Giloy Benefits: गिलोय कौन-कौन सी बीमारी ठीक करता है?

गिलोय एक ही ऐसी बेल है, जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा कह सकते हैं। इसलिए इसे संस्कृत में अमृता नाम दिया गया है। कहते हैं कि देवताओं और दानवों के बीच समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत निकला और इस अमृत की बूंदे जहां-जहां छलकी, वहां-वहां गिलोय की उत्पत्ति हुई। आइये जानते हैं-


गिलोय कौन-कौन सी बीमारी ठीक करता है?


गिलोय बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता-

गिलोय एक ऐसी बेल है, जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर उसे बीमारियों से दूर रखती है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीआक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं।

ठीक करती है बुखार-

अगर किसी को बार-बार बुखार आता है तो उसे गिलोय का सेवन करना चाहिए। गिलोय हर तरह के बुखार से लड़ने में मदद करती है, इसलिए डेंगू के मरीजों को भी गिलोय के सेवन की सलाह दी जाती है। डेंगू के अलावा मलेरिया, स्वाइन फ्लू से आने वाले बुखार से भी गिलोय छुटकारा दिलाती है।

मधुमेह के रोगियों के लिए- 

गिलोय एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट है यानि यह खून में शर्करा की मात्रा को कम करती है। इसलिए इसके सेवन से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है।

कम करती है स्ट्रेस-

गिलोय एंडप्टोजन की तरह काम करती है और मानसिक तनाव और चिंता (एंजायटी) के स्तर को कम करती है, इसकी मदद से याददाश्त बेहतर होती है।

बढ़ाती है आंखों की रोशनी-

गिलोय को पलकों के ऊपर लगाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके लिए आपको गिलोय पाउडर को पानी में गर्म करना होगा। जब पानी अच्छी तरह से ठंडा हो जाए तो इसे पलकों के ऊपर लगाएं।

अस्थमा में भी फायेदमंद-

मौसम के परिवर्तन पर खासकर सर्दियों में अस्थमा के मरीजों को काफी परेशानी होती है। ऐसे में अस्थमा के मरीजोें को नियमित रूप से गिलोय की मोटी डंडी चबानी चाहिए या उसका जूस पीना चाहिए, इससे काफी आराम मिलेगा।

गठिया में मिलेगा आराम- 

गठिया यानी अर्थराइटिस में न केवल जोड़ों में दर्द होता है, बल्कि चलने-फिरने में भी परेशानी होती है। गिलोय में एंटी आर्थराइटिक गुण होते हैं, जिसकी वजय से यह जोड़ों के दर्द सहित इसके कई लक्षणों में फायदा पहुंचाती है।

एनीमिया में गिलोय लाभकारी-

भारतीय महिलाएं अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी से पीड़ित रहती है। इससे उन्हें हर वक्त थकान और कमजोरी महसूस होती है। गिलोय के सेवन से शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है और एनीमिया से छुटकारा मिलता है।

बाहर निकलेगा कान का मैल-

कान का जिद्दी मैल बाहर नहीं आ रहा है तो थोड़ी सी गिलोय को पानी में पीस कर उबाल लें। ठंडा करके छान के कुछ बूंदे कान में डालें। एक दो दिन में सारा मैल अपने आप बाहर आ जाएगा।

कम होगी पेट की चर्बी-

गिलोय शरीर के उपापचय को ठीक करती है, सूजन कम करती है और पाचन शक्ति बढ़ाती है। ऐसा होने से पेट के आसपास चर्बी जमा नहीं हो पाती और आपका वजन कम होता है।


यौनेच्छा बढ़ाती है गिलोय- 

आप बगैर किसी दवा के यौनेच्छा बढ़ाना चाहते हैं तो गिलोय का सेवन कर सकते हैं। गिलोय में यौनेच्छा बढ़ाने का गुण पाए जाते हैं, जिससे यौन संबंध बेहतर होते हैं।

खूबसूरती बढ़ाती है गिलोय- 

गिलोय न केवल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है, बल्कि यह त्वचा और बालों पर भी चमत्कारी रूप से असर करती है।

जवान रखती है गिलोय-

गिलोय में एंटी एजिंग गुण होते हैं, जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे, मुंहासे, बारीक लकीरें, और झुर्रियां दूर की जा सकती हैं। इसके सेवन से आप ऐसी निखरी और दमकती त्वचा पा सकते हैं, जिसकी कामना हर किसी को होती है। अगर आप इसे त्वचा पर लगाते हैं घाव बहुत जल्दी भरते हैं। त्वचा पर लगाने के लिए गिलोय की पत्तियों को पीस कर पेस्ट बनाएं। अब एक बरतन में थोड़ा नीम या अरंडी का तेल उबालें। गर्म तेल में पत्तियों का पेस्ट मिलाएं। ठंडा करके घाव पर लगाएं। इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट आती है।

गिलोय का प्रयोग ऐसे करें-


गिलोय जूस-

गिलोय की डंडियों को छील लें और इसमें पानी मिलाकर मिक्सी में अच्छी तरह पीस लें। छान कर सुबह-सुबह खाली पेट पीएं। अलग-अलग ब्रांड का गिलोय जूस भी बाजार में उपलब्ध है।
काढ़ा-चार इंच लंबी गिलोय की डंडी को छोटा-छोटा काट लें, इन्हें कूट कर एक कप पानी में उबाल लें। पानी आधा होने पर इसे छान कर पीएं, अधिक फायदे के लिए आप इसमें लौंग, अदरक, तुलसी भी डाल सकते हैं।

पाउडर-

यूं तो गिलोय पाउडर बाजार में उपलब्ध है। आप इसे घर पर भी बना सकते हैं। इसके लिए गिलोय की डंडियों को धूप में अच्छी तरह से सूखा लें। सूख जाने पर मिक्सी में पीस कर पाउडर बनाकर रख लें।
गिलोय वटी-बाजार में गिलोय की गोलियां यानी टेबलेट्स भी आती हैं। अगर आपके घर पर या आसपास ताजा गिलोय उपलब्ध नहीं है तो आप इसका सेवन करें।

इसे अरंडी यानी कैस्टर के तेल के साथ गिलोय मिलाकर लगाने से गाउट की समस्या में आराम मिलता है। इसे अदरक के साथ मिलाकर लेने से रूमेटाइड आर्थराइटिस की समस्या से लड़ा जा सकता है। चीनी के साथ लेने से त्वचा और लिवर संबंधी बीमारियां दूर होती हैं। कब्ज होने पर गिलोय में गुड़ मिलाकर खायें। 

साइड इफेक्टस का ध्यान रखें-

वैसे तो गिलोय को नियमित लेने से कोई गंभीर समस्या नहीं है लेकिन चूंकि यह खून में शर्करा की मात्रा कम करती है। इसलिए इस बात पर नजर रखें कि शुगर जरूरत से ज्यादा कम न हो जाएं। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय के सेवन से बचना चाहिए। पांच साल के बच्चों को गिलोय का प्रयोग ना करने दें।

-अतिथि लेखक: डा0 उमेश कुमार अग्रवाल

प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग, योगाचार्य, वास्तुविद्, एस्ट्रोलोजर  
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मन-मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाने वाली एक्सरसाइज!

मन-मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाने वाली एक्सरसाइज!
साथियों! हमारा मस्तिष्क एक चाकू की तरह है, इसे जितनी धार दोगे, जितना इसका प्रयोग करोगे उतना ही ये तेज होगा, तीक्ष्ण होगा, प्रयेाग करना कम कर दोगे, तो उतना ही बेकार और नकारा हो जायेगा। आधुनिक विज्ञान ने हमारे माइंड को नकारा बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है, जैसे पहले हम सैंकड़ों फोन नंबर याद रखते थे, परन्तु मोबाइल फोन ने वो मैमोरी हमसे छीन ली है, हममें से कितने व्यक्ति ऐसे भी होंगे, जिन्हें अपना फोन नम्बर भी याद नहीं होगा और तो और मार्केट में कुछ खरीददारी करते समय यदि हमें पांच सौ के नोट में से 59 रूपये देने पड़े, तो हम उसे घटाने के लिए तुरन्त अपने फोन पर कैलकुलेटर खोल लेते हैं। इस अविष्कार के कारण हमारी दिमागी एक्सरसाइज बिल्कुल बन्द हो गयी है। साथियों, ये तो बात हुई माइंड की, अब मैं यदि अवचेतन यानि सबकाॅन्शियस मांइड की बात करूं, तो पहले जब भी हमें कोई याद करता था तो हमें हुचकी से भी पता चल जाता था, कि कोई हमें याद कर रहा है, उस समय संदेश वाहन के साधन सीमित थे, किसी की याद आने पर उसे पत्र लिखा जाता है, या फिर फोन किया जाता था। बीच में ज्यादा दूरियां होने के कारण प्रेम ज्यादा था, हमारा सबकाॅन्शियस माइंड हुचकी और सपनों के द्वारा मानसिक संदेश का आदान-प्रदान कर लिया करता था। मैंने ऐसे अनेक बुजुर्गों को अपने मन की तरंगों को पढ़कर, अपने किसी प्रिय की राजी खुशी होने की सफल भविष्यवाणी करते देखा है, इसी कारण पहले हमारा सिक्सथ सेन्स या सबकाॅन्शियस माइंड अबकि तुलना में ज्यादा एक्टिव होता था। अब दूरियां समाप्त हो गयी हैं, साधन बढ़ गये हैं परन्तु प्रेमभाव भी कम हो गया है, चूंकि हमारा सबकाॅन्शियस माइंड भावनाओं और प्रेम से ही मजबूत होता है, एक्टिव होता है, इसलिए ये भी अब सुप्तावस्था में पहुंचता दिखायी दे रहा है, मित्रों! मेरे कहने का तात्पर्य यह नहीं है कि विज्ञान बेकार है, इसने हमें कुछ नहीं दिया, ऐसा नहीं है इसने हमें बहुत कुछ दिया है, बस हमारी गलती इतनी है, जिस विज्ञान को हमें अपना सेवक बनाना था उस विज्ञान को हमने अपना स्वामी बना लिया। 

साथियों हावर्ड यूनिवर्सिटी के छात्रों ने एक रिसर्च के बाद अपने ब्रेन व अवचेतन मन यानि सबकाॅन्शियस माइंड के लिए कुछ एक्सरसाइज बनायी है, जिन्हें हम अपने दैनिक जीवन में दैनिक कार्यों को करते हुए भी कर सकते हैं और अपने ब्रेन व सबकाॅन्शियस माइंड को मजबूत बना सकते हैं। 

मन-मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाने वाली एक्सरसाइज-


मन-मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाने वाली एक्सरसाइज!
1-उल्टे हाथ से काम करने का अभ्यास करें-

साथियों! यदि आप राइट हैंडर हैं तो अपने दैनिक कामों में सेे कुछ काम जैसे ब्रश करना, खाना खाना, पानी पीना, नहाना आदि कुछ काम उल्टे हाथ से करने की आदत डालिए और यदि आप लैफ्ट हैंडर हैं तो आप इन कामों को सीधे हाथों से करने की आदत डालें। इस तरह से काम करके आप अपने मस्तिष्क पर बहुत अच्छा प्रभाव डालते हैं, इससे आपका मस्तिष्क मजबूत होता है।


मन-मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाने वाली एक्सरसाइज!
2-पढ़ने की आदत डालिये-


आप अपने दैनिक जीवन में न्यूजपेपर, मैगजीन, कहानी, लेख आदि जरूर पढ़ें, क्योंकि इनको पढ़कर हमारा मस्तिष्क अपने अंदर एक छवि या फिल्म सी बनाता है, जिस कारण हमारा मन एक्टिव होता है, इसकी एक्टिवनेस का हमारे माइंड पर एक पाॅजिटिव इफेक्ट पड़ता है।





मन-मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाने वाली एक्सरसाइज!
3-भूमध्य के बीच में अपनी उंगली रखिए-


दोनों भौंहों के बीच अपनी तर्जनी उंगली कुछ देर के लिए रखिए, और उस पर अपने मन को एकाग्र कीजिए। हो सके तो ऊंॅ या गायत्री मंत्र का मन ही मन उच्चारण कीजिए, ऐसा करने से हमारा आज्ञा चक्र प्रभावित होता है और वह जाग्रत होने लगता है, जिससे हमारा अवचेतन मन एक्टिव होता है।




मन-मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाने वाली एक्सरसाइज!
4-कुछ कार्य आंखें बन्द करके कीजिए-


साथियों, अपने दैनिक जीवन के कुछ कार्य आंखे बन्द करके, करने का अभ्यास कीजिए, जैसे कमरे में घूमना, पेंटिग करना, कुछ लिखना आदि। आंखे बन्द करके कार्य करने से हमारी थर्ड आई एक्टिव होती है, जिसका हमारे अवचेतन पर सीधा प्रभाव पड़ता है, इससे भी हमारा अवचेतन मन स्ट्रांग बनता है।



मन-मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाने वाली एक्सरसाइज!
5-चैस खेलिए-


नये रिसर्च से पता चला है कि चैस खेलना माइंड के लिए बहुत अच्छा होता है, यदि आप अपने दैनिक जीवन में कुछ समय चैस के लिए निकाल सकें तो ये आपके माइंड के लिए बहुत अच्छा होगा। इससे भी हमारा अवचेतन मन स्ट्रांग बनता है।


मन-मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाने वाली एक्सरसाइज!


6-पहेलियां, पजल्स या अंताक्षरी खेलिए-


दिन में या रात्रि में जब भी आपको समय मिले पहेलियां, पजल्स साॅल्व कीजिए, परिवार के साथ अंताक्षरी खेलिए, परिवार में आपस में जर्नल नाॅलिज के प्रश्न पूछिये। ये भी आपके माइंड के लिए एक बहुत अच्छी एक्सरसाइज है। इससे आपके साथ आपके परिवार के सदस्यों का भी माइंड एक्टिव होगा।


मन-मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाने वाली एक्सरसाइज!
7-नये-नये लोगों से मिलिए-


नये-नये लोगों से मिलिए, उनके बारे में जानिए, उनके विचारों को सुनिए और उनसे अपने विचारों को साझा कीजिए, नये रिसर्च से पता चला है कि नये-नये लोगों से मिलने से भी माइंड पर सीधा प्रभाव पड़ता है।




मन-मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाने वाली एक्सरसाइज!
8-अच्छी सी नींद लीजिए-


ये अवचेतन मन के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण एक्सरसाइज है, एक अच्छी सी नींद लीजिए और नींद में एक अच्छा सा सपना देखिए, परन्तु विशेष बात ये है कि हमें अपने सपने को भूलना नहीं है, सो कर उठने पर हमें अपना सपना याद रखना है और ज्यादा से ज्यादा देर तक उसे याद रखने का प्रयास कीजिए, एक रिसर्च के अनुसार अधिकतर लोग, अपने सपनें सोकर उठने के कुछ मिनटों बाद ही भूल जाते हैं। साथियों, जितनी देर तक हम अपने सपने को याद रखेंगे, उतना ही हमारा सबकाॅन्शियस माइंड एक्टिव होगा।

साथियों! ये थी माइंड व सबकाॅन्शियस माइंड की एक्सरसाइज। यदि आप इन्हें अपने दैनिक जीवन में शामिल कर लेते हैं तो आपको इनका प्रभाव एक महीने में ही दिखायी देना प्रारम्भ हो जायेगा। 

साथियों! आपको ये आलेख कैसा  लगा कमैंटस करके बताना ना भूलें, अगले आलेख तक के लिए मुझे आज्ञा दीजिए, नमस्कार, जयहिन्द!

प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग, योगाचार्य, वास्तुविद्, एस्ट्रोलोजर  
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Methi Dana Benefits: मेथी दाना खाने के 20 फायदे!

Methi Dana Benefits: मेथी दाना खाने के 20 फायदे!
हमारी रसोई में प्रयोग होने वाले अनेक मसाले हमें स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हमारी रसोई हमारे घर में स्थित एक छोटा मैडिकल स्टोर है, जिसमें हमें अनेक बीमारियों में काम आने वाली दवाईयां मुफ्त में उपलब्ध रहती हैं, ये बिना साइड इफेक्ट की आयुर्वेदिक दवाईयां हैं। आइये ऐसे ही अनेक दवाईयों में से हम आज बात करते हैं मेथी के दाने की, घर की रसोई में आसानी से मिल जाने वाली मेथी में इतने सारे गुण हैं कि आप सोच भी नहीं सकते है। यह सिर्फ एक मसाला नहीं है बल्कि एक ऐसी दवा है जिसमें अनगिनत बीमारियों को खत्म करने का दम है। मेथी दाने में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, विटामिन्स व एण्टीक्सीडेंटस अच्छी मात्रा में मिलते हैं। आइए, आज हम आपको मेथी के कुछ प्रभावकारी व असरकारी प्रयोगों के बारे में बताते हैं।

Methi Dana Benefits: मेथी दाना खाने के 20 फायदे!


1-यदि आप वजन कम करने का सोच रहे हैं तो भिगोई हुई मेथी के साथ उसका पानी भी पियें तो आपको जबरदस्ती की भूख नहीं लगेगी। रोज एक महीने तक मेथी का पानी पीने से वजन कम करने में मदद मिलती है।

2-मेथी का पानी अपने एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण के कारण गठिया से होने वाले दर्द में राहत देता है।

3-बहुत सारी स्टडीज से पता चला है कि मेथी खाने से या उसका पानी पीने से शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होकर अच्छे कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ता है।

4-शादियों में मिलने वाली मेथी की चटनी आप को याद होगी क्योंकि मेथी दाने में फाइबर की उच्च मात्रा होती है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है। यह पेट को गैस, कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। 

5-मेथी में galactomannan नामक फाइबर होता है जो कि एक बहुत जरुरी फाइबर कम्पाउंड है। इससे रक्त में शक्कर बड़ी ही धीमी गति से घुलती है। इस कारण से मेथी का उपयोग करने से मधुमेह नहीं होता।

6-मेथी कैंसर की बीमारी को भी दूर रखती है, क्योंकि मेथी में ढेर सारा फाइबर होता है जो कि शरीर से विषैले तत्वों को निकाल फेंकता है और पेट के कैंसर से बचाता है साथ ही लिवर की सेहत को भी दुरूस्त रखता है।

7-मेथी दाना हृदय के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है, मेथी दाना ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है और दिल को चुस्त-दुरूस्त रखने के लिए आवश्यक तत्व प्रदान करता है।
  
8-मेथी का पानी किडनी के स्टोन को भी निकाल देता है, यदि आप भिगोई हुई मेथी का पानी एक माह तक सुबह खाली पेट लेगें तो यह आपकी किडनी से स्टोन को बाहर कर देता है।

9-मेथी दाना बालों की जड़ों को भी मजबूत करता है, यह डैंड्रफ को कम करके बालों को घना और चमकदार बनाता है, इसे बालों में लगाने से बालों का गिरना भी कम होता है।
  
10-मेथी में कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन आदि खनिज पाए जाते हैं, जो हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करते हैं। अतः मेथी के दाने खाने से हड्डियां और मांसपेशियां सबल होती हैं।

11-मेथी दाने में एंटी क्सीडेंटस गुण होने के कारण यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि करता है। इसी कारण मेथी का सेवन करने से जल्दी से कोई बिमारी हमला नहीं करती।

12-मेथी दाने का प्रयोग करने से अनिद्रा की समस्या से भी छुटकारा मिल सकता है, यह मन को शांत रखता है और अच्छी नींद लाने में हमारी मदद करता है।

13-मेथी दाना फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को कम कर देता है, जिससे उम्र बढ़ने की गति धीमी हो जाती है, जिससे बुढ़ापा हमारे चेहरे पर देर से नजर आता है।

14-रात में भिगोकर रखे गये मेथी के दाने का पानी मूत्र संक्रमण और पेशाब में जलन जैसी समस्याओं में फायदा करता है। 

15-मेथी दाने का प्रयोग जुकाम, खांसी अस्थमा आदि समस्याओं में भी हमारी सहायता करता है।

16-मेथी में उपलब्ध पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे दिन भर में हम अपने आप को ऊर्जान्वित महसूस करते हैं। 

17-गर्भावस्था के दौरान यह आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करके, गर्भवती महिला व उसके शिशु को स्वस्थ रखने में सहायता करता है।

18-यदि शरीर पर कहीं जल जाये या कोई चोट लग जाये तो मेथी दाने को पीस कर, उसका पेस्ट लगाने से जल्दी आराम मिलता है।

19-मेथी दाने का सेवन पाइल्स की समस्या में भी आराम देता है, जिससे मल त्याग करने में आसानी होती है और पाइल्स की समस्या समाप्त होने लगती है।

20-मेथी दाने के सेवन करने से थायरॉयड ग्रंथि अच्छे से कार्य करती है, जिससे थायराॅयड की समस्या में राहत मिलती है।

मेथी दाने के उपयोग की विधि-

एक पानी से भरा गिलास ले कर उसमें दो चम्मच मेथी दाना डाल कर रातभर के लिये भिगो दें। सुबह इस पानी को छानें और खाली पेट पी जाएं। रातभर मेथी भिगोने से पानी में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी ऑक्सीडेंट गुण बढ जाते हैं। इससे ऊपर बतायी गयी शरीर की अनेक बीमारियां चुटकियों में समाप्त हो जाती हैं। तेल में मिलाकर मेथी दाने का उपयोग बालों के लिए किया जा सकता है। इसी प्रकार मेथी दाने को पीसकर पाउडर बनाएं और दूध या गर्म पानी से भी सेवन कर सकते हैं।

मेथीदाना एक प्राकृतिक औषधि है, इससे हम स्वास्थ्य संबंधी अनगिनत लाभ प्राप्त कर सकते हैं, परन्तु इसका प्रयोग सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों व बच्चों को इसका सेवन कराने से पहले एक बार किसी अनुभवी वैद्य या डाक्टर की सलाह ले लेनी चाहिए।

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जब आवत संतोष धन.....! (विचारोत्तेजक लेख)

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मेरे साथ एक काॅलेज में शर्मा जी लैब असिटेन्ट थे, काफी बुजुर्ग थे, परन्तु काफी एक्टिव भी थे, काॅलिज के 250 के स्टाॅफ में वे सबसे ज्यादा बुजुर्ग थे, एक बार मैंने उनसे पूछा शर्मा जी आप पहले कहां काम करते थे, किस जाॅब में थे? आपकी एज कितनी हैं? आदि आदि। शर्मा जी ने बताया मैं एयरफोर्स से रिटायर हुआ था, उसके बाद मैंने भेल में जाॅब की, वहां से भी रिटायर होने के बाद मैंने लगभग पांच काॅलिजों में जाॅब की यह मेरी छठी जाॅब है और इस समय मेरी एज 85 वर्ष है। यह सुनकर मैं सन्न रह गया। मैंने उनसे पूछा सर! आपकी दो पेंशन आ रही हैं, अच्छी पेंशन आ रही होगी फिर भी आप जाॅब क्यों कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मैं जाॅब इसलिए कर रहा हूं ताकि मैं एक्टिव रह सकूं?

साथियों! क्या एक्टिव रहने के लिए जाॅब करना जरूरी है? इस आयु में एक्टिव रहने के लिए सोशल सर्विस, बागवानी, लेखन आदि कुछ भी तो किया जा सकता है? परन्तु उनका नौकरी यानि धन कमाने के लिए एक्टिव होने से, एक युवा बेरोजगार की नौकरी छिन रही है, जिसको शर्मा जी से ज्यादा नौकरी की आवश्यकता है? मेरी राय में यह एक्टिव रहने की ललक नहीं केवल पैसा कमाने की हवस है, क्योंकि एक्टिव रहने के लिए नौकरी ही जरूरी नहीं है?

एक पार्टी में काफी भीड़ थी, खाना खाने के लिए एकदम से अधिक लोग आ गये, जबकि कचौरी बन नहीं पा रही थीं। तभी वेटर ट्रे में 20-25 कचौरी लेकर वहां आया, पहले खड़े व्यक्ति ने रास्ते में ही 4 कचौरी झपट ली, उसे देखकर दूसरे ने भी 4 कचौरी झपटी, इसी प्रकार वे 20-25 कचौरी 5-6 लोगों ने ही झपट ली, जो दूर थे, वे बिना कचौरी के ही मनमसोस कर रह गये और छोले-चावल मिलाकर ही खाने लगे। यदि पहले 5-6 लोगों में संतोष होता और वे 1-2 कचौरी ही लेते, और लोगों की भी बारी आने देते तो क्या समस्या थी? चाहे उनकी ली गयी 4 कचौरियों में से सारी कचैरियां उनसे खायी भी ना जाये? परन्तु हमें संतोष है कहां?

एक और उदाहरण देखिए, अनेक प्रसिद्ध बुजुर्ग अभिनेता करोड़ों रूपये लेकर एक एपीसोड और फिल्में करते हैं, अनेकों एड करते है उनसे भी करोड़ो रूपये कमाते है, क्योंकि प्रसिद्ध और अनुभवी होने के कारण अन्य अभिनेताओं की तुलना में, निर्माता उन्हें प्राथमिकता देते हैं। उनके पास पैसे की कोई कमी नहीं है। इंडस्ट्री में संघर्षरत नये अभिनेताओं को इनके कथित एक्टिव रहने के कारण उन्हें कोई अच्छा काम मिलता ही नहीं हैं? उन्हें लाख रूपये भी एड या सीरियल के कोई देने के लिए तैयार नहीं है? ऐसा नहीं है उनमें प्रतिभा नहीं है? प्रतिभा भी है, परन्तु जब तक बड़े अभिनेता, निर्माताओं के पास सशक्त विकल्प के रूप में उपलब्ध हैं तो इन संघर्षरत अभिनेताओं की कोई पूछ ही नहीं है? डिप्रेशन में आकर इन्हें आत्महत्या जैसे कदम भी उठाने पड़ जाते हैं? स्थापित अभिनेता तब तक रिटायरमैंट लेने के लिए तैयार नहीं होते, जब तक की उसकी पूछ बन्द नहीं होती? क्योंकि पैसे कमाने की हवस है साहब, संतोष तो उनके पास है ही नहीं...?

मुझे मेरठ में काली पलटन के मंदिर के पास स्थित एक स्कूल में जाने का अवसर मिला। वहां उस स्थान पर बहुत सारे भिखारियों की झोपड़ी बनी हुई हैं, जिन्हें लोग रोज आकर पैसे-खाने का सामान देते हैं। उनके आसपास बहुत सारी निराश्रित गायें भी घूमती रहती हैं, यदि वो उनके खाने के पास आ जाती हैं तो वे बड़ी बेदर्दी से मार कर उन्हें भगा देते हैं। एक-एक भिखारी के पास एक दिन में सौ से भी ज्यादा रोटियां, पूरियां इकट्ठी हो जाती हैं, वे उन्हें किसी जरूरतमंद या गाय या कुत्तों को नहीं खिलाते, बल्कि अपनी झोपड़ी में इकट्ठी करते रहते हैं, मैंने स्वयं उनकी झोपड़ी में रोटियों की बोरी भरी देखी हैं। अपना पेट तो वे अच्छी-अच्छी खाने की चीजों से भरे रखते हैं, परन्तु इकट्ठी रोटी वे किसी को नहीं देते, कोरोना त्रासदी के समय भी पुलिस ने इनकी झोपड़ियों से रोटियों की बोरियां बरामद की थी, एक ओर लोग भूख से मर रहे हैं और दूसरे के पास अन्न बर्बाद करने के लिए भी है? ये मांगने की हवस है, इन्हें संतोष है ही नहीं......?

अनेक उदाहरणों से हमने देखा रोटी, धन, पैसा हमारी शारीरिक भूख और भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति तो कर सकते हैं परन्तु हमारी मानसिक भूख, हवस की पूर्ति नहीं कर सकते। मन की भूख संतोष से ही मिटती है जो आज हम में है ही नहीं? 

पैसा, धन, दौलत, शौहरत के पीछे दुनिया पागलों की तरह दौड़ रही है, साथ ही ऐसे लोगों का हक छीन रही है जो प्राकृतिक रूप से उसके सही दावेदार थे, इस अंधी दौड़ में हम बीमार हो रहे है...., मर रहे है....., परन्तु रूक नहीं रहे....? क्योंकि जिस धन की हमें तलाश है वह धन हमें वास्तव में मिला ही नहीं....?? इसलिए गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है-

गोधन, गजधन, बाजिधन और रतनधन खान,
जब  आवत  संतोष  धन, सब धन धूरि समान।
अर्थात तुलसीदास जी कहना है कि मनुष्य के पास चाहे गौ यानि गाय रूपी धन हो, गज धन यानि हाथी रूपी धन हो, वाजि धन यानि घोड़े रूपी धन हो और रत्नों की खान ही क्यों ना हो, वह कभी संतुष्ट नहीं हो सकता, जब उसके पास संतोषरूपी धन आ जाता है, तो बाकि सारे धन उसे धूल के समान दिखायी देने लगते हैं, इसका तात्पर्य है कि संतोष धन हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है।

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प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग, लेखक, वास्तुविद्, एस्ट्रोलाॅजर 8791820546 Whats-app
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Feng Shui : "फेंगशुई" के कुछ महत्वपूर्ण सूत्र!

Feng Shui : "फेंगशुई" के कुछ महत्वपूर्ण सूत्र!

भारतीय वास्तुशास्त्र
के समान, चीन में ‘फेंगशुई’ वास्तु शास्त्र के रूप में विख्यात है। वास्तु शास्त्र की तरह, फेंगशुई को भी बिना देश सीमा के विश्व के हर स्थान पर लागू किया जा सकता है। फेंगशुई  के संबंध में चीन में एक कहावत प्रचलित है कि ‘‘सर्वप्रथम स्थान मनुष्य के प्रारब्ध का, द्वितीय स्थान उसके भाग्य का तथा तृतीय स्थान फेंगशुई का है।’’ यदि चीनी भाषा में इसके अर्थ की बात करें तो फेंगशुई का अर्थ है वायु और जल। अतः फेंगशुई के अनुसार वायु और जल का सही उपयोग करके ही मनुष्य जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। इसके अनुसार घर में रखा गया प्रत्येक सामान व वस्तुएं हमारी विचारधारा, हमारे व्यक्तित्व पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव अवश्य डालते हैं। आइये अब देखते हैं-

फेंगशुई के कुछ स्वर्णिम सूत्र-


1-फेंगशुई के अनुसार यदि अपने घर में घुसते समय आपके मन में शान्ति, सुकून की भावना मन में आती है तो आपके घर की फेंगशुई शुभ है। यदि आपको अपने घर जाने का मन नहीं करता, एक अनाकर्षण की सी स्थिति हो, तो इसका तात्पर्य है कि आपके घर की फेंगशुई अच्छी नहीं है।

2-फेंगशुई के अनुसार घर के सारे दरवाजे बाहर की ओर खुलने वाले होने चाहिए, अन्दर की ओर खुलने वाले दरवाजे अशुभ होते हैं। वैसे वास्तु इससे एकमत  नहीं है।

3-नोकदार खम्बे नहीं बनवाने चाहिए, हमेशा गोल खम्भे ही बनवानें चाहिए।

4-यदि भगवान की प्रतिमा या अपने घर में मुख्य द्वार के समाने कोई खम्बा हो तो उसको तुड़वाने की बजाय उस पर दर्पण लगा देना चाहिए। इससे उसका प्रभाव कम या समाप्त हो जाता है।

5-अपने घर के बीचो-बीच कभी भी सीढ़ियों को निर्माण नहीं कराना चाहिए, ऐसा करने से ग्रह स्वामी को हृदय रोग का भय होता है। हार्ट अटैक आने की पूरी संभावना बन जाती हैं, इसीलिए सीढ़ियां हमेशा किनारे से ही बनवायें।

6-अगले व पिछले दरवाजे को ठीक आमने-सामने नहीं बनवाना चाहिए, इससे शार की रचना होगी तथा सारी ची (ऊर्जा) प्रवेश के साथ ही बाहर निकल जायेगी। यदि ऐसा दरवाजा बनवाना मजबूरी बन रहा हो तो फिर फर्नीचर या दर्पण लगवाकर ची को घर के अन्दर एक घुमाव दिया जा सकता है। या फिर आगे वाले और पीछे वाले दरवाजे के बीच में क्रिसटल बाल लटकाकर ची को ठहरने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

7-घर से बाहर देखने पर अगले दरवाजे की स्थिति बाईं ओर होनी चाहिए, बताया जाता है इससे ड्रैगन दरवाजे की सुरक्षा करता है।

8-डायनिंग रूम को बैठक की तुलना में निचाई पर स्थित होना चाहिए।

9-फेंगशुई खाने के कमरे को घर के अन्य कमरों से पृथक रखने पर जोर देता है, यदि उसे एक ही कमरे में बनाया जाये तो उसे उस कमरे से स्पष्ट रूप से अलग दिखना चाहिए।

10-बैडरूम में ऊर्जा या ची को उत्तेजित करने के लिए एक हरा-पौधा रखना चाहिए, किन्तु अधिक पौधे भी ना रखें, क्योंकि अधिक मात्रा में रखे गये पौधे उपलब्ध ची को समाप्त कर देगेें।

11-अपने बैड के नीचे भी इतना स्थान रखना चाहिए कि वहां से ची प्रवाहित हो सके, क्योंकि ची को ऊपर-नीचे तथा कम से कम पलंग के ओर प्रवाहित होना लाभदायक है। यदि आप अपने पलंग के नीचे कुछ सूटकेश या सामान आदि रखते हैं तो वे ची के मार्ग को रूकते हैं, और आपको ची का पूरा लाभ नहीं मिल पायेगा।

12-यदि आप अपने जीवन साथी की तलाश में हैं तो आप को अपना बैड इस प्रकार बिछाना चाहिए कि उस पर दोनों ओर से लेटा जा सके।

13-पलंग के पैरों की ओर दर्पण नहीं लगाना चाहिए, या इस तरह नहीं लगाना चाहिए, जिससे पलंग पर लेटने पर आपका चेहरा दर्पण में दिखाया जाये। ये आपकी एनर्जी को खिंचता है।

14-अपने कमरे में या बैडरूम में अस्त-व्यस्त सामान न रखें साथ ही अनुपयोगी चीजों को ढेर भी न लगायें।

Feng Shui : "फेंगशुई" के कुछ महत्वपूर्ण सूत्र!

15-कमरें की छत व कमरे की दीवारों पर एक ही रंग का कलर न करायें। इसका परिणाम दुखःदायी हो सकता है।

16-‘ची’ यानि एनर्जी भी चमकीले रंगों की ओर आकर्षित होती है, लाल रंग सौभाग्य व धन समृद्धि का होता है।

17-धीरे-धीरे बहता जल धन को आकर्षित करता है, इसलिए अपने धन-सम्पत्ति वाले स्थान पर एक्वेरियम या सजावटी फव्वारा लगायें।

18-टेलिफोन के पास कोई जल का जग, आइस बाॅक्स या एक्वेरियम न रखें, क्योंकि टेलिफोन अग्नि तत्व है जो जल तत्व के साथ मिलकर विपरीत प्रभाव दे सकती है।

19-मुकदमें, झगड़े, विवाद आदि से संबंधित कागजात की फाइलें तिजोरी लाॅकर में न रखें, साथ ही इन्हें बेनामें, पासबुक आदि के महत्वपूर्ण कागजातों के साथ मिलाकर न रखें, ऐसा करना मानसिक तनाव उत्पन्न कर सकता है, और सफलता की संभावनाएं भी कम हो जाती हैं। अतः ध्यान रखें मुकदमें, झगड़े, विवाद आदि के कागजात उत्तर-पूर्व दिशा में रखें, कभी भी उन्हें दक्षिण-पूर्व या पश्चिम दिशा में ये कागजात न रखें, वरना ये दिशा आपके मुकदमें, विवाद आदि को लम्बे समय तक खींच सकती है।

20-अन्डर ग्राउड भवन कभी भी सम्पूर्ण भवन के नीचे न बनवायें, इसे अपने भवन के कुल क्षेत्रफल के एक तिहाई भाग में उत्तर-पूर्व, या उत्तर दिशा में बनवाना चाहिए। दक्षिण एवं पश्चिम दिशा में कभी भी बेसमेंट ने बनवायें। यदि इन दिशाओं में बेसमेंट बन ही गया है तो उसे गैराज या भारी सामान रखने के लिए प्रयोग में लायें।

21-भवन में अन्य कमरों की तुलना में रसोईघर, स्नानघर, शौचालय, प्रसाधन कक्ष आदि के दरवाजे छोटे होने चाहिए। यदि ये दरवाजे बड़े होगे तो ग्रह स्वामी अपव्यय और अत्यधिक व्यय से परेशान रहेगा।

22-यदि किसी से पैसा ले रहे हैं तो कभी भी दो अंगुलियों से रूपया-पैसा न लें, ये दो अंगुलियां कैंची की नुकीली धार के समान कार्य करती हैं। जिससे धन हाथ में नहीं रूकता और खर्च हो जाता है, अतः हमेशा पांचों अंगुलियों से रूपये-पैसे लें।

23-अपने घर या ऑफिस  में अपनी नेम-प्लेट जरूर लगवायें, इसका प्रभाव यह होता है कि संभावनाएं स्वयं ही आपके घर या ऑफिस  का रास्ता ढ़ूंढ लेती हैं।

24-किसी मन्दिर के पास आवासीय मकान नहीं बनाना चाहिए। यदि मन्दिर है तो मन्दिर की गुमटी की छाया मकान के ऊपर नहीं पड़नी चाहिए। मन्दिर के ऊपर एक पताका लगी होती है, इस पताका की छाया जितनी दूर तक पड़ती हो वहां तक आवासीय भवन नहीं बनाना चाहिए।

पाठकों को इस संबंध में कोई और जिज्ञासा हो तो वास्तु के मेरे और आलेख पढ़े, मुझे कमैंटस करें या फिर मुझे मेल कर सकते हैं।

प्रस्तुति: संजय कुमार गर्ग, वास्तुविद्, एस्ट्रोलाॅजर  मो0 6396661036 / 8791820546 (Wh.)