीं होता।

3-यदि वेध वस्तु घर के सामने न होकर साइडों में या पीछे हो, तो भी वेध का दोष नहीं माना जाता।

छायावेध- Obstacles of shadow

घर पर किसी वृक्ष की छाया प्रातः 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक नहीं पड़नी चाहिए। ऐसा होने से घर के बच्चों में दोष, बुराईयां उत्पन्न होने का भय रहता है।


वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी मन्दिर की छाया भी घर पर नहीं पड़नी चाहिए, यह भी शुभ नहीं माना जाता है। माना जाता है इससे कुल का नाश होता है और बच्चों में दोष उत्पन्न हो जाता है।

वास्तु कहता है कि मन्दिर के ध्वज की छाया भी घर पर नहीं पड़नी चाहिए। ये भी मकान मालिक के लिए अशुभ होता है।


घर के सामने स्तंभ, स्मारक या स्तूप भी नहीं होना चाहिए। इसकी छाया भी प्रातः 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक घर पर नहीं पड़नी चाहिए।

यह भी सनद रहे कि यदि घर के साइडों में या फिर घर के पिछले हिस्से में छाया पड़ती है तो उसे छाया वेध नहीं माना जाता। अर्थात उसमें कोई दोष नही हैं।

उपरोक्त आलेख में हमने पढ़ा कि घर के सामने कौन सी चीजें जीवन में समस्याएं देती हैं, उन समस्याओं के बारे में विस्तार से जाना, साथ ही हमने पढ़़ा कि कौन सी स्थिति में वेध नहीं माना जाता है, अर्थात उपरोक्त चीजें समस्याएं नहीं देती हैं। 
पाठकों को इस संबंध में कोई और जिज्ञासा हो तो वास्तु के मेरे और आलेख पढ़े, मुझे कमैंटस करें या फिर मुझे मेल कर सकते हैं।
प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग, वास्तुविद्, एस्ट्रोलाॅजर मो0 6396661036 / 8791820546 (Wh.)